
पिछले साल दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है. NIA के मुताबिक, इस हमले के आरोपी डॉ. उमर उन नबी ने जूते में लगी एक खास पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के जरिए बम को ट्रिगर किया था. यानी यह बम पैर या जूते के जरिए ऑपरेट होने वाले कमांड मैकेनिज्म से जुड़ा था.
NIA की इस जांच से उस आशंका को खारिज किया गया है कि उमर नबी घबराहट में धमाका कर बैठा होगा या विस्फोट गलती से हुआ होगा. जांच एजेंसी के मुताबिक, बम को जानबूझकर ट्रिगर किया गया था और लाल किले को निशाना बनाने का फैसला सोच-समझकर लिया गया था. आरोपी समूह लाल किले को भारतीय राज्य का प्रतीक मानता था.
NIA ने इस मामले में मई 2026 में 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. दिल्ली की एक अदालत ने 29 अगस्त को इस चार्जशीट का संज्ञान लिया. हिंदुस्तान टाइम्स ने चार्जशीट की समीक्षा की है.
हमले में कितने लोगों की मौत?
इस आतंकी हमले में उमर नबी समेत 12 लोगों की मौत हुई थी. 29 लोग घायल हुए थे, जबकि 24 वाहन धमाके में क्षतिग्रस्त हुए थे. यह हमला डॉक्टरों के उस समूह से जुड़ा था, जिसका संबंध अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) से बताया गया है. AGuH, अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़ा संगठन है.
जूते के जरिए कैसे किया ब्लास्ट?
NIA ने चार्जशीट में बताया है कि फोरेंसिक जांच से यह बात सामने आई कि धमाके में वाहन में रखा गया IED यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस इस्तेमाल हुआ था. जांच एजेंसी के मुताबिक, धमाके की जगह से रेड-टेप ब्रांड का एक जूता बरामद हुआ था. इस जूते की एड़ी में धातु का एक टुकड़ा लगा हुआ था. NIA के अनुसार, सिर्फ एक जूते में इस तरह का धातु का हिस्सा मिलना इस बात का संकेत था कि IED को कंट्रोल करने के लिए एक कमांड मैकेनिज्म इस्तेमाल किया गया था.
चार्जशीट में कहा गया है कि नबी के शरीर के हिस्से के रूप में DNA फिंगरप्रिंटिंग से पहचान किए गए नाक के हिस्से से लिए गए स्वैब में TATP यानी ट्राइ-एसीटोन ट्राइ-पेरॉक्साइड और अमोनियम नाइट्रेट की मौजूदगी मिली. NIA के मुताबिक, इससे पता चलता है कि धमाके के समय नबी कार के अंदर था और उसी ने कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को ट्रिगर किया.
पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट कैसे काम करती थी?
NIA के मुताबिक, IED को सह-आरोपी जासिर बिलाल वानी ने तैयार किया था. जांच एजेंसी ने बताया कि वानी विस्फोटक बनाने का विशेषज्ञ था और उसने ट्रांसड्यूसर तकनीक का इस्तेमाल किया था. चार्जशीट में पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के बारे में बताया गया है कि यह खास तरह के सिरेमिक पदार्थों की मदद से यांत्रिक ऊर्जा यानी दबाव या कंपन को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदल सकती है. इसी तरह इलेक्ट्रिकल एनर्जी को कंपन या यांत्रिक गतिविधि में भी बदला जा सकता है.
जब इस प्लेट पर दबाव डाला जाता है तो इससे वोल्टेज पैदा होता है. वहीं, जब इसमें वोल्टेज दिया जाता है तो यह कंपन या आकार में बदलाव कर सकती है. इस तरह यह एक ट्रांसड्यूसर की तरह काम करती है, यानी ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में बदलती है.
NIA का दावा है कि वानी ने यह पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट नबी को दी थी. धमाके वाली जगह से नबी के जूते में इस प्लेट के बरामद होने और विस्फोटक विशेषज्ञों द्वारा इसके विश्लेषण के बाद जांच एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि नबी ने इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल Hyundai i20 कार में रखे विस्फोटक से धमाका करने के लिए किया था.
NIA की जांच में और क्या आया सामने?
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, नबी लाल किले के इलाके से अच्छी तरह परिचित था. वह इस क्षेत्र में कई बार गया था. जांच एजेंसी ने दिसंबर 2023 से मई 2025 के बीच की 12 ऐसी यात्राओं का जिक्र किया है, जब नबी अकेले या डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहिद सईद के साथ लाल किले के इलाके में गया था. NIA के अनुसार, इन लोगों ने लाल किले के आसपास के इलाके से IED तैयार करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदा था.
क्या था हमलावरों का मकसद?
चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी लाल किले को भारतीय राज्य का प्रतीक मानते थे. अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नबी के ठिकाने से मिले हैंड रिटन नोट्स में कथित तौर पर लिखा था कि AGuH के सदस्य लोकतंत्र के खिलाफ थे और भारत में शरिया कानून लागू करना चाहते थे.
NIA के मुताबिक, इसी सोच के तहत लाल किले के पास धमाका करना सिर्फ आतंकी कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसे राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के तौर पर भी देखा गया. इसी वजह से आरोपियों ने लाल किले से सटे इलाकों का कई बार दौरा किया था.
NIA की चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि नबी और गिरफ्तार AGuH सदस्य मुजम्मिल शकील ऐसे लोगों की तलाश में रहते थे, जिन्हें कट्टरपंथ की ओर लाकर अपने समूह को मजबूत किया जा सके. जांच एजेंसी के अनुसार, नबी, शकील और सईद ने इस उद्देश्य के लिए छात्रों और अपने साथी डॉक्टरों में भी संभावित लोगों को निशाना बनाया.
NIA का कहना है कि नबी ने सह-आरोपी जासिर बिलाल वानी और शोपियां निवासी यासिर अहमद डार को आतंकी समूह में शामिल होने के लिए तैयार किया. डार को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था. चार्जशीट के मुताबिक, वानी और डार को नबी और गिरफ्तार किए जा चुके विचारधारा से जुड़े आरोपी इरफान अहमद वागे ने आत्मघाती हमलावर बनने के लिए भी प्रेरित किया था.
दिया गया था कोड नेम?
NIA के अनुसार, नवंबर 2024 में नबी ने यासिर डार को श्रीनगर के इकबाल पार्क बुलाया. वहां नबी और इरफान अहमद वागे ने उससे मुलाकात की और उसे आगे कट्टरपंथी विचारों की ओर ले गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। चार्जशीट के मुताबिक, नबी ने डार को ‘45’ कोडनेम दिया था. इसके बाद शकील ने पुलवामा में डार से मुलाकात की और उससे कहा कि जब समय आएगा तो उसे इस्लाम के लिए बुलाया जाएगा.
NIA का कहना है कि मई-जून 2025 में नबी और वागे ने डार को आत्म-बलिदान वाली कार्रवाई के लिए शपथ दिलाई. इस पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग वागे के मोबाइल फोन में मिली.
अगस्त 2025 में नबी ने डार को ‘शहादत’ यानी आस्था के लिए जान देने के लिए तैयार रहने को कहा. हालांकि, NIA के मुताबिक, जब नबी को पता चला कि डार इसके लिए तैयार नहीं है तो उसने डार का मोबाइल फोन ले लिया और Telegram पर उनके बीच और अन्य लोगों के साथ हुई सभी चैट डिलीट कर दीं.
किसने की थी आर्थिक मदद?
NIA की चार्जशीट में डॉक्टर शाहिद सईद की भूमिका का भी जिक्र है. लखनऊ की डॉक्टर सईद ने मुजम्मिल शकील से शादी की थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, AGuH समूह को आर्थिक रूप से मजबूत करने में सईद की अहम भूमिका थी. यह समूह खुद को ‘AGuH Interim’ कहता था.
AGuH की शुरुआत जुलाई 2017 में जाकिर राशिद भट उर्फ जाकिर मूसा ने की थी. वह कभी बुरहान वानी का करीबी सहयोगी रहा था. बाद में उसने हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर AGuH बनाया था.
शुरुआती दिनों में AGuH ने जम्मू-कश्मीर में दूसरे आतंकी संगठनों के साथ समन्वय किया था. हालांकि, सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद इसकी गतिविधियां खत्म हो गईं.



