Prayagraj Coaching Safety Rules: राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रयागराज में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में करीब एक हजार कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 16 संस्थानों के पास ही अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र है। ऐसे में हजारों छात्रछात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

प्रयागराज में 1000 कोचिंग संस्थानों में सिर्फ 16 के पास फायर एनओसी, छात्रों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल​
प्रयागराज में 1000 कोचिंग संस्थानों में सिर्फ 16 के पास फायर एनओसी, छात्रों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल​

अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा

जानकारी के अनुसार, प्रयागराज के अलगअलग इलाकों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर बहुमंजिला इमारतों और संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं। इनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या हजारों में है, लेकिन अधिकांश संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था भी कई जगहों पर नाकाफी बताई जा रही है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा का बयान

मुख्य अग्निशमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से पंजीकृत कोचिंग संस्थानों की सूची प्राप्त हुई थी। उस समय जिले में 70 पंजीकृत कोचिंग संस्थान संचालित होने की जानकारी दी गई थी। सभी संस्थानों को अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

के अनुसार अब तक केवल 16 कोचिंग संस्थान ही सभी मानकों को पूरा कर फायर एनओसी प्राप्त कर सके हैं। बाकी संस्थानों को सुरक्षा मानकों का अनुपालन करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही संबंधित विभागों को भी स्थिति से अवगत कराया गया है ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

कोचिंग संस्थानों की नियमित जांच जरूरी

शिक्षा नगरी के रूप में पहचान रखने वाले प्रयागराज में की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में छात्र देश के विभिन्न राज्यों से आते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि प्रशासन को कोचिंग संस्थानों की नियमित जांच कर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।