Himachal Se: भारत का बासमती चावल इन दिनों खास वजह से चर्चा में है. असल में लगभग चार लाख टन चावल देश के अलगअलग बंदरगाहों पर फंसा हुआ है. वजह है मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव. यह आंकड़ा केवल मार्चअप्रैल 2026 का है. इससे निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. जब तक मिडिल ईस्ट सामान्य नहीं होता तब तक इस तरह की बाधाएं बने रहने की आशंका है. आयातनिर्यात में बाधा की वजह से पूरी सप्लाई चेन बेपटरी हो चली है. पीएम नरेंद्र मोदी ने संभवतः इन्हीं कुछ ठोस वजहों से रविवार को अपील की है कि देशवासी पेट्रोलडीजल का इस्तेमाल कम करें. वर्क फ्राम होम कल्चर को बढ़ावा दें. भारत के बासमती चावल की बात करें तो सऊदी अरब इसका सबसे बड़ा खरीदार है.

Basmati Rice: सऊदी क्यों बना भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार? 5 बड़े कारण​
Basmati Rice: सऊदी क्यों बना भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार? 5 बड़े कारण​

अब सवाल है कि भारतीय बासमती चावल सऊदी अरब को क्यों पसंद है, क्या हैं इसके 5 कारण, बासमती चावल दुनिया में कहांकहां निर्यात होता है? कितना निर्यात होता है? टॉप फाइव देश कौन से हैं, जो भारत से बासमती मंगवाते हैं?

60 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल पूरी दुनिया तक पहुंचा

भारत का बासमती चावल दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखता है. इसकी खुशबू, लंबा दाना और पकने के बाद इसका स्वाद इसे खास बनाते हैं. यही वजह है कि खाड़ी देशों में इसकी मांग बहुत अधिक है. इनमें सऊदी अरब सबसे आगे निकल चुका है. अब वह भारत से बासमती चावल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है.

बासमती चावल की सबसे बड़ी ताकत उसकी खुशबू है.

वित्त वर्ष 202425 में भारत ने दुनिया भर में 60.65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात किया. इसकी कुल कीमत 50,312 करोड़ रुपये रही. भारत ने यह चावल 154 देशों को भेजा. इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय बासमती का बाजार लगातार मजबूत हो रहा है.

मात्रा के आधार पर वित्त वर्ष 202425 में भारत के बासमती चावल के टॉप पांच आयातक देश सऊदी अरब, इराक, ईरान, यमन और यूएई हैं. इन पांच देशों ने मिलकर लगभग 37.14 लाख मीट्रिक टन भारतीय बासमती खरीदा. यानी कुल निर्यात का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इन्हीं पांच बाजारों में गया. यह दिखाता है कि पश्चिम एशिया भारत के बासमती निर्यात का सबसे मजबूत केंद्र है.

सऊदी के बाद भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा आयातक इराक है.

सऊदी अरब कैसे बना सबसे बड़ा आयातक?

सऊदी अरब ने वित्त वर्ष 202425 में भारत से लगभग 11.73 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल खरीदा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह किसी भी दूसरे देश से अधिक है. इस तरह सऊदी अरब भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार बन गया. अब सवाल है कि सऊदी को भारत का बासमती इतना पसंद क्यों है? इसके पीछे कई ठोस कारण हैं.

1 खुशबू और स्वाद सबसे बड़ा कारण

बासमती चावल की सबसे बड़ी ताकत उसकी खुशबू है. सऊदी अरब में खाने में सुगंध और स्वाद दोनों को बहुत महत्व दिया जाता है. वहां कब्सा, बिरयानी, मांस वाले चावल और खास दावतों के व्यंजन बहुत लोकप्रिय हैं. इन व्यंजनों के लिए ऐसा चावल चाहिए जो पकने के बाद अलगअलग दानों में रहे. भारतीय बासमती इस कसौटी पर खरा उतरता है. जब बासमती पकता है, तो दाना लंबा हो जाता है. वह चिपकता नहीं है. यही गुण सऊदी के पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के भोजन में बहुत पसंद किया जाता है.

भारत लंबे समय से बासमती चावल का बड़ा उत्पादक और निर्यातक रहा है.

2 सऊदी के खानपान से अच्छा मेल

सऊदी अरब में चावल रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है. वहां सिर्फ रोटी या मांस नहीं, बल्कि चावल आधारित कई व्यंजन बनाए एवं खाए जाते हैं. परिवारिक दावत हो, शादी हो, रमजान हो या होटल का मेन्यू, चावल की मांग हमेशा बनी रहती है. भारतीय बासमती खास तौर पर मटन, चिकन और मसालेदार पकवानों के साथ बहुत अच्छा लगता है. उसका दाना लंबा रहता है और प्लेट में देखने में भी आकर्षक लगता है, इसलिए घरों के साथसाथ रेस्टोरेंट, होटल और कैटरिंग सेक्टर में भी इसकी मांग अधिक है.

3 भारतीय गुणवत्ता पर भरोसा

भारत लंबे समय से बासमती चावल का बड़ा उत्पादक और निर्यातक रहा है. दुनिया के कई खरीदारों को भारतीय बासमती की गुणवत्ता पर भरोसा है. सऊदी अरब भी उन्हीं बाजारों में है जहां स्थिर गुणवत्ता बहुत मायने रखती है. भारतीय निर्यातकों ने सालों से सऊदी बाजार की जरूरत को समझा है. वे अलगअलग ग्रेड, पैकिंग और क्वालिटी में चावल उपलब्ध कराते हैं. यही वजह है कि वहां के आयातक और कारोबारी भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ लंबे समय तक काम करना पसंद करते हैं.

भारत ने एक साल में 150 देशों से बढ़ाकर 154 देशों तक अपना निर्यात पहुंचाया.

4 भारतीय और दक्षिण एशियाई आबादी का असर

सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अन्य दक्षिण एशियाई लोग रहते हैं. इन लोगों के भोजन में बासमती चावल बहुत आम है. वे घरों में भी इसका उपयोग करते हैं और होटलरेस्टोरेंट में भी यही पसंद करते हैं. प्रवासी आबादी के कारण सऊदी बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों की मांग मजबूत रहती है. भारतीय किराना स्टोर, सुपरमार्केट और फूड सर्विस चैनल में बासमती की लगातार खपत होती है. इससे आयात का आधार और मजबूत हो जाता है.

5 सप्लाई, उपलब्धता और कीमत का संतुलन

किसी भी देश के लिए सिर्फ स्वाद काफी नहीं होता. नियमित सप्लाई भी जरूरी होती है. भारत सऊदी अरब को बड़ी मात्रा में लगातार बासमती चावल भेजने में सक्षम है. यह बहुत बड़ा कारण है. भारतीय बासमती में प्रीमियम क्वालिटी और बड़े पैमाने की उपलब्धता का संतुलन मिलता है. सऊदी के आयातकों को यह भरोसा रहता है कि उन्हें समय पर माल मिल जाएगा. साथ ही, अलगअलग दामों की श्रेणियों में विकल्प भी मिलते हैं. यही व्यापारिक सुविधा भारत को बढ़त देती है.

बासमती चावल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, भारत की वैश्विक पहचान भी है.

154 देशों तक पहुंच रहा बासमती चावल

ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 202425 में भारत ने दुनिया भर में 60.65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात किया. इसकी कुल कीमत 50,312 करोड़ रुपये रही. यह पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है. मात्रा के हिसाब से इसमें लगभग 15.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह आंकड़ा बताता है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय बासमती की मांग कमजोर नहीं हुई. उल्टा, बाजार और फैला है. भारत ने एक साल में 150 देशों से बढ़ाकर 154 देशों तक अपना निर्यात पहुंचाया.

असल में भारतीय बासमती चावल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं है. यह भारत की वैश्विक पहचान भी है. सऊदी अरब में इसकी लोकप्रियता कई कारणों से बढ़ी है. स्वाद, खुशबू, खाने की संस्कृति, भरोसेमंद गुणवत्ता, प्रवासी आबादी और मजबूत सप्लाई चेन ने इसे सबसे पसंदीदा बना दिया है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत का बासमती निर्यात मजबूत स्थिति में है, सप्लाई में जो फौरी बाधा आई है उसका हल बहुत जल्दी निकल आएगा. उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में बासमती चावल विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत साबित होगा.