मिडिल ईस्ट में बारूदी टेंशन है। अमेरिका ईरान युद्ध में फंसा हुआ है। ट्रंप के पास युद्ध से निकलने का कोई वॉर प्लान नहीं है। तो वहीं चीन अपनी परमाणु ताकत बढ़ाने में जुटा है। जिनपिंग के परमाणु प्लान पर सीक्रेट खुलासा हुआ। ऐसा खुलासा जिसने पेंटागन की टेंशन बढ़ा दी। परमाणु हथियारों की बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है ड्रैगन। की परमाणु मंशा जगजाहिर कर दी। हथियारों की होड़ में चीन क्या कर सकता है यह इस रिपोर्ट में बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने सिचुआ प्रांत के एक गांव से लोगों को निकाला और उस गांव में न्यूक्लियर वेपन फैसिलिटी स्थापित कर दी। अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि चीन दशकों से अपना परमाणु हथियार आधुनिकीकरण अभियान चला रहा है। इसके तहत छोटे-छोटे न्यूक्लियर वेपंस तैयार किए जा रहे हैं और उनको लॉन्च करने की फैसिलिटी तक बनाई जा रही है। लेकिन अब उसी जगह की सेटेलाइट तस्वीरें सामने जो चीन की गुप्त परियोजना का खुलासा कर रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने उस गांव की जमीन को समतल कर दिया और उस जगह पर न्यूक्लियर वेपन फैसिलिटी स्थापित की। इसके लिए कई नई इमारतों का निर्माण किया गया जहां आम लोगों का जाना सख्त मना है। बताया जा रहा है यह ढांचा 36,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसका निर्माण कंक्रीट और स्टील से किया गया। जिसमें रेडिएशन, मॉनिटर और ब्लास्ट प्रूफ दरवाजे लगाए गए। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसमें हवा को कंट्रोल करने वाला उपकरण भी लगाया गया। जो यूरेनियम और प्लूटोनियम को गुंबद के अंदर ही फंसाए रखने के लिए डिजाइन किया गया। चीन ने 4 साल पहले यानी साल 2022 में इस प्लान पर काम करना शुरू किया। लोगों को गांवों में उनके घरों से निकाला और जब लोगों ने इस बारे में सवाल किया तो स्टेट सीक्रेट का हवाला देकर उन्हें चुप करवा दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि करीबन 600 इमारतों को चीन अपने एटमी मिशन के लिए जमींदोज कर चुका है। इनकी जगह चीन ने एटमी केंद्र के लिए नई इमारतें बनाई है। जिनका 70% काम भी हो चुका है। चीन ने [संगीत] इस जगह को साइट 906 नाम दिया। फरवरी और मार्च में ही दिखी सेटेलाइट तस्वीरें बताती हैं। इस साइट पर काम बहुत तेजी से चल रहा है। चीन परमाणु हथियारों की होड़ में सबसे आगे निकलना चाहता है जो ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। चीन की विस्तारवादी नीति ताइवान पर ड्रैगन की रणनीति और अमेरिका से उसका टकराव किसी से छिपा नहीं है।






