उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार की योजना करीब एक करोड़ महिलाओं तक पहुंचने की है. यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले इन महिलाओं को कुल एक लाख रुपये दिया जाएगा और सबसे बड़ी बात ये है कि इस लोन पर महिला को कोई ब्याज नहीं देना होगा, लेकिन ये रकम सीधे सरकार के खाते से नहीं आएगी. योजना का पूरा मॉडल बैंक के जरिए तैयार किया जा रहा है.

सरकार बैंक से मिलने वाले लोन की गारंटर बनेगी और ब्याज का बोझ खुद उठाएगी. पहली किस्त के तौर पर 20 दिसंबर को 20 हजार रुपये दिए जाने की तैयारी है. इसके बाद 30 हजार और फिर 50 हजार रुपये की अगली किस्त मिलेगी. लेकिन यहां एक शर्त भी है कि पहली किस्त चुकाने के बाद ही अगली किस्त का रास्ता खुलेगा. यानी योजना सिर्फ पैसा बांटने की नहीं, बल्कि महिलाओं को छोटे कारोबार और स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की है.
करीब एक करोड़ महिलाओं पर नजर
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को लेकर योगी सरकार एक बड़े आर्थिक मॉडल पर काम कर रही है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सरकार के पास पहले से ही महिलाओं का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है. आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 8 लाख 99 हजार 398 परिवारों की 98 लाख 76 हजार 389 महिलाएं स्वरोजगार समूहों से जुड़ी हुई हैं. यानी सरकार को अलग से करीब एक करोड़ महिलाओं तक पहुंच बनाने के लिए नया नेटवर्क तैयार करने की जरूरत नहीं होगी.
पहले 20 हजार, फिर 30 और 50 हजार
इस योजना का मॉडल तीन चरणों में तैयार किया जा रहा है. सबसे पहले महिला को 20 हजार रुपये की पहली किस्त मिलेगी. अगर महिला समय पर इस रकम को चुका देती है तो उसे अगली किस्त के तौर पर 30 हजार रुपये दिए जाएंगे. इसके बाद तीसरे चरण में 50 हजार रुपये की रकम मिल सकती है. यानी तीनों किस्तों को जोड़ दें तो एक महिला को कुल एक लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. इस लोन पर लगने वाले ब्याज का बोझ महिला पर नहीं पड़ेगा.
सरकार नहीं, बैंक देगा पैसा?
अब आते हैं इस योजना के सबसे अहम हिस्से पर. सवाल ये है कि अगर करीब एक करोड़ महिलाओं को लोन देना है तो सरकार के पास इतना पैसा आएगा कहां से? सूत्रों के मुताबिक, सरकार सीधे अपनी तिजोरी से पूरा पैसा देने के बजाय बैंक के जरिए लोन दिलाने का मॉडल तैयार कर रही है. यानी महिला को रकम बैंक से मिलेगी. इसमें सरकार की भूमिका होगी गारंटर की. और बैंक से लिए गए इस लोन पर जो ब्याज बनेगा, उसका भुगतान सरकार करेगी.
पहली किस्त का गणित कितना बड़ा?
अब इस योजना के पैमाने को समझिए. अगर करीब एक करोड़ महिलाओं को पहली किस्त के तौर पर 2020 हजार रुपये दिए जाते हैं तो रकम करीब 20 हजार करोड़ रुपये बैठती है. यानी सिर्फ पहली किस्त के लिए ही 20 हजार करोड़ रुपये के आसपास का वित्तीय इंतजाम करना होगा. इसके बाद 30 हजार रुपये की दूसरी किस्त और 50 हजार रुपये की तीसरी किस्त आती है. अगर किसी महिला को तीनों किस्तें मिलती हैं तो उसे कुल एक लाख रुपये मिलेंगे.
इस हिसाब से योजना का संभावित कुल क्रेडिट एक्सपोजर बहुत बड़ा हो सकता है, लेकिन बैंकिंग मॉडल होने की वजह से पूरा पैसा एक साथ सरकारी बजट से खर्च करने की जरूरत नहीं होगी. यही इस योजना का सबसे अहम वित्तीय पहलू है.
अगर सरकार खुद पैसा देती तो?
अगर सरकार बैंक के बजाय सीधे अपनी जेब से महिलाओं के खातों में पैसा ट्रांसफर करती, तो पहली किस्त के लिए ही करीब 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती. दूसरी किस्त में 30 हजार करोड़ रुपये और तीसरी किस्त में 50 हजार करोड़ रुपये. यानी तीनों किस्तों को जोड़ने पर संभावित रकम करीब एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, लेकिन मौजूदा मॉडल में सरकार सीधे एक लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के बजाय बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर सकती है.
योजना में सबसे बड़ा पेंच 20 हजार चुकाना होगा
अब इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त. पहली किस्त मिलने के बाद महिला को 20 हजार रुपये की रकम चुकानी होगी. अगर महिला पहली किस्त की रकम नहीं चुका पाती है तो उसे अगली 30 हजार रुपये की किस्त नहीं मिलेगी. यानी एक लाख रुपये का पूरा लाभ सभी महिलाओं को एक साथ नहीं मिलेगा. यह एक तरह से स्टेपअप क्रेडिट मॉडल होगा. पहले 20 हजार का इस्तेमाल करो. कारोबार या स्वरोजगार से कमाई करो. फिर 20 हजार वापस करो.
उसके बाद 30 हजार की अगली किस्त लो. फिर उसे चुकाने के बाद 50 हजार रुपये की तीसरी किस्त का रास्ता खुलेगा. इसका मकसद यही है कि पैसा सिर्फ बांटा न जाए, बल्कि उसका इस्तेमाल कारोबार खड़ा करने में हो और पैसा वापस बैंकिंग सिस्टम में आता रहे, लेकिन अगर महिला रकम नहीं चुका पाती है तो अगली किस्त रुक सकती है और रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है.
अब सबसे बड़ा सवाल सरकार पैसे का इंतजाम कैसे करेगी?
अब इस पूरी योजना का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है. उत्तर प्रदेश सरकार का मौजूदा बजट करीब 9 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर है और राजकोषीय घाटा भी एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. ऐसे में सरकार के सामने करीब एक करोड़ महिलाओं तक पहुंचने वाली इस योजना के लिए वित्तीय इंतजाम करना बड़ी चुनौती होगी. खास बात ये है कि इस योजना के लिए बजट में पहले से अलग से प्रावधान नहीं किया गया था और अनुपूरक बजट में भी इसका प्रावधान नहीं था.
ऐसे में अगर सरकार को सीधे कोई बड़ा बजटीय खर्च करना है तो उसके लिए विधानसभा की मंजूरी और बजट प्रावधान की जरूरत होगी. दूसरी तरफ अगर बैंक के जरिए लोन मॉडल लागू होता है तो सरकार पर पूरा मूलधन तत्काल खर्च करने का दबाव कम होगा, लेकिन ब्याज भुगतान, सरकारी गारंटी और डिफॉल्ट की स्थिति में संभावित वित्तीय जिम्मेदारी का इंतजाम भी सरकार को करना होगा.
महिलाओं को साधने का प्लान
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. उससे पहले योगी सरकार ने महिलाओं के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर साधने का प्लान किया है. बिहार में चुनाव से पहले ऐसी ही योजना की शुरुआत की गई थी, जिसमें करीब 75 लाख महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये भेजे गए थे. ये पैसा उन्हें रोजगार के लिए दिया गया था. पहले चर्चा थी कि इस पैसे को लोन को रूप में दिया जा रहा है, लेकिन बाद में साफ किया गया कि 10 हजार रुपये लोन नहीं सरकारी मदद है.



