मध्य प्रदेश में बोर्ड रिजल्ट के बाद दो अलग-अलग जिलों से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. 10वीं और 12वीं में फेल होने पर दो छात्रों ने आत्मघाती कदम उठा लिया. किसी ने फांसी लगा ली तो किसी ने खुद को गोली मार ली.

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मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा के नतीजे जहां कई छात्रों के लिए खुशी लेकर आए, वहीं कुछ परिवारों के लिए यह दिन बेहद दुखद साबित हुआ. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। फेल होने का सदमा दो छात्रों के लिए इतना भारी पड़ा कि एक ने फांसी लगाकर जान दे दी, जबकि दूसरे ने खुद को गोली मार ली. इन घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है.

ये मामले सिर्फ दो परिवारों की त्रासदी नहीं, बल्कि उस बढ़ते दबाव की कहानी भी हैं जो आज छात्रों पर परीक्षा और परिणाम को लेकर बना हुआ है. नंबरों की इस दौड़ में हार को अंत समझ लेना कितना खतरनाक हो सकता है, यह इन घटनाओं ने एक बार फिर साफ कर दिया है.

छिंदवाड़ा में 10वीं की छात्रा हुई 3 विषयों में फेल

पहला मामला छिंदवाड़ा जिले के परासिया इलाके के मोहन नगर से सामने आया है. यहां 17 साल की सानिया का 10वीं क्लास का रिजल्ट आया, जिसमें वह तीन विषयों में पास नहीं हो पाई थी.

बाथरूम में लगाई फांसी

सानिया ने जैसे ही रिजल्ट देखा वह तुरंत बाथरूम में चली गई और अंदर से कुंडी लगा ली. जब काफी समय बाद भी वह बाथरूम से बाहर नहीं आई, तो घरवालों ने दरवाजा तोड़ा और देखा कि सानिया फंदे पर लटकी हुई थी. आनन-फानन में उसे नीचे उतारकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं.

सारे सब्जेक्ट्स में हुआ फेल

दूसरा मामला मुरैना जिले का है, जहां 20 साल का ऋतिक डंडोति 12वीं के सारे सब्जेक्ट्स में फेल हो गया था. इसके कारण वह बेहद परेशान था.

देसी कट्टे से मारी खुद को गोली

दरअसल रिजल्ट देखने के बाद ऋतिक वह कोतवाल डैम गया, जहां उसने देसी कट्टे से खुद को गोली मार आत्महत्या कर ली. फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को खबर दी, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी.

ये दोनों घटनाएं याद दिलाती हैं कि एग्जाम में फेल होना जिंदगी का आखिरी सच नहीं है. छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है, जिसे समय रहते समझना और संभालना बेहद जरूरी है. परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को असफलता से उबरने की ताकत दें, ताकि कोई भी इस तरह का मुश्किल कदम न उठाए.