देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय होता दिखाई दे रहा है. भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे उत्तर भारत के लोगों के लिए राहत की खबर है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मूकश्मीर तक करीब 1,500 किलोमीटर लंबी मानसून ट्रफ सक्रिय हो गई है. इसी सिस्टम के प्रभाव से उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले चार दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना है. हालांकि, जहां यह मानसून कई राज्यों में राहत लेकर आएगा, वहीं पूर्वोत्तर भारत और पहाड़ी इलाकों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है.

आईएमडी के अनुसार, मंगलवार को मानसून ने एक साथ जम्मूकश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों में दस्तक दी. इसके साथ ही देश के 26 राज्यों में दक्षिणपश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून की रफ्तार कुछ दिनों के लिए धीमी पड़ गई थी. 24 जून को मध्य प्रदेश और गुजरात में प्रवेश करने के बाद मानसून करीब छह दिनों तक लगभग स्थिर रहा. इस वजह से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा और लोगों को भीषण गर्मी व उमस का सामना करना पड़ा.

बंगाल से जम्मू तक होगी भारी बारिश

अब मौसम का रुख पूरी तरह बदल गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मूकश्मीर तक फैली लगभग 1,500 किलोमीटर लंबी मानसून ट्रफ. मौसम विज्ञान की भाषा में मानसून ट्रफ कम दबाव वाले क्षेत्र की एक लंबी पट्टी होती है, जिसे दक्षिणपश्चिम मानसून की रीढ़ माना जाता है. यही ट्रफ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी हवाओं को देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाती है. जब यह ट्रफ सक्रिय होती है और उत्तर भारत की ओर बढ़ती है, तो अलगअलग क्षेत्र में तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है.

मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 से 4 जुलाई के बीच बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मूकश्मीर में भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है. कई इलाकों में गरजचमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं की भी संभावना जताई गई है. पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन, बादल फटने और नदियोंनालों के उफान पर आने का खतरा बना रहेगा, जबकि मैदानी इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है.

दिल्ली में भी मिलेगी भीषण गर्मी से राहत

दिल्लीएनसीआर के लोगों को भी अगले कुछ दिनों में गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के दौरान तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं. ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है.

दूसरी ओर, पूर्वोत्तर भारत में मानसून आफत बनकर बरस रहा है. अरुणाचल प्रदेश और असम के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. अरुणाचल प्रदेश की लेकू नदी में जलस्तर बढ़ने से असम के जोनाई क्षेत्र में बाढ़ आ गई है. राष्ट्रीय राजमार्ग515 के कई हिस्से पानी में डूब गए हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, राज्य के छह जिलों में 22 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. धेमाजी जिले के 96 गांव जलमग्न हो चुके हैं और राहतबचाव कार्य जारी है.

लोगों से सतर्क रहने की अपील

बारिश से जुड़ी दुर्घटनाएं भी सामने आ रही हैं. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में तेज बारिश के दौरान एक नीम का पेड़ ईरिक्शा पर गिर गया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई. वहीं हिमाचल प्रदेश के लाहौलस्पीति क्षेत्र के जहालमा नाले में बर्फ पिघलने के बाद अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है. हरियाणा के रोहतक में तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस, दिल्ली में 43.4 डिग्री और उत्तर प्रदेश के बांदा में 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में अगले कुछ दिनों तक हीटवेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है. यानी देश के अलगअलग हिस्सों में मौसम की दो अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं. कहीं बाढ़ और भारी बारिश तो कहीं अभी भी भीषण गर्मी पड़ रही है.

इन राज्यों में बारिश के साथ चलेंगी तेज हवाएं

1 जुलाई को छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, केरल, गोवा, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. राजस्थान में धूलभरी हवाओं के साथ बारिश हो सकती है, जबकि बिहार में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने का अनुमान है. 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. वहीं सिक्किम, गोवा, तेलंगाना और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का यह सक्रिय चरण कृषि के लिए लाभदायक साबित हो सकता है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ा सकता है. ऐसे में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रहने और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है.

आईएमडी ने जारी किया अलर्ट

कुल मिलाकर, अगले चार दिन देश के मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं. 1,500 किलोमीटर लंबी सक्रिय मानसून ट्रफ उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत दिलाने जा रही है, लेकिन इसके साथ भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और प्रशासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी होगा.