वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कुल बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारत ने दुनिया के पाँचवें सबसे बड़े शेयर बाजार का स्थान दोबारा हासिल कर लिया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में आई तेज गिरावट के बीच भारत ने यह उपलब्धि हासिल की है। खास बात यह है कि इसी महीने की शुरुआत में भारत सातवें स्थान पर खिसक गया था, लेकिन कुछ ही हफ्तों में उसने जोरदार वापसी करते हुए फिर से शीर्ष पांच देशों की सूची में जगह बना ली।

वर्तमान वैश्विक रैंकिंग के अनुसार अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार बना हुआ है, जबकि चीन दूसरे, जापान तीसरे और हांगकांग चौथे स्थान पर है। भारत लगभग 5.05 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के कुल बाजार पूंजीकरण के साथ पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। इसके पीछे ताइवान लगभग 4.97 ट्रिलियन डॉलर और दक्षिण कोरिया लगभग 4.66 ट्रिलियन डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ क्रमशः छठे और सातवें स्थान पर हैं।
भारत की इस वापसी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में हाल के दिनों में प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। लंबे समय तक तेजी के बाद निवेशकों ने इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे दोनों देशों का कुल बाजार मूल्य घटकर 5 ट्रिलियन डॉलर से नीचे आ गया। दूसरी ओर, भारतीय शेयर बाजार ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया।
भारत के पक्ष में एक और बड़ा कारक कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। चूंकि भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में कमी ने महंगाई संबंधी चिंताओं को कम किया और निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर की भारतीय शेयरों में खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले हुई बाजार गिरावट के बाद निफ्टी और अन्य प्रमुख शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन पर पहुंच गए थे। इससे घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों की रुचि बढ़ी और बाजार में नई खरीदारी देखने को मिली। जून महीने के दौरान सेंसेक्स ने अमेरिकी डॉलर के आधार पर लगभग 3.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जबकि निफ्टी 50 में लगभग 2.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। व्यापक बाजार सूचकांकों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जिससे भारत का कुल बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर से ऊपर पहुंच गया।
हालांकि भारत ने वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर लिया है, लेकिन वर्ष 2026 के समग्र प्रदर्शन के लिहाज से तस्वीर कुछ अलग है। बाजार पूंजीकरण के डॉलर आधारित आंकड़ों के अनुसार भारत में इस वर्ष अब तक लगभग 4.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके मुकाबले दक्षिण कोरिया में 74 प्रतिशत, ताइवान में 52 प्रतिशत, चीन में 13.5 प्रतिशत, जापान में 11.7 प्रतिशत और अमेरिका में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका अर्थ यह है कि भारत की मौजूदा रैंकिंग केवल अपने प्रदर्शन का परिणाम नहीं है, बल्कि ताइवान और दक्षिण कोरिया के हालिया कमजोर प्रदर्शन का भी प्रभाव इसमें शामिल है।
फिर भी, भारत का 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बाजार पूंजीकरण हासिल करना वैश्विक निवेश परिदृश्य में उसकी बढ़ती आर्थिक और वित्तीय ताकत का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय कंपनियों में निवेशकों का विश्वास लगातार बना हुआ है और देश की पूंजी बाजार प्रणाली वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि शेयर बाजार का कुल मूल्य किसी देश की वास्तविक अर्थव्यवस्था या आम नागरिकों की समृद्धि का प्रत्यक्ष पैमाना नहीं होता। यह केवल सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त बाजार मूल्य को दर्शाता है। इसके बावजूद भारत का दुनिया के शीर्ष पांच शेयर बाजारों में फिर से शामिल होना वैश्विक वित्तीय मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका और प्रभाव का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।



