आज यानी देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भक्तजन श्रद्धा भाव से श्रीकृष्ण की पूजाअर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात के समय भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजाअर्चना की जाती है और इन्हें भोग लगाया जाता है।
श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव के बाद व्रत का पारण भी किया जात है। जन्माष्टमी के व्रत का पारण बेहद खास होता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वैसे यह अन्य व्रतों के पारण से काफी अलग होता है। इसमें व्रत वाले दिन ही उपवास खोला जाता है। इसके साथ ही व्रत के पारण में अन्न खाना भी अनिवार्य है। आइए आपको बताते हैं कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के पारण की विधि और व्रत खोलते वक्‍त क्‍या खाना चाहिए।
रात 12 बजे के बाद किया जाता है पारण
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात करीब 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक, पूजन, आरती और भोग लगाया जाता है।
ऐसे में कई लोग भगवान के जन्म और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके उसी समय व्रत खोलें। इसका मतलब है कि रात 12 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं। कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करते हैं।
सबसे पहले लें भगवान का प्रसाद 
जब आप व्रत खोलें तो सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण जरुर करें। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखनमिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फल से होनी चाहिए। पहले चरणामृत ग्रहण करें, फिर थोड़ा प्रासद लेकर अपना व्रत खोलें।
जन्माष्टमी पर रात में ही क्यों खोला जाता है व्रत?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय के दौरान हुआ था। इसलिए रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।