भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है. इसे सिर्फ दो देशों के बीच एक सरकारी करार समझना भूल होगी. असल में, यह भारत के किसानों, छोटे कारोबारियों, आईटी पेशेवरों और युवाओं के लिए विश्व स्तर पर अवसरों का एक नया दरवाजा है. इस समझौते के लागू होने से भारत के करीब 99 फीसदी उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के एंट्री मिलेगी. इसका असर ये होगा कि भारतीय सामान ब्रिटेन में सस्ता होगा, वहां इसकी मांग बढ़ेगी और देश का निर्यात नई ऊंचाइयों को छुएगा.

कारोबार से लेकर खेती तक आएगा बंपर उछाल

आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारे किसानों और छोटे मैन्युफैक्चरर्स को अपने उत्पाद बेचने में कई तरह की टैक्स बाधाओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन CETA ने इस रास्ते को एकदम साफ कर दिया है. खेतीकिसानी की बात करें तो 1,437 से ज्यादा उत्पादों पर ब्रिटेन ने ड्यूटी बिल्कुल शून्य कर दी है. इसका सीधा फायदा अंगूर, प्याज, मसाले, आम और समुद्री उत्पाद का व्यापार करने वालों को मिलेगा. इसके अलावा, कपड़ा , चमड़ा , प्लास्टिक, और जेम्सज्वेलरी जैसे रोजगार देने वाले अहम क्षेत्रों में भी निर्यात तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. जब विदेशी बाजार में भारत का माल ज्यादा बिकेगा, तो जाहिर है फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा, जिससे देश के टियर2 और टियर3 शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

नौकरीपेशा युवाओं की राह हुई बेहद आसान

यह डील सिर्फ सामान के लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही को भी इसमें प्रमुखता दी गई है. अगर आप आईटी पेशेवर हैं या ब्रिटेन जाकर काम करने की इच्छा रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. इस समझौते के तहत पेशेवरों के लिए वीजा नियम पहले के मुकाबले काफी आसान किए गए हैं. ‘यंग प्रोफेशनल स्कीम’ के जरिए हर साल 3,000 भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में रहने तथा काम करने के लिए दो साल का वीजा मिलेगा. इसके अलावा, सबसे बड़ी राहत ‘डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन’ के रूप में मिली है. अब शॉर्टटर्म असाइनमेंट पर ब्रिटेन गए भारतीय पेशेवरों को वहां की सामाजिक सुरक्षा मद में अपनी सैलरी का हिस्सा नहीं कटवाना होगा. जानकारों के मुताबिक, इस एक फैसले से भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों को हर साल करीब 600 मिलियन डॉलर की भारीभरकम बचत होगी, जिससे उनकी टेकहोम सैलरी बढ़ जाएगी.

घरेलू उद्योगों की सुरक्षा पर भी पूरा फोकस

विदेशी बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के साथसाथ सरकार ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि हमारे अपने स्थानीय उद्योगों को कोई नुकसान न हो. सरकार ने बेहद समझदारी से मोलभाव करते हुए डेयरी, सेब, अनाज और सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. वहीं दूसरी तरफ, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन का बाजार खोल दिया गया है. कोरोना महामारी और ब्रेग्जिट के बाद से ब्रिटेन चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारतीय दवा कंपनियों और मैन्युफैक्चरर्स के लिए यह एक बड़ा बाजार हासिल करने का बेहतरीन और ऐतिहासिक मौका है.