
भारत ने पाकिस्तान और चीन की ओर से बनाए गए कथित ‘पाकिस्तान-चीन बाउंड्री ज्वॉइंट कमीशन’ को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने बुधवार (16 सितंबर 2026) को कहा कि इस आयोग का कोई कानूनी आधार ही नहीं है. भारत ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को दो टूक कहा कि उसे भारतीय जमीन पर अपनी ड्रामेबाजी बंद करनी चाहिए.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के पास उस भारतीय क्षेत्र को लेकर किसी भी तरह की व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है, जिस पर उसने भारत के मुताबिक अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है. विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और किसी तीसरे देश के साथ किया गया कोई समझौता भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की स्थिति को नहीं बदल सकता.
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1963 में हुए समझौते की दिलाई याद
भारत ने एक बार फिर 1963 में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते का मुद्दा उठाया. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी और इसे लगातार अवैध तथा अमान्य बताया है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने जिस क्षेत्र को लेकर चीन के साथ समझौता किया, वह भारतीय क्षेत्र है और इसलिए इस तरह की किसी भी व्यवस्था की कोई कानूनी वैधता नहीं हो सकती.
पाकिस्तान-चीन बॉर्डर कमीशन क्या है?
आम तौर पर पाकिस्तान-चीन बॉर्डर कमीशन का मतलब दोनों देशों की साझा सीमा को लेकर है. पाकिस्तान और चीन की करीब 523 किलोमीटर लंबी सीमा है. ये मुख्य रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन के शिनजियांग क्षेत्र के बीच है. दोनों देशों ने 1960 के दशक की शुरुआत में सीमा निर्धारण पर बातचीत शुरू की थी. इसका नतीजा 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के रूप में निकला.
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पाकिस्तान ने चीन को शक्सगाम घाटी सौंपने पर जताई थी सहमति
इस समझौते के तहत दोनों देशों ने सीमा रेखा तय की. इसमें पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी (Trans-Karakoram Tract) का क्षेत्र चीन को सौंपने पर सहमति जताई. भारत इस समझौते को मान्यता नहीं देताा है, क्योंकि भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के उस क्षेत्र पर समझौता किया; जो भारत का हिस्सा है. ऐसे में पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र को चीन को देने का अधिकार नहीं था.
भारत का ‘थिएट्रिक्स’ पर हमला
भारत ने पाकिस्तान की इस पहल को ‘थिएट्रिक्स’ यानी दिखावे की राजनीति करार दिया. भारत का मैसेज साफ है कि पाकिस्तान किसी भी ऐसे कदम के जरिए भारतीय क्षेत्र की स्थिति को बदल नहीं सकता.



