Baghpat News: उज्जैन के करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बीच अब बागपत के बड़ौत में विराजमान हठीले हनुमान की कहानी भी चर्चा में आ गई है. उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब आठ फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को आधुनिक मशीनों की मदद से हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली. इसी तरह बड़ौत के पंचवटी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के बीच ऐसी ही मान्यता है कि जब हनुमानजी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई तो वह अपने स्थान से नहीं हिली.

ढाई फीट ऊंची है हनुमानजी की प्रतिमा

बड़ौत के पंचवटी मंदिर में हनुमानजी की करीब ढाई फीट ऊंची सिंदूर लगी प्रतिमा विराजमान है. मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक, कई साल पहले यहां मौजूद प्रतिमा को हटाकर उसके स्थान पर दूसरी खड़ी हनुमान प्रतिमा स्थापित करने का फैसला लिया गया था. इसके लिए पुरानी प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली.

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हटाने की कोशिश के बाद जुड़ गई कई मान्यताएं

मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास के बाद इलाके में कई तरह की परेशानियां सामने आईं. कुछ लोगों की अकाल मृत्यु की बातें भी कही जाती हैं. एक घटना को लेकर यह भी बताया जाता है कि किसी व्यक्ति को बंदरों ने ट्रेन के आगे धक्का दे दिया था, जिससे उसके पैर कट गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इन घटनाओं को प्रतिमा हटाने के प्रयास से जोड़कर देखा गया और आखिरकार प्रतिमा को हटाने का विचार छोड़ दिया गया. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच हनुमानजी का नाम ‘हठीले हनुमान’ पड़ गया. मान्यता बन गई कि बजरंगबली स्वयं अपनी जगह छोड़ना नहीं चाहते.

मंगलवार और शनिवार को उमड़ते हैं श्रद्धालु

पंचवटी मंदिर में मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त हनुमानजी को सिंदूर, देसी घी और प्रसाद चढ़ाकर अपनी मनोकामना मांगते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना बजरंगबली जरूर सुनते हैं. शनिवार को मंदिर परिसर में सुंदरकांड का पाठ भी किया जाता है. मंदिर में उस संत की समाधि भी बनी हुई है, जिन्होंने हनुमानजी की प्रतिमा की स्थापना की थी.

प्रतिमा नहीं हिली तो बढ़ी आस्था

मंदिर के महंत कुंदन भारद्वाज के मुताबिक, हठीले हनुमान के प्रति लोगों की आस्था पिछले कई वर्षों में लगातार बढ़ी है. उन्होंने बताया कि प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह अपने स्थान से नहीं हिली. इसके बाद श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो गया. महंत के मुताबिक, आज भी प्रतिमा को दूसरी जगह करने की बात सामने आती है तो श्रद्धालु इसे हनुमानजी की इच्छा से जोड़कर देखते हैं.

उज्जैन के खड़े हनुमान से जुड़ी चर्चा

उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा को हटाने में आ रही परेशानी ने बड़ौत के हठीले हनुमान की वर्षों पुरानी कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है. दोनों जगहों पर प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. हालांकि, प्रतिमा के नहीं हिलने से जुड़ी बातें मुख्य रूप से स्थानीय मान्यताओं और मंदिर से जुड़े लोगों के दावों पर आधारित हैं.