बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है. इससे पहले मायावती ने आकाश आनंद के ससुर और पार्टी के दिग्गज नेता अशोक सिद्धार्थ को राजनीतिक संन्यास लेकर दामाद के राजनीतिक भविष्य को बचाने की नसीहत दी थी. अशोक सिद्धार्थ ने राजनीतिक संन्यास का ऐलान किया, लेकिन दो घंटे बाद ही मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त कर दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती की आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ से नाराजगी की असली वजह क्या है?

बसपा में इस वक्त जो कुछ हो रहा है, उसे सिर्फ एक नेता को पार्टी से निकालने की कहानी मानना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी. क्योंकि इसके पीछे करीब तीन साल पुराना वो विवाद है, जब मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने खुद बीएसपी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे. दरअसल, नवंबर 2023… महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आकाश आनंद का करीब 22 मिनट का भाषण. मंच से उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछा था कि क्या बीएसपी में ऊंचे पदों पर बैठे कुछ लोग पार्टी को बाहर वालों से ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं? क्या योग्य लोगों को सही जिम्मेदारी नहीं मिल रही?
यही वो दौर था, जब मायावती आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने जा रही थीं. इसके बाद आकाश को उत्तराधिकारी बनाया गया. राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिली… फिर जिम्मेदारी छीनी गई… वापस दी गई… फिर पार्टी से निकाला गया… माफ किया गया… दोबारा जिम्मेदारी मिली… लेकिन अब कहानी फिर उसी मोड़ पर आ गई है. मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से ही बाहर कर दिया है. और इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं आकाश आनंद के ससुर और मायावती के कभी बेहद करीबी रहे अशोक सिद्धार्थ.
कहानी की शुरुआत औरंगाबाद से
इस कहानी को समझने के लिए करीब तीन साल पीछे जाना होगा. 23 नवंबर 2023 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आकाश आनंद ने बीएसपी के एक कार्यक्रम में ऐसा भाषण दिया, जिसने पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी. आकाश आनंद ने कार्यकर्ताओं से सवाल किया कि क्या बीएसपी में ऊंचे पदों पर बैठे कुछ लोग पार्टी को बाहर वालों से ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं? उन्होंने पूछा कि क्या योग्य लोगों को सही जिम्मेदारी नहीं मिल रही? आकाश ने ये भी कहा कि पार्टी के भीतर कई समस्याएं हैं और सिर्फ समस्या का पता लगना काफी नहीं है. उसका समाधान भी होना चाहिए.
आकाश आनंद ने दूसरी पार्टियों के सोशल मीडिया और युवा संगठनों का उदाहरण देते हुए कहा कि बीएसपी को भी तेजी से बदलती राजनीति के हिसाब से खुद को बदलना होगा यानी आकाश सिर्फ भाषण नहीं दे रहे थे… वो पार्टी के काम करने के तरीके में बदलाव की जरूरत की बात कर रहे थे, लेकिन बीएसपी में मायावती के अलावा किसी दूसरे नेता का पार्टी की कार्यप्रणाली पर इस तरह खुलकर सवाल उठाना सामान्य बात नहीं मानी जाती. यहीं से मायावती और आकाश आनंद के बीच दूरी की पहली बड़ी कहानी शुरू होती है.
भाषण के कुछ ही दिन बाद मिला सबसे बड़ा प्रमोशन
दिलचस्प बात ये है कि आकाश आनंद के इस भाषण के कुछ ही दिन बाद उनकी राजनीतिक हैसियत और बढ़ गई. 10 दिसंबर 2023 को मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी दी गई. यानी एक तरफ आकाश पार्टी की कार्यप्रणाली में बदलाव की बात कर रहे थे और दूसरी तरफ मायावती उन्हें अपने बाद पार्टी का चेहरा बनाने की तैयारी कर रही थीं. आकाश के लिए ये उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव था, लेकिन इसी के साथ उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भी थी.
पहली बार पद से हटाया गया
आकाश आनंद को मायावती की बनाई राजनीतिक शैली के भीतर रहकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी थी और यहीं से आने वाले दिनों में टकराव की कई परतें तैयार होती गईं. 7 मई 2024 को मायावती ने अचानक आकाश आनंद से उनकी सारी बड़ी जिम्मेदारियां छीन लीं. उत्तराधिकारी का पद गया. नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी चली गई. मायावती ने आकाश को राजनीतिक तौर पर अपरिपक्व बताया. यानी जिस आकाश को कुछ महीने पहले अपना उत्तराधिकारी घोषित किया गया था, वही आकाश अब मायावती की नजर में बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं थे.
सिर्फ 47 दिन बाद मायावती ने अपना फैसला पलट दिया
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. 23 जून 2024 को आकाश आनंद को फिर से उत्तराधिकारी बनाया गया और नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी वापस दे दी गई. यानी पहली बार साफ दिखा कि मायावती और आकाश के रिश्ते में नाराजगी के साथसाथ वापसी की गुंजाइश भी बनी हुई है. अब इस कहानी में अशोक सिद्धार्थ का किरदार समझना जरूरी है.अशोक सिद्धार्थ कोई सामान्य बीएसपी नेता नहीं थे. वह डॉक्टर थे. बाद में मायावती के कहने पर सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आए. बीएसपी संगठन में काम किया. आगे बढ़े… विधान परिषद पहुंचे और फिर राज्यसभा सांसद बने.
अशोक सिद्धार्थ के दामाद बने आकाश आनंद
एक वक्त में वह मायावती के बेहद भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे, लेकिन बाद में यही रिश्ता राजनीतिक विवाद में बदल गया. अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी आकाश आनंद से हुई. इस तरह अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं, पारिवारिक भी हो गया. यानी एक तरफ मायावती का भतीजा आकाश आनंद, दूसरी तरफ आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ और दोनों का संबंध सीधे मायावती के राजनीतिक परिवार से जुड़ गया. यहीं से मायावती के सामने एक सवाल खड़ा हुआ कि क्या पार्टी में परिवार और संगठन के बीच कोई समानांतर प्रभाव तैयार हो रहा है?
मार्च 2025 में फिर टूटा रिश्ता
2 मार्च 2025 को मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद से उनकी सारी जिम्मेदारियां छीन लीं. इसके अगले दिन यानी 3 मार्च को उन्हें पार्टी से ही बाहर कर दिया गया. मायावती ने तब कहा था कि आकाश को पश्चाताप करके अपनी राजनीतिक परिपक्वता दिखानी थी, लेकिन उनके मुताबिक ऐसा नहीं हुआ. मायावती ने आकाश पर अपने ससुर के प्रभाव में स्वार्थी और अहंकारी होने का आरोप भी लगाया, लेकिन कुछ ही समय बाद एक बार फिर मायावती ने आकाश को माफ कर दिया. 13 अप्रैल को उनकी वापसी हुई. इसके बाद मई में उन्हें फिर चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई और अगस्त में बीएसपी ने राष्ट्रीय संयोजक का नया पद बनाकर आकाश आनंद को उसकी जिम्मेदारी सौंप दी.
अशोक सिद्धार्थ पर कार्रवाई क्यों हुई?
अब आते हैं अशोक सिद्धार्थ पर… मायावती ने 2 अगस्त को अशोक सिद्धार्थ को बीएसपी से बाहर कर दिया. आरोप लगाया गया कि बारबार चेतावनी देने के बावजूद वह नहीं सुधरे. ये पहली बार नहीं था. इससे पहले 2025 में संगठन में गुटबाजी और पार्टी के खिलाफ साजिश के आरोपों के बीच अशोक सिद्धार्थ और उनके करीबी नितिन सिंह को पार्टी से बाहर किया गया था, लेकिन करीब छह महीने बाद अशोक सिद्धार्थ की वापसी भी हो गई. फरवरी 2026 में उन्हें राष्ट्रीय पदाधिकारियों में नंबर एक की जगह भी दी गई.
मायावती ने रखी सबसे बड़ी शर्त
यानी जिस नेता पर कार्रवाई हुई, वही कुछ समय बाद फिर संगठन के शीर्ष स्तर पर दिखाई दिए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी उतारचढ़ाव ने बीएसपी के भीतर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका को और ज्यादा चर्चा में ला दिया. अब आते हैं मौजूदा विवाद पर मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को पार्टी में स्वतंत्र होकर काम करना है तो उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेना होगा. मायावती का आरोप था कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी और बहुजन आंदोलन से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को महत्व दिया.
मायावती के मुताबिक, इसका नुकसान सिर्फ अशोक सिद्धार्थ को नहीं, बल्कि आकाश आनंद और बीएसपी मूवमेंट को भी हुआ. यानी मायावती ने पहली बार आकाश की राजनीतिक वापसी को सीधे उनके ससुर के राजनीतिक भविष्य से जोड़ दिया और यहीं से लगा कि शायद आकाश की बीएसपी में वापसी का रास्ता खुल सकता है.
अशोक सिद्धार्थ ने 17 घंटे में ले लिया संन्यास
मायावती के बयान के करीब 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया. उनका बयान बेहद भावुक था. उन्होंने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए दुनिया की किसी भी चीज से बड़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए परिवार और रिश्ते मायावती के आदेश से बड़े नहीं हैं. अशोक सिद्धार्थ ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि वह आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं या पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि आकाश उनके दामाद से पहले मायावती के भतीजे हैं और मायावती से बेहतर आकाश को कोई नहीं समझ सकता.
लेकिन ससुर ने संन्यास लिया, फिर भी आकाश नहीं लौटे
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद बीएसपी के भीतर माना जा रहा था कि अब आकाश आनंद को फिर जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन हुआ इसका उलटा. मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से ही बाहर कर दिया. मायावती ने आकाश पर परिवार के प्रति पार्टी से ज्यादा लगाव रखने और डबल माइंड होकर काम करने का आरोप लगाया. मायावती की नाराजगी की एक वजह ये भी बताई गई कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास वाले मुद्दे पर आकाश ने उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया. यानी मायावती के लिए मामला सिर्फ संगठनात्मक अनुशासन का नहीं था. वह इसे निष्ठा और पार्टी मिशन से जोड़कर देख रही थीं.
आकाश ने पद लेने से ही इनकार कर दिया था?
अब इस पूरे घटनाक्रम का एक और दिलचस्प पहलू सामने आता है. सूत्रों के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद आकाश आनंद को मनाने की कोशिश हुई. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे मायावती की पोस्ट को रिपोस्ट करने और सार्वजनिक तौर पर उनका धन्यवाद करने को कहा, लेकिन आकाश तैयार नहीं हुए. बताया गया कि आकाश का कहना था कि चाहे वह कुछ भी कर लें, मायावती को उन पर भरोसा नहीं है. इतना ही नहीं, आकाश इस बार बीएसपी में कोई पद लेने के लिए भी तैयार नहीं थे.
सूत्रों का कहना है कि आकाश आनंद ने कथित तौर पर कहा कि वह बिना पद के स्वतंत्र तौर पर पार्टी के लिए काम करने को तैयार हैं. उनके पिता आनंद कुमार ने भी उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन आकाश नहीं माने. जब मायावती को इसकी जानकारी हुई तो उनकी नाराजगी और बढ़ गई और इसके बाद आकाश को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया गया.
असली लड़ाई भरोसे की है?
अगर इस पूरी कहानी को एक लाइन में समझना हो तो सबसे बड़ा सवाल भरोसे का है. मायावती चाहती हैं कि बीएसपी में पार्टी और बहुजन मिशन सबसे ऊपर हो. जबकि आकाश आनंद लगातार युवा नेतृत्व, संगठन में बदलाव और नई राजनीतिक शैली की बात करते रहे हैं. 2023 के औरंगाबाद भाषण में भी आकाश ने पार्टी की कार्यप्रणाली में बदलाव और युवाओं को ज्यादा जिम्मेदारी देने की बात कही थी. वहीं मायावती की राजनीति लंबे समय से पूरी तरह केंद्रीकृत रही है. पार्टी की लाइन, संगठन का नेतृत्व और अंतिम फैसला मायावती के हाथ में रहा है.
ऐसे में आकाश का अलग शैली में आगे बढ़ना और पार्टी की अंदरूनी कमियों पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाना स्वाभाविक रूप से असहज करने वाला रहा होगा और जब यही समीकरण अशोक सिद्धार्थ के साथ जुड़ा, तो मामला और संवेदनशील हो गया. इस पूरी कहानी का एक और एंगल बीएसपी के भीतर की पावर पॉलिटिक्स से जुड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, बीएसपी के इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और अशोक सिद्धार्थ के बीच लंबे समय से तनातनी रही है.
रामजी गौतम vs अशोक सिद्धार्थ?
दावा है कि जबजब अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में वापसी हुई, रामजी गौतम का प्रभाव कम हुआ और उनके कार्यक्षेत्र में बदलाव हुआ. वहीं जब रामजी गौतम का प्रभाव बढ़ा तो अशोक सिद्धार्थ पार्टी में अलगथलग पड़ गए. अशोक सिद्धार्थ ने अपने संन्यास वाले बयान में भी ऐसे आरोपों की तरफ इशारा किया. उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ साथी उनके खिलाफ ये आरोप लगाते हैं कि वह पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं. अशोक सिद्धार्थ ने इसे अपने राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया.
अब आगे क्या?
आकाश आनंद के बाहर होने के बाद मायावती ने पार्टी में नेतृत्व का विकल्प भी तैयार कर दिया है. आकाश के स्थान पर उनके पिता और मायावती के भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही रामजी गौतम को भी यह जिम्मेदारी दी गई है. दूसरी तरफ आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को भी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा रही है. ईशान को कई राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी दिए जाने से उनके भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि आकाश आनंद की जगह अब ईशान आनंद को मायावती अपना उत्तराधिकारी बना सकती हैं.



