लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल कोर्ट के जज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जज पर कई मामलों को अपने पास लेने, आरोपियों को जमानत देने और मुकदमों के अंतिम चरण में कुछ आरोपियों को बरी करने जैसे आरोप लगाए. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इसपर इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट मांगी है.

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जज वी. मोहना की पीठ ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मामले को देखने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के निर्देश दिए. साथ ही इसकी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मुक़दमे की सुनवाई के तौरतरीकों और रफ़्तार पर चिंता जताई थी और गवाहों की मौजूदगी पक्की करने के लिए निर्देश दिए थे.

ट्रायल जज पर क्या लगाए गए आरोप?

वकील प्रशांत भूषण ने आरोपी आशीष मिश्रा और अन्य के ख़िलाफ चल रहे मुकदमे की सुनवाई कर रहे ट्रायल कोर्ट के जज पर कई NDPS और SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों को खुद के पास मंगाने और उनमें जमानत देने के आरोप लगाए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे मामलों को भी अपने पास लिया गया जो सुनवाई के अंतिम चरण में थे और उनमें आरोपियों को बरी किया गया.

भूषण ने एक गवाह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए जाने का मुद्दा भी उठाया. गवाह ने बीमारी से संबंधित दस्तावेज अदालत में दिया था, इसके बावजूद NBW जारी किया गया. उन्होंने कहा कि यानी जिसने बीमारी की पर्ची दी थी. पुलिस उस गवाह के मातापिता के पास जाती है, डरातीधमकाती है, जिसका नतीजा यह होता है कि गवाह कहता है, कृपया मुझे माफ़ करें, मैं पेश नहीं होना चाहता.

गवाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस

प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि कुछ बहुत परेशान करने वाली घटनाएं हुई हैं, जो माननीय जजों की अंतरात्मा को झकझोर देंगी कि कैसे यह जज, जो अभी इस मामले को देख रहे हैं, काम कर रहे हैं? इसपर CJI सूर्य कांत ने कहा कि किसी अधिकारी के लिए काम करना बहुत मुश्किल हो जाएगा, अगर हम यह हिसाब रखने लगें कि किस केस में उन्होंने जमानत दी है.

CJI सूर्यकांत ने NBW जारी करने के आरोप पर कहा कि अगर कोई गवाह किसी वजह से अदालत में पेश नहीं हो पाता है तो सरकारी वकील को इसकी जानकारी कोर्ट के सामने रखनी होती है. साथ ही उन्होंने कहा कि असल में सरकारी वकील को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि उनका गवाह किसी ठोस, असली या अपने नियंत्रण से बाहर की वजह से आज पेश नहीं हो पा रहा है.

HC के चीफ जस्टिस से मांगी रिपोर्ट

CJI सूर्य कांत ने कहा कि अधिकारी पर दबाव को देखिए. उन्हें पता है कि सुप्रीम कोर्ट मामले को देख रहा है. वहीं अदालत ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वो आवेदन की एक कॉपी इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजे और उनसे मामले पर गौर करने और उचित सुधारात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध करें.

अदालत ने गवाहों और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि ‘वे आरोपों की जांच करें, ज़रूरी कदम उठाएं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। साथ ही सीलबंद लिफाफे में कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपने के निर्देश दिए हैं.

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया गांव में 3 अक्टूबर को हिंसा भड़क गई थी, जब लोग कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान सबसे भयावह घटना उस समय घटी, जब एक एसयूवी से प्रदर्शनकारी किसानों को कुचलने के बाद भड़की हिंसा में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी. इसमें एक पत्रकार, दो बीजेपी कार्यकर्ता और एसयूवी ड्राइवर भी शामिल थे.