Himachal Se: महाराष्ट्र में कुर्बानी को लेकर हुआ विवाद थम नहीं रहा. यहां के घाटकोपर पश्चिम में बुधवार को कुर्बानी के लिए लाए गए बकरों को लेकर तनाव की स्थिति बन गई. इससे पहले ठाणे में विवाद सामने आया था. जहां एक हाउसिंग सोसायटी में कुर्बानी के लिए बांधे गए बकरे के लिए शेड बनाया गया था. इसको लेकर सोसायटी में प्रदर्शन भी हुआ जहां लोग सूअर लेकर पहुंचे. बकरीद से पहले ही देश में कुर्बानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, लेकिन दुनिया के कुछ देश ऐसे हैं जहां कुर्बानी को लेकर रिकॉर्ड बनता है. बांग्लादेश में दुनियाभर में सबसे ज्यादा जानवरों की कुर्बानी दी जाती है.

Bakrid Qurbani: न सऊदी, न पाकिस्तान, बकरीद पर सबसे ज्यादा कुर्बानी देने वाला देश कौनसा?​
Bakrid Qurbani: न सऊदी, न पाकिस्तान, बकरीद पर सबसे ज्यादा कुर्बानी देने वाला देश कौनसा?​

इस्लाम में कुर्बानी देने का मतलब सिर्फ पशु बलि देना नहीं है. कुर्बानी अल्लाह के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है. इसका उद्देश्य इंसान के मन से अहंकार, स्वार्थ और सबसे प्यारी चीज को खुदा के लिए कुर्बान करने का जज्बा पैदा करना है. कुर्बानी का रिवाज इस्लाम में बहुत पुराना है, लेकिन कई देश हैं जहां इसका रिकॉर्ड बनता है. जानिए, कुर्बानी का रिकॉर्ड बनाने वाले देश कौन से हैं.

कुर्बानी का रिकॉर्ड बनाने वाले देश

दुनियाभर में सबसे ज्यादा कुर्बानी बांग्लादेश में दी जाती है. बांग्लादेश के पशु विभाग के आंकड़े बताते हैं, बकरीद के मौके पर साल 2024 में यहां 1 करोड़ से अधिक जानवरों की कुर्बानी दी गई. यह आंकड़ा मात्र 72 घंटे का था. इसमें 47.7 लाख गाय, 1.13 भैंस, 50.6 लाख बकरी और 4.7 लाख भेड़ें शामिल रहीं.

बांग्लादेश में सबसे ज्यादा कुर्बानी दी जाती हैं.

पाकिस्तान दूसरे नम्बर पर

बकरीद पर कुर्बानी के मामले में पाकिस्तान दूसरे नम्बर पर है. यहां साल 2024 में 68 लाख कुर्बानियां दी गईं. पाकिस्तान टैनर एसोसिएशन के मुताबिक, यहां दी गई कुर्बानियों में 29 लाख गाय, 33 लाख बकरी, 3,85,000 भेड़, 98,700 ऊंट और 1,65,000 भैंस थीं. यही नहीं, पाकिस्तान के बाद तुर्किए, इंडोनेशिया, भारत, सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं, जो कुर्बानी देने के मामले में आगे हैं.

पाकिस्तान में साल 2024 में 68 लाख कुर्बानियां दी गईं.

कुर्बानी लोगों की जीविका चला रही

इस्लाम में भले ही कुर्बानी का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है, लेकिन यह प्रक्रिया करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन भी बनती है. कुर्बानी चमड़ा उद्योगों को गति देती है. पशुओं की बिक्री देश की अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक रफ्तार देती है.

जैसे पाकिस्तान में पशुओं की बिक्री ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. कुर्बानी की मांग, पशु आहार आपूर्ति, ग्रामीण रसद और शहरी पशु चिकित्सा बाजारों में मांग, भारी आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देती है, जिससे छोटे किसानों की कमाई होती है.

तुर्किए भी उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा कुर्बानी दी जाती है.

तुर्किए मध्य पूर्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. यही नहीं, यह कुर्बानी के बड़े बाजार के तौर पर भी जाना जाता है. कुर्बानी के बाजारों में से एक होने के कारण यहां पशुपालन का दायरा काफी बड़ा है और बूचड़खाने बड़ी संख्या में हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ये भी देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देते हैं.

कुर्बानी क्यों?

बकरीद पैग़म्बर और हज़रत मोहम्मद के पूर्वज हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी को याद करने के लिए मनाई जाती है. इस्लाम में मान्यता है कि अल्लाह ने इब्राहिम की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए उनसे सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने को कहा था. इब्राहिम ने उस आदेश को पूरा करने के लिए अपने जवान बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का फैसला लिया था, लेकिन जैसे ही वो बेटे को कुर्बान करने वाले थे उसी समय अल्लाह ने बेटे की जगह एक दुंबे को रख दिया. इस तरह कुर्बानी की परंपरा चलन में आई. दुनियाभर के मुस्लिम ईदउलअज़हा को मनाते हैं और उसी दिन जानवर की कुर्बानी देते हैं.

FAQs on Eid al Adha

सवाल: कब है बकरीद?

जवाब: 28 मई, 2026

सवाल: क्या है बकरा ईद?

जवाब: यह बकरीद का ही एक नाम है.

सवाल: बकरीद पर सबसे ज्यादा कुर्बानी देने वाला देश कौन सा है?

जवाब: बांग्लादेश.

सवाल: कौन से जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है?

जवाब: बकरा, बकरी, भेड़, दुम्बा, भैंस, बैल और ऊंट.