
राजा रघुवंशी मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को शर्तों के साथ बेल मिली है. उसे मेघालय में ही रहना होगा और थाने जाना होगा. सोनम को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदार देने होंगे. साथ ही उन्हें हर सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित रहना होगा, गवाहों या सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी और कोर्ट की अनुमति के बिना क्षेत्र से बाहर नहीं जाना होगा.
सोनम के भाई गोविंद ने कहा- उसे कभी घर नहीं लाएंगे
इस बीच सोनम के भाई गोविंद ने जानकारी दी कि वो केस नहीं लड़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि सोनम को सरकारी वकील मिला है. गोविंद ने साफ किया कि सोनम से हमारे परिवार का कोई लेना देना नहीं है. साथ ही हम उसे कभी अपने घर इंदौर नहीं लाएंगे.
‘सोनम को ठीक से नहीं बताया गया कि किन आरोपों में हुईं गिरफ्तार’
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने सोनम को यह ठीक से नहीं बताया कि उन्हें किन आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है. कोर्ट के मुताबिक पुलिस द्वारा दिए गए ‘ग्राउंड ऑफ अरेस्ट’ दस्तावेज में कई गंभीर खामियां थीं. यहां तक कि हत्या से जुड़ी मुख्य धारा का भी सही उल्लेख नहीं किया गया था.
‘गिरफ्तारी के कारण साफ-साफ बताना संवैधानिक अधिकार’
कोर्ट ने माना कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के कारण साफ-साफ बताना उसका संवैधानिक अधिकार है. ऐसा नहीं होने पर गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानूनी रूप से कमजोर मानी जाती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है.
’90 में से केवल 4 गवाहों के बयान ही हो पाए’
सोनम करीब 10 महीने से जेल में थीं. मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, लेकिन अब तक 90 में से केवल 4 गवाहों के बयान ही हो पाए हैं. बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट आने और नए आरोपी जुड़ने से ट्रायल की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी आरोपी की गलती से नहीं हुई, इसलिए उन्हें अनिश्चित समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता.
कोर्ट ने सरकारी वकील के दलील को नहीं किया स्वीकार
सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि गिरफ्तारी में हुई गलती केवल तकनीकी थी और सोनम को आरोपों की जानकारी थी. लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और माना कि गिरफ्तारी के समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं हुआ.