विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, दुनिया में हर साल 7,20,000 मौतों की वजह आत्महत्या है. आंकड़े बताते हैं कि उन देशों में आत्महत्याएं के 75 फीसदी तक मामले देखे गए जो निम्न और मध्यम आय वाले हैं. 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है. WHO के मुताबिक, आत्महत्या के पीछे कोई एक कारण नहीं होता. इसके पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक, जैविक, मनोवैज्ञानिक जैसे कई कारण होते हैं. हर साल 10 अगस्त को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है. जानें किस देश में सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है, जितने लोग आत्महत्या से जान गंवाते हैं, उससे कहीं ज्यादा लोग हर साल आत्महत्या की कोशिश करते हैं. रिपोर्ट की हालिया तस्वीर से पता चलता है कि आत्महत्या सिर्फ बुजुर्गों या किसी खास उम्र वर्ग की समस्या नहीं, बल्कि युवाओं को भी बड़े पैमाने पर अपनी चपेट में ले रही है.
सबसे ज्यादा आत्महत्या वाले देश
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रीनलैंड आत्महत्या के मामलों में सबसे आगे है. यहां हर 1 लाख लोगों पर 75 लोगों ने आत्महत्या की. दूसरे पायदान पर सूरीनाम और तीसरे पर दक्षिण कोरिया है. दिलचस्प बात है कि जापान और रूस भी इस लिस्ट में टॉप10 देशों में शामिल हैं.
अमीर नहीं, गरीब देशों में ज्यादा मामले
आमतौर पर माना जाता है कि तनाव और आत्महत्या जैसी समस्याएं विकसित और अमीर देशों में ज्यादा होती हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है. दुनिया में होने वाली कुल आत्महत्याओं में से करीब 73 प्रतिशत मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज हुए. यानी आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और सामाजिक असुरक्षा जैसे फैक्टर बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
डिप्रेशन और नशे की लत से जूझ रहे लोगों में आत्महत्या का खतरा ज्यादा. फोटो: Unsplash
किसे सबसे ज्यादा खतरा?
WHO के अनुसार, डिप्रेशन और नशे की लत से जूझ रहे लोगों में आत्महत्या का खतरा ज्यादा होता है, खासकर अमीर देशों में. लेकिन कई बार लोग अचानक आई मुश्किल में यह कदम उठाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जैसे आर्थिक तंगी, रिश्तों में तनाव या लंबी बीमारी का दर्द. इसके अलावा हिंसा, प्राकृतिक आपदा, दुर्व्यवहार, किसी अपने को खोने का गम और अकेलेपन का अहसास भी आत्महत्या की बड़ी वजह बताया गया है.
सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या को लेकर समाज में आज भी एक स्टिग्मा जुड़ा है, जिस वजह से बहुत से लोग मदद मांगने से हिचकते हैं. दुनिया के सिर्फ 38 देशों के पास ही आत्महत्या रोकथाम की राष्ट्रीय रणनीति है. इसके अलावा सिर्फ 80 देशों के पास ही इतना सटीक डेटा है, जिससे सही आत्महत्या दर का अनुमान लगाया जा सके बाकी देशों में यह समस्या दर्ज होने से भी छूट जाती है.
आत्महत्या के 73 प्रतिशत मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों में.फोटो: Unsplash
WHO का कहना है कि समय पर सही कदम उठाकर आत्महत्या को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून और मीडिया जैसे कई क्षेत्रों को मिलकर काम करना होगा.
बचाव के लिए WHO का LIVE LIFE कैम्पेन
आत्महत्या रोकने के लिए WHO ने “LIVE LIFE” नाम से पहल चला रहा है. जिसमें चार अहम उपाय सुझाए गए हैं जैसे आत्महत्या के साधनों तक पहुंच सीमित करना, मीडिया में आत्महत्या की जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग करना, टीनएजर्स में इमोशनल स्किल विकसित करना और आत्महत्या के रिस्क वाले लोगों की समय रहते पहचान और मदद करना.



