दुनिया के कई देश नशे की गिरफ्त में हैं. पूरी की पूरी पीढ़ी तबाह हो रही है. नशीले पदार्थों को रोकने के लिए अमेरिका ने हाल के दिनों में कई देशों के खिलाफ कार्रवाई की है. कई को धमकी भी दी है. भारत के सामने भी नशे की चुनौती खड़ी है. आइए, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस के बहाने चीन की एक प्रेरक कहानी जान लेते हैं. जिसकी वजह से संयुक्त राष्ट्र ने 26 जून को इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मंजूरी दी.

इस कहानी के तीन हिस्से हैं. भारत, ब्रिटेन और चीन. कहानी शुरू होती है 19वीं सदी में. यह चीन, भारत और ब्रिटेन के बीच के व्यापार और सत्ता के संघर्ष की है. अंग्रेजों ने भारत की कृषि भूमि पर अफीम की खेती शुरू करवाई. किसानों को विवश किया. चाय के बदले चीन को अफीम बेचनी शुरू की. कुछ ही वर्षों में चीन का युवा नशे की गिरफ्त में था. पूरा सामाजिक तानाबाना बिगड़ने लगा. फिर राजा ने अपने एक मजबूत अफसर लिन ज़ेक्सू को इस समस्या से निपटने का आदेश दिया और पूरी छूट भी दी. अपनी कार्रवाई की वजह से लिन का नाम इतिहास में दर्ज हो गया.
अंग्रेजों ने चीन तक अफीम कैसे पहुंचाई?
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अफीम की खेती को नियंत्रित किया. अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में कंपनी ने भारत के बंगाल और बिहार को अफीम उत्पादन का केंद्र बनाया था. भारतीय किसानों को जबरन अफीम उगाने के लिए मजबूर किया जाता था. यहां तैयार अफीम को कलकत्ता के बंदरगाहों से चीन भेजा जाता था, जिससे अंग्रेजों को भारी मुनाफा होता था. उधर, चीन में अफीम के जरिए पूरी की पूरी पीढ़ी तबाह हो रही थी. शुरू में समस्या निजी थी.
अंग्रेजों ने अफीम के जरिए बड़ी रकम जुटाई. फोटो: AI Image
धीरेधीरे यह राष्ट्रीय संकट बन गई. किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं. युवा काम नहीं कर पाए. सामाजिक और आर्थिक संतुलन टूटने लगा. सरकार की खज़ाना भी कमजोर हुआ. लोगों का जीवन और परिवार दोनों पूरी तरह से प्रभावित हुए. कुछ ही वर्षों में हाल यह हो गया कि शासनसत्ता तक ने महसूस किया कि यह अकेली चीज देश को तबाह कर देगी. फिर तैयार हुआ इससे निपटने का एक्शन प्लान.
लिन ज़ेक्सू ने अभियान आगे बढ़ाया
साल 1839 में चीन के सम्राट ने लिन ज़ेक्सू को अफीम रोकने के लिए विशेष अधिकार दिए. लिन एक शिक्षित और सख्त राजकर्मी थे. उन्होंने फैसला किया कि अफीम का व्यापार बर्दाश्त नहीं होगा. उनका लक्ष्य साफ था. वे हर हाल में चीन की जनता को बचाना चाहते थे. लिन ने सबसे पहले शहरों में रेड कराई. अफीम की खेपें जब्त की गईं. ब्रिटिश और अन्य विदेशी व्यापारियों से सख्त पूछताछ हुई. लिन ने भ्रष्ट अधिकारियों और तस्करों को भी निशाना बनाया. उन्होंने सार्वजनिक अभियान चलाया. लोगों को नशे के खतरों के बारे में बताया गया.
लिन ज़ेक्सू.फोटो: Wikimedia Commons
फिर शुरू हुई अफीम नष्ट करने की प्रक्रिया
लिन ने जब तय किया कि जब्त अफीम को नष्ट किया जाना है तो कुछ लोगों ने जलाने का सुझाव दिया. जिसे लिन ने नहीं माना. उनका तर्क था कि आग लगाने से उसका धुआं भी नशा फैला सकता था. उन्होंने समुद्र के किनारे तीन बड़ी खाइयां खुदवाईं. अफीम की ईंटों को चूने और नमक के पानी के साथ मिलाया गया ताकि वह पूरी तरह टूटफूट जाए और फिर उस मिश्रण को समुद्र में बहा दिया गया. यह प्रॉसेस कुल 23 दिनों तक लगातार चला. लिन ज़ेक्सू ने अफीम को नष्ट करने का यह कार्य 3 जून 1839 को शुरू किया था और यह 25 जून को समाप्त किया. इसी ऐतिहासिक घटना के सम्मान में और नशीले पदार्थों के खिलाफ वैश्विक एकजुटता दिखाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 1987 में 26 जून को इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया.
चीन ने बड़े स्तर पर अफीम को नष्ट कराया था. फोटो: Pexels
लिन ज़ेक्सू की वह प्रसिद्ध चिट्ठी
लिन ज़ेक्सू ने ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने बहुत ही तर्कसंगत सवाल पूछा था. लिन ने लिखायदि ब्रिटेन में अफीम का सेवन प्रतिबंधित है तो आप इसे चीन के लोगों को क्यों बेच रहे हैं? कहा जाता है कि यह पत्र कभी महारानी तक पहुंचने ही नहीं दिया गया, लेकिन यह लिन की नैतिकता को दर्शाता है. और इसी के बाद शुरू हुआ ब्रिटेन और चीन के बीच एक संघर्ष जो करीब तीन साल तक चला और चीन को इसमें बहुत कुछ खोना पड़ा.
खफा हुआ ब्रिटेन और दुनिया ने देखा पहला अफीम युद्ध
अंग्रेजों का बड़ा हित इस व्यापार से जुड़ा था. उनके लिए यह भारी मुनाफे का स्रोत था. लिन की कार्रवाई से ब्रिटिश व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ. इससे खफा ब्रिटेन ने सैनिक कार्रवाई कर दी. यह युद्ध करीब तीन साल तक यानी साल 18391842 तक चला. इसे दुनिया पहले अफीम युद्ध के रूप में जानती है. चीन को इस युद्ध से काफी कुछ नुकसान हुआ. समझौते करने पड़े. यहां तक कि हांगकांग का नियंत्रण ब्रिटेन को देना पड़ा लेकिन यह सब खोने के बाद चीन ने जो हासिल किया वह था युवाओं को नशे से मुक्ति, जिसका फायदा चीन आज तक उठा रहा है.
चीन अपनी हार को आज भी कहता है अपमान की सदी
लिन की इस बहादुरी के बाद जब चीन युद्ध हार गया, तो उसे नानजिंग की संधि करनी पड़ी, जिसे चीन के इतिहास में असमान संधि कहा जाता है. यहीं से चीन के उस दौर की शुरुआत हुई जिसे वे अपमान की सदी कहते हैं. आज भी चीन में लिन ज़ेक्सू को एक महान राष्ट्रीय नायक माना जाता है. अफीम के खिलाफ उनके निर्णायक फैसलों की वजह से उनकी मजबूत उपस्थिति है.
लिन ज़ेक्सू की नीतियां और मानवीय पहल
लिन सिर्फ सजा नहीं दे रहे थे. उन्होंने नशे से प्रभावित लोगों के इलाज की मांग की. इसके लिए जरूरी इंतजमात किये. उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा पर ज़ोर दिया. स्थानीय प्रबुद्ध लोगों और परिवारों को जागरूक किया गया. उनकी नीतियों का उद्देश्य सिर्फ दंड नहीं था. यह था समाज को ठीक करना और भविष्य सुरक्षित करना.
वैश्विक सन्दर्भ और व्यापार का खेल
अफीम युद्ध यह भी दर्शाते हैं कि किस तरह व्यापार और सत्ता आपस में जुड़े होते हैं. एक देश की फसल और दूसरे की पॉलिसी ने तीसरे देश को तबाह कर दिया. यह इतिहास कई देशों के लिए सबक बन गया. नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 26 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है. यह दिन नशे और अवैध तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाता है. लिन ज़ेक्सू की कार्रवाई आज भी प्रेरणा देती है. यह दिखाती है कि नीतिगत इच्छाशक्ति से बड़ा बदलाव आ सकता है.
आज के दौर में लिन जैसे नेताओं का महत्व
आज के समय में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्क वेब के माध्यम से होने वाली तस्करी ने इस लड़ाई को और कठिन बना दिया है. लिन ज़ेक्सू की कहानी हमें सिखाती है कि जब तक मांग और आपूर्ति के चक्र को कड़ाई से नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक समाज को सुरक्षित नहीं किया जा सकता.
ड्रग्स को व्यापक नक्शे पर देखना होगा
ड्रग्स केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं हैं. यह सामाजिकआर्थिक समस्या है. कानून, शिक्षा और उपचार, तीनों जरूरी हैं. अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आवश्यक है. ऐसा न हो कि किसी के फायदे के लिए दूसरे देश की जनता का नुकसान हो. हमें युवा शिक्षा पर ध्यान देना होगा. नशा छुड़ाने के केंद्र बढ़ाने होंगे. तस्करी के रास्तों पर कड़ी निगरानी रखनी होगी. अपराध और स्वास्थ्य को अलगअलग देखें लेकिन दोनों को जोड़कर भी देखे जाने का समय.
लिन ज़ेक्सू का कदम इतिहास में बलिदान और साहस का प्रतीक है. उन्होंने दिखाया कि एक व्यक्ति और एक सरकार बड़ा बदलाव ला सकती है. हम आज भी उस हिम्मत से सीख लेते हैं. नशे के खिलाफ लड़ाई में निर्णय और मानवता दोनों चाहिए. यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सुरक्षित समाज के लिए सतर्क रहना जरूरी है.



