भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. साल 2026 में पहली बार देश में 3 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री होने की उम्मीद है. पिछले साल यानी 2025 में यह आंकड़ा 2 लाख से थोड़ा कम था, लेकिन इस साल बिक्री में काफी तेजी देखने को मिल रही है. Vahan पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक करीब 1.5 लाख इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. इससे साफ पता चलता है कि भारतीय ग्राहक अब इलेक्ट्रिक कारों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

इस बढ़ती मांग के पीछे कई बड़ी वजहें हैं. सबसे पहले, ऑटो कंपनियां लगातार लॉन्च कर रही हैं. इसके अलावा कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बेहतर ऑफर और आसान फाइनेंस स्कीम ऑफर कर रही हैं. दूसरी ओर देशभर में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, जिससे लोगों को अब चार्जिंग की चिंता पहले से कम हो रही है.

हर महीने बिक रहीं हजारों इलेक्ट्रिक कार

पिछले चार महीनों में हर महीने औसतन करीब 27,000 इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है. साल के दूसरे हिस्से में फेस्टिव का सीजन आता है और इसी दौरान कई नई इलेक्ट्रिक कारें भी लॉन्च होंगी. इसलिए उम्मीद है कि पूरे साल की बिक्री आसानी से 3 लाख यूनिट के पार पहुंच सकती है. मार्केट रिसर्च कंपनी Frost & Sullivan का भी मानना है कि अच्छे हालात रहने पर 2026 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 3 लाख यूनिट से ज्यादा हो जाएगी.

इलेक्ट्रिक कार खरीदना होगा आसान

इसके अलावा Crisil ने इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती लोकप्रियता की तीन बड़ी वजहें बताई हैं. पहली वजह यह है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में इलेक्ट्रिक कारों के मॉडल की संख्या करीब दोगुनी होकर 20 तक पहुंच गई है. अगले वित्तीय वर्ष तक यह संख्या 35 से ज्यादा होने की संभावना है. खास बात यह है कि इनमें से कई मॉडल होंगे, जिससे आम लोगों के लिए भी इलेक्ट्रिक कार खरीदना आसान हो जाएगा.

खत्म हो रही रेंज की चिंता

दूसरी वजह है बेहतर तकनीक. पहले लोग एक बार चार्ज करने पर कम दूरी मिलने की वजह से इलेक्ट्रिक कार खरीदने से बचते थे. लेकिन अब प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें एक बार चार्ज में 500 से 700 किलोमीटर तक चल सकती हैं. वहीं, मिडरेंज मॉडल भी 300 से 450 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज दे रहे हैं. तीसरी वजह है बैटरी पर लंबी वारंटी. अब कई कंपनियां बैटरी पर 8 से 10 साल की वारंटी दे रही हैं. साथ ही बैटरीएजएसर्विस जैसी सुविधाएं भी शुरू हो रही हैं, जिससे ग्राहकों को एक साथ ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ता और बैटरी की विश्वसनीयता को लेकर भी भरोसा बढ़ता है.

तेल की कीमतों ने बढ़ाई EVs की मांग

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इससे पेट्रोलडीजल वाली गाड़ियों को चलाने का खर्च बढ़ गया है. Crisil के अनुसार, मई महीने में पेट्रोलडीजल गाड़ियों का रनिंग कॉस्ट 7 से 8 प्रतिशत तक बढ़ा, जबकि इलेक्ट्रिक कारों को चलाने का खर्च अभी भी काफी कम है. Frost & Sullivan का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में उतारचढ़ाव जारी रहता है, तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और भी तेजी से बढ़ सकती है.