वेस्ट बैंक को लेकर इजराइल और ब्रिटेन के बीच विवाद थम नहीं रहा. अब इजराइल के विदेश मंत्री ने यरूशलम में UK का वाणिज्य दूतावास को बंद करने का ऐलान किया है. यह घोषणा उस ऐलान के बाद की गई है जिसमें मंगलवार को ब्रिटेन ने इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों से आयात होने वाले सामान पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री एडवर्ड मिलिबैंड ने संसद में यह घोषणा की और यह भी कहा कि फ्रांस और कनाडा भी ऐसा ऐलान करेंगे. ज्यादातर लोग एम्बेसी और कॉन्सुलेट को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर होता है.इनके काम, दर्जा और जिम्मेदारियों में काफी अंतर होता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इनमें क्या अंतर होता है.

पहले एम्बेसी को समझें

एम्बेसी को हिंदी में दूतावास कहते हैं. यह अंग्रेजी के शब्द ‘Ambactia’ से निकला है, जिसका मतलब होता है ‘सेवा’ या ‘प्रतिनिधिमंडल’. दूतावास किसी एक स्वतंत्र देश का दूसरे स्वतंत्र देश की राजधानी में स्थापित सबसे बड़ा और सबसे आधिकारिक राजनयिक मिशन होता है. जैसे भारत का अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में दूतावास है, क्योंकि वह अमेरिका की राजधानी है।

दूतावास का मुखिया राजदूत होता है, जो अपने देश के राष्ट्राध्यक्ष यानी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का सीधा व्यक्तिगत प्रतिनिधि माना जाता है. राजदूत को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विशेष राजनयिक प्रतिरक्षा हासिल होती है, यानी मेजबान देश के कानून के तहत उन्हें गिरफ्तार या मुकदमे में नहीं घसीटा जा सकता.

कॉन्सुलेट कितना अलग है?

कान्सुलेट को हिंदी में वाणिज्य दूतावास कहते हैं, यह एक शाखा कार्यालय होता है, जो आमतौर पर राजधानी के अलावा किसी बड़े शहर में खोला जाता है. खासकर वहां, जहां किसी देश के नागरिकों की तादाद ज्यादा हो या व्यापारिकसांस्कृतिक गतिविधियां अधिक हों. मिसाल के तौर पर, भारत का अमेरिका में दूतावास वॉशिंगटन डीसी में है, लेकिन न्यूयॉर्क, शिकागो, ह्यूस्टन और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों में भारत के वाणिज्य दूतावास मौजूद हैं.वाणिज्य दूतावास का मुखिया कॉन्सुल या कॉन्सुल जनरल कहलाता है. यह पद दूतावास के अधीन काम करता है.

दोनों में असली फर्क क्या है?

  1. दर्जा और जगह: दूतावास सिर्फ राजधानी शहर में एक ही होता है और यह सर्वोच्च राजनयिक मिशन है। वहीं वाणिज्य दूतावास किसी भी देश में एक से ज्यादा शहरों में खोले जा सकते हैं. ये दूतावास के तहत काम करते हैं.
  2. काम करने का तरीका: दूतावास मुख्य रूप से दो देशों के बीच राजनयिक, राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को संभालता है. जैसे सरकारसेसरकार की बातचीत, संधियां, और द्विपक्षीय नीतियां. वहीं, वाणिज्य दूतावास का काम सीधे नागरिकों से जुड़ा होता है, जैसे वीज़ा जारी करना, पासपोर्ट संबंधी सेवाएं, व्यापार को बढ़ावा देना, और विदेश में फंसे या मुश्किल में पड़े अपने देश के नागरिकों की मदद करना.
  3. मुखिया का पद: दूतावास का प्रमुख राजदूत होता है, जबकि वाणिज्य दूतावास का प्रमुख कॉन्सुल या कॉन्सुल जनरल कहलाता है. राजदूत की तुलना में कॉन्सुल को मिलने वाली राजनयिक प्रतिरक्षा भी सीमित होती है.
  4. न होने की स्थिति में: अगर किसी शहर में वाणिज्य दूतावास मौजूद नहीं है, तो वहां का काम सीधे दूतावास या हाई कमीशन के जरिए ही संभाला जाता है.