Donald Trump gets Better Idea than Bombing: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने को लेकर कोई समय सीमा तय नहीं है. 12 अप्रैल को वार्ता टूटने के बाद से बातचीत ठप पड़ी है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इस मामले में जल्दबाजी की जरूरत नहीं है. एक इंटरव्यू में मार्था मैकलम से बात करते हुए ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्धविराम को कुछ दिनों के लिए बढ़ाने की खबरें गलत हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कोई तय समय नहीं है और न ही इसे जल्दी खत्म करने का दबाव है.

ट्रंप ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि वह अमेरिकी चुनावों को ध्यान में रखकर इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. उनका कहना है कि उनकी सरकार का लक्ष्य सिर्फ अमेरिका के लिए अच्छा समझौता करना है. हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध की वजह से उन्हें राजनीतिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है और उनकी अपनी पार्टी के कुछ लोग भी आलोचना कर रहे हैं. हालिया सर्वे में उनके वोटर्स भी उनकी नीतियों से खास खुश नहीं हैं लेकिन वे इसे राजनीति से इतर बेहतरी के लिए तैयार बता रहे हैं.

बमबारी से बेहतर से होर्मुज वाला दांव
इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया है. ईरान ने कुछ जहाजों पर हमला किया और कुछ को अपने कब्जे में लिया. ट्रंप ने कहा कि ये अमेरिकी जहाज नहीं थे, लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है. यह इलाका दुनिया में तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान पर आर्थिक दबाव, खासकर नौसैनिक नाकाबंदी, बमबारी से ज्यादा असरदार है. उनके मुताबिक ईरान को नाकाबंदी ज्यादा डराती है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेल के कुएं नष्ट हो जाते हैं, तो उन्हें फिर से चालू करना मुश्किल हो सकता है.

दरअसल ईरान नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहा है, लेकिन अमेरिका इस पर तैयार नहीं दिख रहा. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने संकेत दिया है कि यह नाकाबंदी और भी बढ़ सकती है. कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति जटिल बनी हुई है. पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी क्योंकि ईरान ने इसमें भाग लेने की पुष्टि नहीं की. ट्रंप ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची को समझदार बताया और उम्मीद जताई कि भविष्य में बातचीत फिर शुरू होगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी है और फिलहाल कोई समाधान नजर नहीं आ रहा. ऐसे में यह टकराव लंबा चल सकता है और युद्धविराम भी कमजोर बना हुआ है.