उत्तर प्रदेश कांग्रेस में प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बीच चल रहा आंतरिक शक्ति संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम एक ब्राह्मण चेहरे को अजय राय की जगह प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते हैं. वहीं कुछ नेता मुस्लिम नेतृत्व के पक्ष में हैं.

अजय राय को हटाने से भूमिहार समुदाय के नाराज होने का खतरा देखते हुए यह फैसला फिलहाल टलता जा रहा है. सूत्रों के अनुसार यदि राहुल गांधी अध्यक्ष पद में बदलाव पर सहमति दे देते हैं तो विधानमंडल दल की नेता आराधना तिवारी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने की संभावना सबसे मजबूत मानी जा रही है.
प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आलाकमान के सामने तीन विकल्प रखे हैं:
पहला विकल्प
अजय राय को हटाकर आराधना तिवारी उर्फ मोना को अध्यक्ष बनाना। वह फिलहाल रामपुर खास सीट से विधायक हैं और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता भी. राज्यसभा में उपनेता एवं प्रभावशाली नेता प्रमोद तिवारी की पुत्री होने के साथसाथ वह ब्राह्मण और महिला दोनों वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं. रामपुर खास सीट लगभग 45 वर्षों से प्रमोद तिवारी और अब उनकी बेटी के पास है.
दूसरा विकल्प
अजय राय की जगह किसी मुस्लिम नेता को अध्यक्ष बनाना. इस सूची में दानिश अली, इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी और नदीम जावेद के नाम शामिल हैं. इसके जरिये पार्टी दलितमुस्लिम गठजोड़ पर दांव लगाए, लेकिन मुस्लिम को अध्यक्ष बनाये जाने पर बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति में कामयाब हो सकती है.
तीसरा विकल्प
यदि चुनाव नजदीक होने के कारण अध्यक्ष पद में बदलाव नहीं किया जाता तो अजय राय के साथ मुस्लिम, दलित या ब्राह्मण समुदाय से वर्किंग प्रेसिडेंट नियुक्त किए जाएं.
अंतिम निर्णय राहुल गांधी के हाथ में है. वे इन तीन विकल्पों में से किसी एक को चुन सकते हैं या यथास्थिति बनाए रखने का फैसला भी कर सकते हैं. फिलहाल पार्टी के अंदर ये धारणा मजबूत है कि यदि अध्यक्ष पद बदला गया तो आराधना तिवारी का नाम सबसे आगे रहेगा. सूत्रों की मानें तो प्रदेश में हर स्तर पर संगठन सृजन के अभियान के तहत नियुक्तियां तय हो चुकी हैं. ऐसे में हर स्तर से लेकर जिलाध्यक्षों की नियुक्तयां प्रदेश अध्यक्ष के फैसले को लेकर घोषित नहीं हुई हैं. कुल मिलाकर इस पखवाड़े में यूपी कांग्रेस की तस्वीर साफ होने की पूरी संभावना है.



