France Protest: फ्रांस सुलग रहा है. युवाओं का प्रदर्शन हिंसक हो गया है. 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया जिसमें 87 फीसदी नाबालिग थे. जानें कैसे हुई इसकी शुरुआत.

फ्रांस में युवा सड़कों पर उतर आए हैं. मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो. इसकी शुरुआत सितम्बर में पेरिस के उत्तरी हिस्से हुई थी जो अब पूरे देश में फैल गया गया है. दिलचस्प बात है कि स्कूल-कॉलेजों में बढ़ती छात्रों की भीड़, जर्जर इमारतें और शिक्षकों की कमी सिर्फ भारत में नहीं है, फ्रांस जैसा देश भी इससे जूझ रहा है. यही मुद्दे फ्रांस में विरोध कर रहे छात्रों उठाए हैं. पिछले एक हफ्ते में सैकड़ों स्कूलों को बंद कराए गए हैं.

प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है. आंदोलन के दौरान कई जगह पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई. लेंस शहर के पास हुए धमाके में छात्र का हाथ फ्रैक्चर हुआ. एक 14 साल के छात्र के सिर पर आंसू गैस गोला गिरने की खबर आई. जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर होने के बाद सर्जरी हुई.

रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 400 स्कूल बंद रहे और कई जगह हिंसा हुई. फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने हिंसा को ‘हिंसक अल्पसंख्यकों का काम बताया है. न्याय मंत्रालय के मुताबिक गिरफ्तार 5,060 लोगों में से 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. सरकार का आरोप है कि आंदोलन की शुरुआत हार्ड-लेफ्ट नेताओं ने की, लेकिन LFI सांसद लुई बोयार्ड ने इससे इनकार किया.

क्यों शुरू हुआ था प्रदर्शन?

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस के उत्तर में स्थित एक उपनगरीय हाई स्कूल में हड़ताली शिक्षकों के समर्थन में शुरू हुआ प्रदर्शन अब एक राष्ट्रीय संकट में तब्दील हो गया है. 5,000 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है, जिनमें से अधिकांश नाबालिग हैं. उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.

France Protest Pictures

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की कई मांगे हैं.

छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. उत्तर-पूर्वी शहर लेंस में एक छात्र ने कथित तौर पर ग्रेनेड उठाते समय अपना हाथ खो दिया और टूर्स में एक अन्य छात्र ने अपनी एक आंख की रोशनी खो दी.

मांगे मानी जाने के बाद भड़की चिंगारी

पेरिस के सेंट-एक्सुपरी हाई स्कूल में 21 सितंबर को हुए शुरुआती विरोध प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया. छात्र अपने शिक्षकों के साथ मिलकर कर्मचारियों और संसाधनों की कमी का विरोध कर रहे थे. जब उनकी मांगें मान ली गईं और स्कूल में अतिरिक्त कर्मचारी भेजे गए, तो हड़ताल समाप्त हो गई. लेकिन तब तक चिंगारी भड़क चुकी थी. यही मांग दूसरे स्कूलों के लिए भी की जाने लगी. नतीजा, प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया. नतीजा, फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के लिए प्रदर्शन संकट बन गया.

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सितंबर पर शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है.

छात्राें ने क्या-क्या किया?

प्रदर्शन के साथ पेरिस और आसपास के इलाकों के हाई स्कूलों के छात्रों ने स्कूलों के गेट बंद करने शुरू कर दिए. कुछ ही दिनों में पूरे देश में, उत्तर में लिले से लेकर दक्षिण में मार्सिले तक, स्कूलों को बंद किया जाने लगा. छात्रों ने कूड़ेदानों में आग लगाई. बैरिकेड लगाए गए. शिक्षकों पर हमला हुए और पुलिस से झड़प की तस्वीरें सामने आईं.

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 100 से अधिक हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचा. आलोचकों ने पुलिस पर अत्यधिक सख्ती बरतने का आरोप लगाया.

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