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NEET UG Result : उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के देवकीपुर गांव के प्रभात कुमार यादव ने NEET UG 2026 में पास कर अपने परिवार और गांव का नाम रौशन किया है. प्रभात ने ऑल इंडिया रैंक 3864 हासिल की है और अब उनका दाखिला किंग जॉर्ज्स मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में MBBS के लिए हुआ है. उनके पिता महेंद्र कुमार यादव पिछले करीब 20 साल से मुंबई में ऑटो चलाकर परिवार का खर्च संभाल रहे हैं. पिता के संघर्ष और अपने सपने को प्रभात ने अपनी ताकत बनाया और दो साल तक पूरी लगन के साथ NEET की तैयारी की.

पिता 20 साल से मुंबई में चला रहे ऑटो

प्रभात के पिता महेंद्र कुमार यादव मुंबई में ऑटो-रिक्शा चलाते हैं. प्रभात बताते हैं कि उनके पिता कई बार रात में वीडियो कॉल करते थे. वह उन्हें थके और पसीने से तर-बतर हालत में खाना बनाते देखते थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पिता की मेहनत को देखकर प्रभात ने परिस्थितियों को लेकर शिकायत करने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने का फैसला किया. उनका कहना था कि उनके सामने सिर्फ पढ़ाई करने की जिम्मेदारी थी और पिता की मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही.

पहले IAS अफसर बनना चाहते थे

प्रभात का शुरुआती सपना डॉक्टर बनने का नहीं था. कक्षा 9 में वह UPSC की तैयारी करना चाहते थे. 10वीं के बाद उनकी सोच बदली और परिवार की सलाह पर उन्होंने मेडिकल की तयारी की. प्रभात ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 89.44 प्रतिशत और 12वीं में 83.44 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद NEET उनकी प्राथमिकता बन गया.

12वीं के बाद कोटा जाकर शुरू की तैयारी

प्रभात ने 12वीं तक की पढ़ाई जौनपुर में पूरी की. 12वीं के बाद प्रभात ने भी कोटा जाने का फैसला किया लेकिन परिवार के पास कोचिंग फीस और रहने के खर्च की चुनौती थी. उनके पिता की मासिक कमाई करीब 25 से 30 हजार रुपये थी. ऐसे में कोटा की महंगी कोचिंग का खर्च उठाना आसान नहीं था.

कोचिंग फीस में मिली मदद

प्रभात ने अपनी आर्थिक स्थिति बताते हुए कोचिंग संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा और फीस में रियायत देने का अनुरोध किया. उनकी अपील स्वीकार कर ली गई. उन्हें कोचिंग फीस में 10 से 20 प्रतिशत की छूट मिली और बाकी राशि को फाइनेंस किया गया. कोटा में पढ़ाई और रहने के अन्य खर्चों में प्रभात के मामा ने भी परिवार की मदद की. इस तरह पिता और मामा के सहयोग से प्रभात अपनी NEET की तैयारी जारी रख सके.

NEET UG 2025 में मिले थे 504 अंक

प्रभात ने पहली बार NEET UG 2025 में परीक्षा दी थी. उस प्रयास में उन्हें 504 अंक मिले. उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें BDS और BUMS जैसे दूसरे मेडिकल कोर्स में दाखिला मिल रहा था. प्रभात ने नामांकन नहीं लिया और दोबारा तैयारी करने का फैसला किया.

Instagram और YouTube से बनाई दूरी

NEET की तैयारी के दौरान प्रभात ने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी. उन्होंने Instagram और YouTube का इस्तेमाल नहीं के बराबर किया. उनका ज्यादातर समय क्लास, किताबों, मॉक टेस्ट और सेल्फ स्टडी में बीतता था. कभी-कभी वह हॉस्टल के पास मंदिर जाते या साथी छात्रों के साथ कुछ समय बिताते थे. इसके अलावा उनका पूरा फोकस पढ़ाई पर रहा.

दो साल की मेहनत के बाद मिली सफलता

NEET परीक्षा को लेकर पेपर लीक की खबरों ने प्रभात को भी परेशान किया था. दोबारा परीक्षा देने का विचार उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी. 16 जुलाई को NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी हुआ. इस बार प्रभात ने ऑल इंडिया रैंक 3864 हासिल की. इसके बाद उन्हें KGMU लखनऊ में MBBS की सीट मिली.

50 हजार रुपये की फीस जुटाना भी चुनौती

NEET में सफलता के बाद भी परिवार की आर्थिक मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं. KGMU में एडमिशन के लिए करीब 50 हजार रुपये जुटाना भी परिवार के लिए आसान नहीं था. प्रभात के पिता और मामा ने किसी तरह रकम का इंतजाम किया और उनका दाखिला कराया. प्रभात का कहना है कि MBBS में दाखिला उनकी परेशानियों का अंत नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की शुरुआत है.

रिजल्ट आते ही गांव में छा गई खुशी

16 जुलाई को रिजल्ट आने के बाद जौनपुर के देवकीपुर गांव में खुशी का माहौल हो गया. पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने प्रभात को बधाई दी. वहीं, मुंबई में ऑटो चलाने वाले उनके पिता के लिए भी बेटे की सफलता बड़ी राहत और खुशी लेकर आई. जिस पिता ने करीब 20 साल तक ऑटो चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां उठाईं, उनके बेटे का प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है.

पिता को मुंबई से गांव वापस लाना चाहते हैं

अब प्रभात का एक बड़ा सपना हैं कि भविष्य में उनके पिता को मुंबई में ऑटो चलाकर इतनी मेहनत न करनी पड़े. वे चाहते हैं कि वह अपने पिता को मुंबई से वापस गांव लाएं और परिवार के साथ रहें.

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की मदद का सपना

प्रभात डॉक्टर बनने के साथ उन छात्रों की मदद भी करना चाहते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं. उनका मानना है कि परिवार, शिक्षकों और समाज से मिलने वाले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की है और भविष्य में वह भी जरूरतमंद छात्रों की मदद करना चाहते हैं. दो साल की मेहनत, पिता के संघर्ष और परिवार के सहयोग से KGMU तक पहुंचे प्रभात के लिए MBBS की पढ़ाई उनके सपने की शुरुआत है. अब उनका लक्ष्य डॉक्टर बनकर अपने परिवार और उन छात्रों के लिए कुछ करना है, जो आर्थिक मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ने का सपना देखते हैं.