AIIMS Delhi: दिल्ली स्थित एम्स में इलाज करा रही राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी परियानी की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और इलाज में देरी को लेकर सवाल उठे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के दिल के ऑपरेशन के लिए वर्ष 2014 में करीब डेढ़ लाख रुपये जमा कराने के बावजूद 13 साल तक सर्जरी की तारीख नहीं मिल सकी।

तन्वी की 24 अगस्त को तबीयत बिगड़ने पर उसे एम्स में भर्ती कराया गया था। करीब एक हफ्ते बाद 1 सितंबर की सुबह उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि लंबे समय से इलाज और ऑपरेशन को लेकर उन्हें लगातार तारीखें मिलती रहीं, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी।
दो साल की उम्र में पता चल दिल में छेद
परिवार के मुताबिक तन्वी को करीब दो साल की उम्र में दिल की बीमारी का पता चला था। वह नियमित जांच के लिए कोटा से दिल्ली एम्स आती थी। परिवार का कहना है कि ज्यादा चलने पर उसे सांस फूलने जैसी परेशानी होती थी। तन्वी कक्षा 9 में पढ़ रही थी।
एम्स ने दी सफाई
एम्स के अनुसार तन्वी को VSD विद पल्मोनरी एट्रेसिया नाम की जटिल जन्मजात हृदय बीमारी थी। अस्पताल के मुताबिक 2013 में उसकी कई महत्वपूर्ण जांचें की गई थीं। वर्ष 2017 में चिकित्सकीय टीम ने बीमारी की जटिलता को देखते हुए सर्जरी को संभव नहीं माना और मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह दी थी।
एम्स का कहना है कि बाद में वरिष्ठ विशेषज्ञों से भी राय ली गई और समान चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने आए। 24 अगस्त को भर्ती किए जाने के बाद बच्ची के लिए हार्टलंग ट्रांसप्लांट की संभावना भी जांची जा रही थी।
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मौत की समीक्षा के लिए जांच समिति
तन्वी की मौत के बाद एम्स प्रशासन ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए जांच समिति गठित
की है। अब समिति इलाज की प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड और मौत से जुड़े परिस्थितियों की जांच करेगी। रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही या देरी हुई थी या नहीं।
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