अडानी ग्रुप कांग्रेस और दूसरे नॉनबीजेपी शासित राज्यों में अपना कारोबार बढ़ा रहा है. ग्रुप सड़क, बंदरगाह, बिजली, रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट और डेटा सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जिनमें लगभग 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है. राज्य सरकारें इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोनॉमिक ग्रोथ और रोजगार पैदा करने के लिए प्राइवेट कैपिटल की ओर रुख कर रही हैं. इसकी जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि पोर्ट से लेकर एनर्जी तक के कारोबार में शामिल यह ग्रुप राजनीतिक सीमाओं से परे अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, बिहार और आंध्र प्रदेश की सरकारें इस ग्रुप से निवेश की उम्मीद कर रही हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर अडानी ग्रुप किस नॉन बीजेपी राज्य में कितना निवेश कर रहा है.

कर्नाटक

कर्नाटक में, बेंगलुरु में हेब्बल और सेंट्रल सिल्क बोर्ड को जोड़ने वाली 16.75 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित उत्तरदक्षिण टनल रोड के दोनों पैकेज के लिए अडानी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 22,267 करोड़ रुपए की बोली लगाई, जो दूसरी सबसे कम बोली से लगभग 3,500 करोड़ रुपए कम है. कॉन्ट्रैक्ट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है.

बेंगलुरु में ट्रैफिक की पुरानी समस्या को कम करने के मकसद से शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट कर्नाटक सरकार के लिए राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील परीक्षा बन गया है, क्योंकि यह बोली सरकार के अपने अनुमान से अधिक है. बोली सार्वजनिक होने के कुछ समय बाद, ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने पिछले महीने बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की थी. अडानी की कर्नाटक में पहले से ही बड़ी मौजूदगी है, जिसमें 1,200 मेगावाट का उडुपी पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं.

केरल

केरल में, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन ने विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट विकसित किया है. यह गहरे पानी वाली कंटेनर ट्रांसशिपमेंट सुविधा है, जिसे पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार के तहत शुरू किया गया था और मौजूदा कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के तहत भी जारी रखा गया. ग्रुप ने जनवरी 2026 में 16,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश के साथ विझिनजम के विकास के दूसरे चरण की शुरुआत की, जिससे इस प्रोजेक्ट में उसका कुल निवेश लगभग 30,000 करोड़ रुपए हो गया.

अडानी तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करते हैं और उन्होंने 2025 में कोच्चि के कलामासेरी में एक लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए आधारशिला रखी, जिसमें 600 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश शामिल है. सूत्रों के अनुसार, 70 एकड़ के इस प्रोजेक्ट से 1,500 से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है.

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश ग्रुप के लिए एक और बड़ा मौका है. गूगल ने विशाखापत्तनम में AI हब बनाने के लिए 2026 और 2030 के बीच लगभग 15 बिलियन डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिसमें गीगावाटस्केल डेटासेंटर क्षमता, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसी कनेक्टिविटी शामिल है. अडानीकनेक्स और एयरटेल इस प्रोजेक्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर हैं, जिसकी शुरुआत गूगल ने अप्रैल 2026 में की थी.

आंध्र प्रदेश में अडानी की मौजूदगी और भी व्यापक है, जिसमें कृष्णापटनम पोर्ट के साथसाथ रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं. यह ग्रुप रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में अलग से 20,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश कर रहा है, जिसमें दो पंपस्टोरेज प्रोजेक्ट और ट्रांसमिशन लाइनें शामिल हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अडानी द्वारा संचालित कृष्णपट्टनम पोर्ट भारत के पूर्वी तट पर स्थित सबसे बड़ा पोर्ट है.

तेलंगाना और तमिलनाडु

तेलंगाना में, कांग्रेस सरकार ने जनवरी 2024 में अडानी ग्रुप की कंपनियों के साथ कुल 12,400 करोड़ रुपए के निवेश के लिए चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इन प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स में डेटा सेंटर, एनर्जी स्टोरेज, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कारोबार शामिल हैं. तमिलनाडु, जहां पहले DMK और अब TVK की सरकार है, वहां भी अडानी ने बड़े निवेश की योजना बनाई है. ग्रुप ने 2024 में 42,700 करोड़ रुपए से ज्यादा के MoU की घोषणा की, जिसमें तीन पंपस्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए 24,500 करोड़ रुपए, एक हाइपरस्केल डेटा सेंटर के लिए 13,200 करोड़ रुपए और सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट्स के लिए 3,500 करोड़ रुपए शामिल हैं. अडानी एंटरप्राइजेज ने अलग से 2,511 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल बोली लगाकर चेन्नई आउटर रिंग रोड के ऑपरेशन, मेंटेनेंस और टोलिंग का अधिकार हासिल किया है.

हिमाचल प्रदेश, झारखंड और बिहार

सूत्रों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अडानी सेब उत्पादकों को फल की सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद कर रहा है, साथ ही ग्रुप राज्य में सीमेंट से जुड़े कारोबार भी चलाता है. झारखंड में, अडानी 1,600MW का गोड्डा अल्ट्रासुपरक्रिटिकल पावर प्लांट चलाता है, जिसे 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश से बनाया गया है. सूत्रों के अनुसार, फरवरी में गौतम अडानी ने झारखंड और बिहार में प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की, क्योंकि ग्रुप इन दोनों राज्यों में 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का आकलन कर रहा था.

बिहार में, अडानी ने मई में घोषणा की कि वह अगले तीन से चार वर्षों में बिजली, सड़कों, गैस वितरण, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में 50,00060,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बना रहा है. इन योजनाओं में भागलपुर जिले के पीरपैंती में 27,000 करोड़ रुपए का 2,400MW का अल्ट्रासुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट शामिल है.

राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम

सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में, बड़े और जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने और उन्हें पूरा करने की ग्रुप की क्षमता ने उसे राज्यों की डेवलपमेंट योजनाओं में एक अहम खिलाड़ी बना दिया है. इसमें वे राज्य भी शामिल हैं जहां प्राइवेट सेक्टर का निवेश अपेक्षाकृत कम रहा है. प्रोजेक्ट्स की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि कैसे अडानी के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े लक्ष्य भारत के राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर आगे बढ़ रहे हैं. राज्य सरकारों के लिए, यह ग्रुप इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी फंड और उन्हें पूरा करने की क्षमता उपलब्ध कराता है. वहीं, अडानी के लिए, राज्यों में बढ़ती मौजूदगी उन्हें एक ऐसा बिजनेस बेस देती है जो उनके पारंपरिक राजनीतिक संबंधों से कहीं आगे तक फैला हुआ है.