
जयपुर। पिछले 50 दिनों में भारत, अमेरिका और इराक समेत 6 देशों की ऑयल रिफाइनरियों में रहस्यमयी आग लगी है। राजस्थान के पचपदरा मामले में NIA जांच कर रही है। विस्तार से जानें क्या यह वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा करने की कोई साजिश है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण पूरी दुनिया पहले से ही एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। इसी बीच, पिछले 50 दिनों के भीतर भारत सहित दुनियाभर के छह देशों की प्रमुख तेल रिफाइनरियों में आग लगने और धमाकों की एक बेहद रहस्यमयी सीरीज देखी गई है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये महज संयोग हैं या वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोई सोची-समझी साजिश? भारत की प्रमुख आतंकवाद निरोधी एजेंसी NIA (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान में हुई हालिया घटना की जांच शुरू कर दी है।
राजस्थान के पचपदरा में HPCL रिफाइनरी में आग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस रिफाइनरी का उद्घाटन किया जाना था, लेकिन ठीक एक दिन पहले सोमवार (20 अप्रैल) को इसमें भीषण आग लग गई। कंपनी (HPCL) की शुरुआती जांच में बताया गया कि हीट एक्सचेंजर सर्किट के एक वाल्व से हाइड्रोकार्बन के रिसाव के कारण आग लगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसे ‘संरचनात्मक रूप से सुरक्षित’ बताया है।
NIA और ATS की जांच: मामला केवल तकनीकी खराबी का नहीं लग रहा है। जयपुर से NIA की एक टीम (जिसमें खुफिया अधिकारी, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और साइबर विशेषज्ञ शामिल हैं) बुधवार को मौके पर पहुंची। यह टीम क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) की जांच कर रही है, जहां से आग शुरू हुई थी। राजस्थान एटीएस (ATS) की टीम ने भी रिफाइनरी प्रबंधन के साथ चर्चा की है। NIA की संलिप्तता यह इशारा करती है कि बाहरी ताकतों द्वारा ‘तोड़फोड़’ या आतंकवाद के एंगल से भी जांच की जा रही है।
मुंबई हाई में ONGC के प्लेटफॉर्म पर आग
राजस्थान की घटना से पहले, 4 अप्रैल को मुंबई तट के पास ONGC के SHP प्लेटफॉर्म पर आग लग गई थी। इस घटना में 10 कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं। आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन ONGC ने अभी तक इसके कारणों का खुलासा नहीं किया है।
दुनिया भर में आग और धमाकों का सिलसिला
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को जब से अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ हवाई हमले शुरू हुए, तब से ही दुनिया भर के ऊर्जा प्रतिष्ठानों में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी देश सीधे तौर पर ‘वॉर जोन’ यानी युद्ध क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं।
1 मार्च (इक्वाडोर): दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी की चार्ज पंप यूनिट में आग लग गई, जिससे 1,10,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला काम ठप हो गया।
17 मार्च (मेक्सिको): मेक्सिको की सबसे बड़ी और नई ‘ओल्मेका तेल रिफाइनरी’ में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई।
23 मार्च (अमेरिका – टेक्सास): टेक्सास की ‘वैलेरो पोर्ट आर्थर एनर्जी रिफाइनरी’ में एक धमाका हुआ। शुरुआत में इसके पीछे ईरान का हाथ होने की अटकलें लगाई गईं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
10 अप्रैल (अमेरिका – टेक्सास): टेक्सास की ही ‘मैराथन एल पासो रिफाइनरी’ में “तकनीकी समस्याओं” के कारण एक और बड़ी आग लगी।
16 अप्रैल (ऑस्ट्रेलिया): विक्टोरिया राज्य को 50% ईंधन की आपूर्ति करने वाली ‘विवा एनर्जी की कोरिओ रिफाइनरी’ में आग लग गई। इससे ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल उत्पादन पर असर पड़ने की चेतावनी दी गई है।
20 अप्रैल (रोमानिया): रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में एक थर्मल प्लांट में भी आग लगने की घटना सामने आई।
बुधवार, 22 अप्रैल (इराक): लेटेस्ट घटना इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी एरबिल की एक रिफाइनरी में हुए धमाके की है। इसका कारण और नुकसान का स्तर अभी स्पष्ट नहीं है।
सोशल मीडिया और विशेषज्ञों की चिंताएं
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कई लोगों ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया है। अरविंद नाम के एक वेरिफाइड X यूजर ने राजस्थान की घटना से ठीक चार दिन पहले (16 अप्रैल को) चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा था कि उन्हें अंदेशा है कि दुश्मन भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने और भू-राजनीतिक कारणों से तेल की कीमतें बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों में आग लगा सकते हैं। उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों को अंदरूनी तोड़फोड़ और सुरक्षा के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी थी। एक अन्य उत्तरी अमेरिकी X अकाउंट ने दावा किया कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि तेल आपूर्ति को बाधित करने का एक पैटर्न है।
पूरी दुनिया में इतनी कम अवधि (लगभग 50 दिनों) के भीतर इतनी सारी प्रमुख रिफाइनरियों में आग लगना महज एक इत्तेफाक नहीं माना जा सकता। भू-राजनीतिक तनाव और मध्य पूर्व के युद्ध के बीच ये घटनाएं ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। भारत द्वारा राजस्थान मामले में की जा रही NIA जांच जैसी गहन पड़ताल ही इस रहस्य से पर्दा उठा सकती है कि यह तकनीकी खामियों का नतीजा है या किसी बड़ी वैश्विक साजिश का हिस्सा।