अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है. इसका सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है. फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल बेचने में नुकसान हो रहा है.

सितंबर में अब तक तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है. इसके अलावा घरेलू LPG सिलेंडर पर भी करीब 200 रुपये की अंडररिकवरी हो रही है.
पेट्रोलडीजल की कीमतों में कब हुआ था बदलाव?
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले तीन महीने से ज्यादा समय से स्थिर हैं. आखिरी बार 25 मई को कीमतों में बदलाव किया गया था. उस समय पेट्रोल करीब 2.61 रुपये और डीजल करीब 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था. इससे पहले मई के दूसरे हिस्से में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी हुई थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर चार बार में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था.
भारत का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ा
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है. देश अपनी जरूरत का 88 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के आयात खर्च पर पड़ता है. तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल यानी PPAC के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैलजुलाई के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 56 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 40.5 अरब डॉलर था. हालांकि, इस दौरान भारत में कच्चे तेल के आयात की मात्रा लगभग स्थिर रही. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में करीब 81.9 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया गया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 81.5 मिलियन टन था.



