खराब नींद या स्लीप पैटर्न के ठीक न होने का असर सिर्फ थकान और चिड़चिड़ेपन तक सीमित नहीं रहता. इससे हमारी मांसपेशियों की अकड़न और जकड़न भी बढ़ सकती है. जिन लोगों की नींद ठीक से पूरी नहीं हो पाती है उन्हें अगले दिन गर्दन में दर्दअकड़न परेशान करती है. पर क्या आप जानते हैं ऐसा होने पर कंधों में खिंचाव या मांसपेशियों में बहुत ज्यादा दर्द भी होने लगता है. कहा जाता है कि गलत पोजिशन में सोने से ऐसा होता है, पर एक्सपर्ट कहते हैं कि इससे बचने के लिए पूरी नींद लेना भी जरूरी है.

अगर कोई रात में ठीक से सोता नहीं है तो शरीर की रिकवरी धीमी होने का कारण बन सकता है. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं इससे प्रॉब्लम से जुड़ी जरूरी बातें…
सोने से शरीर को मिलता है रिकवरी का समय
डॉ. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। साइमन थॉमस के मुताबिक नींद वह समय है जब शरीर को दिनभर के शारीरिक तनाव से उबरने और टिश्यू की मरम्मत करने का मौका मिलता है. इसी दौरान शरीर की सूजन से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने और शारीरिक रिकवरी की प्रक्रिया में मदद मिलती है. जब नींद लगातार कम होती है या बारबार टूटती है, तो शरीर की रिकवरी का ये प्रोसेस प्रभावित हो सकता है. ऐसे में कुछ लोगों को सुबह उठने पर मांसपेशियों में ज्यादा तनाव, दर्द या अकड़न महसूस हो सकती है.
बदलती लाइफस्टाइल भी बढ़ा रही समस्या
आज की मॉडर्न लाइफ इस समस्या को और आम बना रही है. देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत, लंबे समय तक काम करना, सोने का समय लगातार बदलते रहना, तनाव और सुबह जल्दी उठने की मजबूरी, ये सभी नींद की टाइमिंग और उसकी क्वालिटी को कम कर सकते हैं. जो लोग कई घंटे लगातार डेस्क पर बैठकर काम करते हैं, वे खासतौर पर इसकी चपेट में आ सकते हैं. लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि न होने से पहले ही गर्दन, कंधों, पीठ और कूल्हों में जकड़न महसूस हो सकती है.
खराब नींद और मांसपेशियों की अकड़न एक साइकिल
खराब नींद और शरीर में होने वाली तकलीफ एकदूसरे को बढ़ा सकती हैं. मांसपेशियों में दर्द या असहजता के कारण व्यक्ति को आरामदायक तरीके से सोने में परेशानी हो सकती है. वहीं, पर्याप्त नींद न मिलने पर अगले दिन शरीर दर्द और असहजता के प्रति ज्यादा संवेदनशील महसूस कर सकता है. इस तरह मांसपेशियों की तकलीफ और खराब नींद एकदूसरे को प्रभावित करते हुए एक चक्र बना सकते हैं.
मांसपेशियों की अकड़न दूर करने के लिए क्या करें?
इसके लिए जरूरी नहीं कि हमेशा जटिल उपायों की जरूरत पड़े. रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखने से मदद मिल सकती है. सोने से पहले ऐसी स्क्रीन गतिविधियों को सीमित करना भी फायदेमंद हो सकता है जो दिमाग को ज्यादा सक्रिय या उत्तेजित करती हैं.
दिन के समय शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीचबीच में चलनेफिरने या मूवमेंट ब्रेक लेना भी शरीर की रिकवरी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. सुबह उठने के बाद हल्की स्ट्रेचिंग भी थोड़े समय के लिए होने वाली मांसपेशियों की अकड़न और जकड़न को कम करने में मदद कर सकती है.



