लद्दाख के संवेदनशील और अत्यंत नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में पर्यटन के नाम पर बढ़ती लापरवाही पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पैंगोंग झील के आसपास प्रतिबंधित और संरक्षित क्षेत्रों में अवैध ऑफरोडिंग के मामले में चार पर्यटकों पर कुल ₹2 लाख का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई उन घटनाओं के बाद सामने आई है, जिनमें पर्यटक वाहनों को बिना अनुमति पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाकों में चलते हुए पाया गया और वन्यजीवों के आवास क्षेत्रों में व्यवधान उत्पन्न हुआ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन पर्यटकों को पैंगोंग झील के किनारे वाहन चलाते हुए और चांगथांग तथा नुब्रा क्षेत्र के संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में प्रवेश करते हुए पकड़ा गया। यह क्षेत्र लद्दाख के उन भागों में शामिल हैं, जो अपनी अत्यंत नाजुक ठंडी मरुस्थलीय पारिस्थितिकी और दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों, जैसे तिब्बती गज़ेल, के लिए प्रसिद्ध हैं। इन गतिविधियों से न केवल प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हुआ बल्कि वन्यजीवों के आवासों में भी गंभीर व्यवधान उत्पन्न होने की आशंका जताई गई।
प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया कि यह कार्रवाई इस प्रकार की अवैध ऑफरोडिंग के खिलाफ पहली सख्त और संगठित प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक है। प्रत्येक पर्यटक पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया, जिससे कुल राशि ₹2 लाख हो गई। जांच के दौरान संबंधित वाहनों को भी जब्त कर लिया गया था, जिन्हें जुर्माने की पूरी राशि जमा करने के बाद ही छोड़ा गया।
यह घटनाएं मेरक और लुकुंग , हानले तथा नुब्रा घाटी के सुमूर क्षेत्र में दर्ज की गईं। ये सभी क्षेत्र लद्दाख के उस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, जहां मानव हस्तक्षेप सीमित रखने की आवश्यकता होती है। वन विभाग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ वाहनों द्वारा वन्यजीवों को परेशान करने और अनुचित तरीके से ड्राइविंग करने की घटनाएं दर्ज की गईं। आरोपों में यह भी शामिल है कि कुछ स्थानों पर तिब्बती गज़ेल जैसे दुर्लभ जीवों का पीछा करने की कोशिश की गई, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का स्पष्ट उल्लंघन है।
इस मामले में लद्दाख वन्यजीव विभाग द्वारा वन्यजीव अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की गई है, जिसे केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बाद आगे बढ़ाया गया। लद्दाख प्रशासन के एक प्रवक्ता ने बताया कि अवैध ऑफरोडिंग और संवेदनशील क्षेत्रों में वाहन संचालन की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की गई है और दोषी ड्राइवरों के खिलाफ अब कड़ी दंडात्मक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि 26 जून को चार वाहनों पर ₹50,000₹50,000 का जुर्माना लगाया गया था, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन में पाए गए थे। इसी क्रम में उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने पर्यटकों, एडवेंचर प्रेमियों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे लद्दाख यात्रा के दौरान जिम्मेदारी का पालन करें और संरक्षित वन्यजीव आवासों में प्रवेश करने से बचें।
प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लद्दाख के नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और पर्यटकों द्वारा की जाने वाली किसी भी प्रकार की लापरवाही को अब गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह घटना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर लद्दाख में और भी सख्त निगरानी और प्रवर्तन देखने को मिलेगा।



