अगस्त में सेकेंडरी मार्केट में बड़े सौदों की बाढ़ देखने को मिली और इनकी संख्या पिछले 14 महीनों में सबसे ज्यादा रही. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी के बाद ऊंचे वैल्यूएशन पर प्रमोटरों और प्राइवेट इक्विटी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेची. इस महीने कम से कम 80,000 करोड़ रुपए के ब्लॉक और बल्क ट्रेड हुए जो जून 2025 के बाद सबसे ज्यादा हैं. घरेलू म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियों, पेंशन फंड और कई विदेशी संस्थानों ने बाजार में शेयरों की बढ़ी हुई सप्लाई को खरीदा. जुलाई में, ये सौदे लगभग 48,500 करोड़ रुपए के थे. अगस्त के बड़े सौदों में, सेंटेला मॉरीशस होल्डिंग्स ने एस्टर डीएम क्वालिटी केयर में 6.67 फीसदी हिस्सेदारी 4,451 करोड़ रुपए में बेची, जबकि पेटीएम के फाउंडर और CEO विजय शेखर शर्मा के कंट्रोल वाली रेसिलिएंट एसेट मैनेजमेंट ने वन 97 कम्युनिकेशंस में 3 फीसदी हिस्सेदारी 2,949 करोड़ रुपए में बेची थी.

कैपिटल एमुनिशन
- सॉफ्टबैंक विजन फंड II लाइटबल्ब ने लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस में लगभग 2.6 फीसदी हिस्सेदारी 2,888 करोड़ रुपए में बेची.
- अमेरिकन फंड्स इंश्योरेंस सीरीज ग्लोबल ग्रोथ एंड इनकम फंड ने एवेन्यू सुपरमार्ट्स में 1.04 फीसदी हिस्सेदारी 2,537 करोड़ रुपए में बेची.
- जनरल अटलांटिक सिंगापुर RR Pte ने रुबिकॉन रिसर्च में 2,300 करोड़ रुपए के शेयर बेचे.
- रिबिट कैपिटल V और रिबिट केमैन GW होल्डिंग्स V ने बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स में कुल ₹2,217 करोड़ के शेयर बेचे.
- SAIF III मॉरीशस कंपनी, SAIF पार्टनर्स इंडिया IV और एलिवेशन कैपिटल V ने पेटीएम के 2,038 करोड़ रुपए के शेयर बेचे.
- एलिवेशन कैपिटल V और पीक XV पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट्स V ने मीशो में 1,949 करोड़ रुपए के शेयर बेचे.
- अन्य बड़े सौदों में वेल्सपन कॉर्प में ₹1,433 करोड़ और वियाश साइंटिफिक में ₹1,259 करोड़ की हिस्सेदारी की बिक्री शामिल थी.
- लाइट्सपीड अपॉर्चुनिटी फंड II ने भी फिजिक्सवाला में अपनी पूरी 1.61 फीसदी हिस्सेदारी लगभग 550 करोड़ रुपए में बेच दी.
बाद में तेजी
अगस्त के दूसरे हिस्से में इन डील्स में तेजी आई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मई और अगस्त के बीच 2.51 लाख करोड़ रुपण् की ब्लॉक और बल्क डील हुईं, जो जनवरी और अप्रैल के बीच हुई 1.25 लाख करोड़ रुपए की डील से दोगुनी से भी ज्यादा हैं. 2026 में अब तक 3.77 लाख करोड़ रुपए की 9,754 डील हुई हैं, जबकि पूरे 2025 में 5.85 लाख करोड़ रुपए की 14,926 डील हुई थीं. ब्लॉक और बल्क डील की गतिविधि आमतौर पर तब बढ़ती है जब वैल्यूएशन ज्यादा हो और लिक्विडिटी मजबूत हो, जिससे प्रमोटर, प्राइवेट इक्विटी निवेशक और दूसरे बड़े शेयरधारक स्टॉक की कीमतों में ज्यादा उतारचढ़ाव लाए बिना अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल सकें.



