भारतीय शेयर बाजार के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले दिग्गज शेयरों ने निवेशकों को गहरी चोट दी है. निफ्टी 50 इंडेक्स में शामिल 47 बड़ी कंपनियों का मार्केट कैप अपने ऑलटाइम हाई से करीब 48.77 लाख करोड़ रुपये कम हो गया है. ये गिरावट इतनी बड़ी है कि इसने बाजार की बुनियाद पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत इन्फोसिस जैसी चार दिग्गज कंपनियों ने ही मिलकर 20 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान कराया है. ये आंकड़ा कुल गिरावट का लगभग 41 फीसदी है. वहीं, बाजार के 10 सबसे बड़े शेयरों ने कुल मिलाकर 32.57 लाख करोड़ रुपये साफ कर दिए हैं, जो पूरी गिरावट का करीब दोतिहाई हिस्सा है.

आईटी सेक्टर में सबसे भारी तबाही

गिरावट का सबसे बड़ा तथा भयानक असर आईटी शेयरों पर पड़ा है. अकेले दिग्गज आईटी कंपनी टीसीएस का मार्केट कैप अपने रिकॉर्ड हाई 16.48 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 8.47 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसका मतलब है कि इस अकेली कंपनी ने 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेला है. ये शेयर अपने टॉप से करीब 49 फीसदी नीचे आ चुका है. इसके अलावा एचडीएफसी बैंक 29.4 फीसदी टूटकर 4.40 लाख करोड़ रुपये का नुकसान करा चुका है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 3.94 लाख करोड़ तो इन्फोसिस ने 3.66 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप गंवाया है. इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज समेत टेक महिंद्रा को मिलाकर आईटी सेक्टर की पांच कंपनियों ने 15.65 लाख करोड़ रुपये की बड़ी रकम गंवाई है.

दिग्गज शेयरों का खराब प्रदर्शन

सैमको म्यूचुअल फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर उमेश मेहता के मुताबिक, निफ्टी की सबसे बड़ी कंपनियां इस वक्त कड़े संघर्ष के दौर से गुजर रही हैं. दुनिया भर में पारंपरिक बिजनेस को अब वो तगड़ा वैल्यूएशन नहीं मिल रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से मिला करता था. बाजार का पैसा अब लार्ज कैप से निकलकर मिड कैप तथा स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ तेजी से जा रहा है. मेहता स्पष्ट रूप से बताते हैं कि विदेशी निवेशकों को भी अब ऐसा लग रहा है कि भारत के बड़े शेयरों में ग्रोथ लगभग रुक सी गई है. इसलिए अब निवेशकों को पूरे इंडेक्स को देखने के बजाय चुनचुनकर अलगअलग शेयरों पर फोकस करने की सख्त जरूरत है.

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

बाजार के जानकारों का मानना है कि किसी शेयर का अपने ऑलटाइम हाई से गिरना उसे सीधे तौर पर आकर्षक या सस्ता नहीं बनाता. मेहता कहते हैं कि जो निवेशक इन बड़े शेयरों को खरीदना चाहते थे, वो इन्हें पहले ही खरीद चुके हैं. बाजार में अब नए खरीदार बहुत कम बचे हैं, इसलिए इन शेयरों में कोई बड़ी तेजी आना फिलहाल मुश्किल लग रहा है. वहीं, कैनरा रोबेको एएमसी के सीआईओ श्रीदत्त भांडवलदार का मानना है कि लार्ज कैप शेयरों में आपका पैसा सुरक्षित जरूर रहता है, लेकिन इनमें कमाई की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है.

हेलिओस इंडिया के एमडी दिनशॉ ईरानी के अनुसार, लार्ज कैप शेयरों में निवेश करना महज इतिहास में निवेश करने जैसा है, जबकि मिड तथा स्मॉल कैप शेयर बाजार का भविष्य हैं. इसलिए 49 लाख करोड़ रुपये की इस महागिरावट को सिर्फ खरीदारी का एक सीधा मौका नहीं मानना चाहिए. जो लोग सुरक्षा चाहते हैं, वो बड़ी कंपनियों में पैसा लगा सकते हैं, लेकिन जिन्हें तेज ग्रोथ चाहिए, उन्हें मिड तथा स्मॉल कैप में बहुत ही समझदारी से दांव लगाना होगा.

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