जब भी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिलती है, उसके पीछे दो प्रमुख कारणों का जरूर जिक्र किया जाता है. पहला कच्चे तेल की कीमत में तेजी. दूसरा, रुपए में बड़ी गिरावट. आज ये दोनों की भारत के शेयर बाजार के लिए फेवर में थे. जहां रुपए में 91 पैसे की बंपर तेजी देखने को मिली. वहीं कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई. उसके बाद भी शेयर बाजार कारोबारी सत्र के दौरान दिन के पीक से 1000 से ज्यादा अंकों तक गिरा और बीते कारोबारी सत्र के मुकाबले में सेंसेक्स में 625 अंकों की गिरावट देखने को मिली. जिसकी वजह से शेयर बाजार निवेशकों को ट्रेडिंग डे के दौरान करीब 7 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया.

वास्तव में रुपए और कच्चे तेल की कीमत पर 5 कारण काफी भारी पड़ते हुए दिखाई दिए. जिसमें बॉन्ड यील्ड में तेजी शामिल है, जोकि मल्टी ईयर के हाई पर पहुंच गई है. विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली लगातार जारी है. मौजूदा साल में ये आंकड़ा 3 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है. ईरान वॉर में फिर से तीखापन आ गया है. जिसकी वजह से सेंटीमेंट खराब हुआ है. एशियाई बाजारों की गिरावट का असर भी भारत में देखने को मिला. अंत में निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग. पिछले हफ्ते शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था. 8 हफ्तों की लगातार गिरावट थमी थी. आइए आंकड़ों की भाषा में समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर शेयर बाजार में किस तरह की और कैसे गिरावट देखी गई?
शेयर बाजार में गिरावट
सोमवार को शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान पर बंद हुए थे. जहां सेंसेक्स करीब 300 अंकों की तेजी के साथ 72,771.32 अंकों पर ओपन हुआ था और सत्र के दौरान 72,884.25 अंकों के दिन हाई पर पहुंचा था, वहीं निफ्टी 70 से ज्यादा अंकों की तेजी के साथ 22,593.20 अंकों पर ओपन हुआ था, जो कि कारोबारी सत्र के दौरान 22,651.10 अंकों पर आ गया.
उसके बाद शुरू हुआ गिरावट का सिलसिला. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सेंसेक्स अपने दिन पीक से 1,036.15 अंक नीचे आ गया और पिछले हफ्ते आखिरी कारोबारी दिन के मुकाबले में 624.23 अंक नीचे आकर 71,848.10 अंक पर आ गया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी दिन के हाई से 298.75 अंकों की गिरावट के साथ 22,352.35 अंकों पर आ गया. जबकि पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन के मुकाबले में निफ्टी में 160 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखी गई.
सेंसेक्स पर टेक महिंद्रा के शेयरों में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई, जबकि आईटीसी, एसबीआई, भारती एयरटेल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एलएंडटी, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में 3 फीसदी तक की गिरावट आई. इस ट्रेंड के विपरीत, एमएंडएम, बीईएल और ट्रेंट शेयरों में लगभग 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. ब्रॉडर मार्केट्स ने बेहतर प्रदर्शन किया, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 1 फीसदी तक बढ़ गए.
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्सेस में 1% से अधिक की गिरावट आई, जिससे नुकसान हुआ, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी आईटी में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई. इस बीच निफ्टी ऑटो 1 फीसदी से अधिक उछल गया. बेंचमार्क इंडेक्सेस के लाल निशान में कारोबार करने के बावजूद, ओवरऑल मार्केट का दायरा सकारात्मक रहा, एनएसई में 1,474 गिरावट के मुकाबले 1,884 बढ़त देखी गई, जबकि 101 स्टॉक अपरिवर्तित रहे.
शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
बॉन्ड यील्ड कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर : दुनिया भर में बॉन्ड की बिकवाली तेज होती गई, जिससे बॉन्ड यील्ड में भारी उछाल आया. आम तौर पर, इससे इक्विटी मार्केट की तुलना में कम जोखिम वाले सरकारी डेट कॉन्ट्रैक्ट ज़्यादा आकर्षक लगने लगते हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में खत्म हुई तिमाही में 10साल के US ट्रेजरी यील्ड में 21वीं सदी की सबसे बड़ी तिमाही बढ़ोतरी दर्ज की गई. 10साल के US ट्रेज़री का यील्ड 5.3% से ऊपर चला गया, जो 2007 के पीक से ज्यादा है और 2002 की शुरुआत के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है. 30साल का यील्ड 5.6% तक पहुंच गया है, जो 2002 के बाद से नहीं देखा गया था. भारत का 10साल का बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.37% हो गया, जो तीन साल में सबसे ज्यादा है. यह RBI द्वारा बैंकिंग सेक्टर से अतिरिक्त लिक्विडिटी कम करने के उपायों की घोषणा के बाद हुआ है. RBI ने कहा है कि लेंडर्स को 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से CRR जरूरत का कम से कम 99% डेली बैलेंस बनाए रखना होगा, जो अब तक 90 फीसदी था.
FII की लगातार बिकवाली : अक्टूबर में FII की बिकवाली तेज हो गई है. विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में अब तक सिर्फ छह सेशन में 45,125 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे हैं, जो सितंबर महीने में कुल 45,536 करोड़ रुपए की निकासी के लगभग बराबर है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अक्टूबर में FII की निकासी में तेी के कारण 2026 में कुल FPI इक्विटी बिकवाली 3,60,952 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि FPI की इतनी बड़ी बिकवाली मुख्य कारण है कि भारतीय बाज़ार इस साल खराब प्रदर्शन कर रहा है और 2026 में अब तक निफ्टी का रिटर्न 13.87% रहा है.
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा : ईरान ने युद्ध खत्म करने के अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के हालिया जवाब को “नाकाफी” बताते हुए खारिज कर दिया है. साथ ही, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लड़ाई फिर से तेज हुई, तो इलाके के डेटा सेंटर्स और केबल्स पर हमले हो सकते हैं. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने कहा कि वॉशिंगटन को उन मुद्दों को साफ करना चाहिए जो तेहरान के लिए अभी भी स्पष्ट नहीं हैं. इस बीच, यमन के हूथी विद्रोहियों ने शनिवार को रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है. इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. सऊदी अधिकारियों ने रविवार को एयरपोर्ट पर हुए एक और हमले में भी लोगों के घायल होने की जानकारी दी. ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका हूथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी के हमलों में शामिल होने पर विचार कर रहा है, क्योंकि फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के साथ शुरू किया गया संघर्ष अब और फैल रहा है.
ग्लोबल मार्केट से कमजोर संकेत : आज दलाल स्ट्रीट भी एशियाई बाजारों की तरह गिरावट के दौर से गुजर रहा है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 4% गिरा, जबकि जापान का निक्केई इंडेक्स भी नुकसान के साथ बंद हुआ. चीन का शंघाई कंपोजिट और ताइवान वेटेड इंडेक्स भी नुकसान के साथ ट्रेड कर रहे हैं. पिछले हफ्ते वॉल स्ट्रीट इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन अभी डॉव जोन्स फ्यूचर्स में मामूली बढ़त देखी जा रही है.
प्रॉफिट बुकिंग : पिछले हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ बंद होने और लगातार आठ हफ्तों की गिरावट का सिलसिला टूटने के बाद, आज दलाल स्ट्रीट में गिरावट देखी गई. आज की गिरावट की एक वजह प्रॉफिट बुकिंग भी हो सकती है.
कैसा रह सकता है शेयर बाजार?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वीके विजयकुमार ने कहा कि बाजार ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां बाहरी चुनौतियां घरेलू फायदों पर हावी हैं. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर बाजार पर असर डालना जारी रखेंगे. FIIs निकट भविष्य में बिकवाली जारी रखेंगे और DIIs उनकी बिकवाली को खपाते रहेंगे. एनालिस्ट के अनुसार, निकट भविष्य में बाजार की स्थिति ऐसी ही रहने की संभावना है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह स्थिति कैसे आगे बढ़ती है और कुछ महीनों बाद बाजार किस स्तर पर होगा?
विजयकुमार ने कहा कि बाहरी चुनौतियों और लगातार FII बिकवाली के कारण भारत इस साल सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाज़ारों में से एक रहा है, जिसमें 2026 में अब तक लगभग 14 फीसदी का नकारात्मक रिटर्न मिला है. उन्होंने कहा कि इस तेज गिरावट ने वैल्यूएशन को उचित और कई सेगमेंट में आकर्षक बना दिया है. साथ ही, FY27 के लिए 7.1 फीसदी की शानदार GDP ग्रोथ का अनुमान और बेहतर होती कॉर्पोरेट मुनाफे की स्थिति बाजार को मजबूत बुनियादी समर्थन देती है.



