दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. उन्हें गुरुवार सुबह करीब 4 बजकर 20 मिनट पर गोवा के मणिपाल अस्पताल लाया गया. वह उस समय बेहोश थे. अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक डॉक्टरों ने CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया.

#WATCH | Veteran actor Nana Patekar was brought to Manipal Hospital in an unresponsive state at around 4:20 a.m., according to Dr. Shekhar Salkar, Chief of the Oncology Department at the hospital. Doctors performed CPR and made efforts to revive him, but he could not be saved. He was declared dead at 5:20 a.m.
#NanaPatekar
— DD News October 8, 2026
इस घटना के बाद एक सवाल फिर सामने आता है. हार्ट अटैक आने के बाद किसी व्यक्ति की हालत कितनी तेजी से गंभीर हो सकती है? क्या हर हार्ट अटैक कई घंटे तक चलता है? और महिलाओं में सर्वाइवल टाइम पुरुषों से ज्यादा होने की बात कितनी सही है? भारत में दिल की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है. ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज 2021 के मुताबिक, भारत में हृदय रोगों से हर साल करीब 28.6 लाख मौतें होती हैं, यानी औसतन करीब 7,800 मौतें रोजाना. आइए 5 फैक्ट्स के जरिए समझते हैं कि हार्ट अटैक कितना खतरनाक है और भारत में इससे मौत का जोखिम क्यों ज्यादा है…
1. भारत में कितने लोग हार्ट अटैक से मरते हैं?
भारत में दिल की बीमारियां मौत की बड़ी वजह हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की STEMI गाइडलाइन के मुताबिक, देश में होने वाली करीब 28.1% मौतें कार्डियोवस्कुलर बीमारियों से जुड़ी हैं. इनमें हार्ट की नसों से जुड़ी बीमारी और स्ट्रोक का हिस्सा करीब 80% है. भारत में हर साल 25 लाख से ज्यादा गंभीर हार्ट अटैक होने का अनुमान है. हालांकि, इन आंकड़ों से सिर्फ हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की रोजाना संख्या नहीं निकाली जा सकती. इसलिए हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक के आंकड़ों को अलगअलग समझना जरूरी है.
2. कितने लोग एक घंटे और 24 घंटे के भीतर दम तोड़ते हैं?
हार्ट अटैक में पहला घंटा बेहद अहम होता है. एक अध्ययन में अस्पताल के बाहर हुई हार्ट अटैक से जुड़ी मौतों को देखा गया. इनमें 45.2% मौतें लक्षण शुरू होने के पहले घंटे में हुईं. इनमें 28.9% लोगों की मौत अचानक या तुरंत हो गई. इसके बाद अगले 23 घंटों में 41.8% मौतें हुईं, जबकि 24 घंटे के बाद 10.7% मौतें हुईं. इसका मतलब यह नहीं है कि हर 100 हार्ट अटैक मरीजों में 45 की पहले घंटे में मौत हो जाती है. ये आंकड़े अध्ययन में दर्ज हुई मौतों के समय को बताते हैं.
भारत में इलाज में देरी बड़ी समस्या है. AIIMS की 2023 की स्टडी के मुताबिक, हार्ट अटैक से होने वाली आधे से ज्यादा मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले हो जाती हैं. करीब 10% मरीज ही लक्षण शुरू होने के पहले घंटे में सही हेल्थ सेंटर पहुंच पाए.
3. क्या महिलाएं पुरुषों से ज्यादा देर तक सर्वाइव करती हैं?
एक पुराने स्टडी में हार्ट अटैक के बाद महिलाओं के ज्यादा देर तक जीवित रहने की बात सामने आई थी. 1968 में 998 ऐसे मरीजों का अध्ययन किया गया, जिनकी मौत कोरोनरी आर्टरी डिजीज से हुई थी. इसमें पुरुषों में मौत तक का औसत समय 3 घंटे 30 मिनट और महिलाओं में 6 घंटे 18 मिनट था. 15 मिनट के अंदर 27% पुरुषों और 22% महिलाओं की मौत हो गई थी. हालांकि, इसे आज की स्थिति पर लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह अध्ययन करीब 58 साल पुराना था और इसमें सिर्फ उन मरीजों को शामिल किया गया था, जिनकी मौत हुई थी.
आज के भारतीय आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं. 41,832 भारतीय हार्ट अटैक मरीजों की एक स्टडी में अस्पताल में महिलाओं की मृत्यु दर 7.07% और पुरुषों की 4.07% थी. महिलाओं को PCI और थ्रंबोलाइसिस जैसे जरूरी इलाज भी पुरुषों से कम मिले. इसलिए पुराने और नए आंकड़ों को अलगअलग समझना जरूरी है.
4. 60 से कम और 60+ उम्र वालों में क्या फर्क?
उम्र बढ़ने के साथ हार्ट अटैक का खतरा और इससे होने वाली परेशानियां बढ़ती हैं. भारतीय अध्ययन में हार्ट अटैक वाली महिलाओं की औसत उम्र 61.2 साल थी, जबकि पुरुषों की 57.3 साल. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के मरीजों में महिलाओं की हिस्सेदारी 51.9% और पुरुषों की 38.9% थी. हालांकि, 60 साल की उम्र को खतरे की कोई तय सीमा नहीं माना जा सकता. एक और स्टडी में पाया गया कि कम उम्र की महिलाओं में हार्ट अटैक के बाद 30 दिनों में मौत का खतरा समान उम्र के पुरुषों से ज्यादा था. उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर कम हुआ और 75 साल से ज्यादा उम्र में यह अंतर महत्वपूर्ण नहीं रहा.
5. भारत में हार्ट अटैक से ज्यादातर लोग क्यों मरते हैं?
हार्ट अटैक से मौत की बड़ी वजहों में इलाज में होने वाली देरी शामिल है. कई लोग सीने के दर्द को गैस, एसिडिटी या थकान समझकर घर पर इंतजार करते रहते हैं. अस्पताल पहुंचने में देरी और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाने में लगने वाला समय भी मरीज की हालत बिगाड़ सकता है.
भारत में कई मरीजों को पहला ECG कराने तक पहुंचने में ही घंटों लग जाते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हार्ट अटैक से होने वाली करीब आधी मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले हो जाती हैं. गंभीर हार्ट अटैक में शुरुआती 90 मिनट के भीतर ब्लड फ्लो बहाल करना बेहद जरूरी माना जाता है. इसलिए डॉक्टर कहते हैं, Time is Muscle. यानी जितनी देर तक दिल की नस में ब्लड फ्लो रुका रहेगा, उतना ही ज्यादा हृदय की मांसपेशी को नुकसान हो सकता है.



