उत्तर प्रदेश को बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा तोहफा मिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत 117.5 किलोमीटर लंबे कानपुरकबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है. इसकी अनुमानित लागत 7,145.14 करोड़ रुपये रखी गई है.

कानपुरकबरई ग्रीनफील्ड हाइवे को 4 लेन में विकसित किया जाएगा. लेकिन भविष्य में इसे 6 लेन तक विस्तार देने की योजना है. इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया द्वारा ‘बिल्डऑपरेटट्रांसफर ’ मोड के तहत बनाया जाएगा. इसके तैयार होने के बाद कानपुर और कबरई की दूरी 3.5 घंटे से घटकर सिर्फ 1.5 घंटे रह जाएगी.

मुख्य बातें

  • तकरीबन 1 करोड़ की आबादी को प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष तौर पर इसका लाभ मिलेगा.
  • यह प्रोजेक्ट यूपी, बुंदेलखंड क्षेत्र और मध्य प्रदेश के इकोनॉमी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.
  • तीन माह में जमीन अधिग्रहण के साथ ही टेंडर प्रक्रिया फाइनल कर दी जाएगी.
  • ‘बिल्डऑपरेटट्रांसफर ’ मोड के तहत बनाया जाएगा यह हाईवे.

यूपी के 4 जिलों और इतने विधानसभाओं को करेगा कवर

PIB की तरफ से जारी इस प्रोजेक्ट के नक्शे और डीपीआर के मुताबिक यह ग्रीनफील्ड हाईवे कानपुर, कानपुर देहात, हमीरपुर और महोबा को कवर करेगा. यह कानपुर नगर के घाटमपुर, महाराजपुर, कानपुर देहात के भोगनीपुर, सिकंदरा, हमीरपुर के हमीरपुर सदर, राठ महोबा के महोबा सदर, चरखारी होकर गुजरेगा. तकरीबन 1 करोड़ की आबादी को प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष तौर पर इसका लाभ मिलेगा. हाईवे के प्रभाव क्षेत्र आने इलाकों को रोजगार भी उपलब्ध होगा. यह प्रोजेक्ट यूपी, बुंदेलखंड क्षेत्र और मध्य प्रदेश के इकोनॉमी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.

93 गांवों की 1139 हेक्टेयर भूमि ली जाएगी

प्रोजेक्ट के DPR के मुताबिक इस ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए कुल 93 गांवों से जमीन ली जाएगी.कानपुर नगर और देहात के 49, हमीरपुर के 35 और महोबा के 9 गांवों के किसानों की 1139 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगा. तीन माह में जमीन अधिग्रहण के साथ ही टेंडर प्रक्रिया फाइनल कर दी जाएगी. जल्द ही जमीन का मूल्यांकन करने के साथ ही जिला प्रशासन को मुआवजा वितरण के लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा.

बेहतर कनेक्टिविटी के चलते आर्थिक विकास में आएगी मजबूती

इस ग्रीनफील्ड जरिए हाईवे कानपुर, महोबा, हमीरपुर, कबरई से लेकर बुंदेलखंड के झांसी, जालौन और मध्य प्रदेश के सागर, भोपाल के बीच तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी. साथ ही यह एनएच34, एनएच35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच46, एसएच91, एसएच10बी और एसएच42 के साथ भी स्ट्रेटेजिक कनेक्टिविटी देगा. इस हाईवे के क्षेत्रीय आर्थिक विकास में मजबूती आएगी.

कानपुरकबरई ग्रीनफील्ड हाईवे बुंदेलखंड को ऐसे होगा फायदा

झांसी, जालौन, महोबा और हमीरपुर के इलाके ग्रेनाइट, गिट्टी और अन्य खनिजों के लिए मशहूर हैं. ऐसे में कानपुरकबरई के जरिए यूपी में इन खनिजों का परिवहन तेज और सस्ता होगा. यूपी में निर्माण सामग्री की सप्लाई चेन और मजबूत होगी. इससे बुंदेलखंड के निर्माण सामग्री व्यापारियों को काफी लाभ होगा. साथ ही बुंदेलखंड का संपर्क कानपुर के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे पनकी, रानिया, जैनपुर, उन्नाव और ट्रांस गंगा इंडस्ट्रियल हब से सीधे जुड़ जाएगा.

इस ग्रीनफील्ड हाईवे के बनने से बुंदेलखंड के किसानों को अपना उत्पाद कानपुर और यूपी के अन्य बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचाने का मौका मिलेगा. साथ ही बेहतर कनेक्टिविटी के चलते किसानों की परिवहन लागत में कमी आएगी. इससे किसानों की आय में इजाफा हो सकता है.

मध्य प्रदेश को भी मिलेगा भरपूर लाभ

यह हाईवे आगे चलकर भोपालकानपुर आर्थिक गलियारे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा. इससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के बीच व्यापार और औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी.भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र से आनेजाने वाले मालवाहक वाहनों को बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा. इससे ट्रांसपोर्ट की लागत में कमी आएगी साथ ही समय का भी बचत होगा.

इस हाईवे के बन जाने से भोपाल के ऑटोमोबाइल , इंजीनियरिंग, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का यूपी का बड़ा उपलब्ध होगा. इससे व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी. भोपाल और उसके आसपास के जिलों में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस और ट्रांसपोर्ट हब तेजी से बनने शुरू हो जाएंगे.

उत्तर प्रदेश के लिए भी फायदेमंद

कानपुरकबरई ग्रीनफील्ड हाईवे बनने से उत्तर प्रदेश के शहरों को भी काफी लाभ होगा. बुंदेलखंड के इलाकों की निर्माण और खनिज सामाग्री तेजी से और लागत में कमी आने के चलते कम रेट पर मिल सकेगा. भोपाल के ऑटोमोबाइल , इंजीनियरिंग, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जु़ड़े उत्पादों की आसानी से और तेजी से पहले के मुकाबले कम कीमत उपबल्धता होगी.

क्या है BOT मोड, जिसके तहत बनेगा यह हाईवे?

कानपुरकबरई हाईवे को बिल्डऑपरेटट्रांसफर मोड के तहत बनाया जाएगा. यह एक सार्वजनिक निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल है. इसमें सरकार किसी निजी कंपनी को सड़क, पुल या एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजना बनाने, उसका संचालन करने अधिकार देती है. इस दौरान दिए गए समय के दौरान निजी कंपनी, जनता से टोल के माध्यम से अपना मुनाफा कमाने के बाद सरकार को वह प्रोजेक्ट वापस सौंप देती है.