Nepal Flood Live Updates: तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक आए प्रलयकारी सैलाब ने उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में भीषण तबाही मचाई है. इस भीषण प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है, जबकि 105 भारतीय नागरिकों सहित 1000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. आपदा प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना और स्थानीय प्रशासन 15 हेलिकॉप्टरों के जरिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर फंसे लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे हैं.वहीं, पड़ोसी देश में मची इस तबाही के बीच भारत ने संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए तत्काल मदद का हाथ बढ़ाया है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल द्वारा तैयार 10 टन विशेष राहत सामग्री, जीवनरक्षक दवाइयां, खाद्य पैकेट और आधुनिक बचाव उपकरण लेकर भारतीय वायुसेना का विशेष विमान गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से नेपाल के लिए रवाना हो चुका है.

इस भीषण बाढ़ ने सड़क, पुल, बिजली, बैंक और संचार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है. 11 हाइड्रोपावर प्लांट क्षतिग्रस्त हुए हैं और 431 मेगावाट बिजली उत्पादन सिस्टम से बाहर हो गया है. 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं. 25 से ज्यादा टेलीकॉम साइट प्रभावित हुई हैं, जबकि बैंक और वित्तीय संस्थानों के कई कार्यालय बह गए हैं.

अचानक बाढ़ आने की वजह?
रसुवा में पिछले 24 घंटों के दौरान महज 7 मिमी बारिश हुई है. माना जा रहा है कि इतनी कम बारिश से भोटेकोशी नदी में इतना विकराल सैलाब आना मुमकिन नहीं है, इसलिए इस तबाही की वजह भूकंप और हिमस्खलन बताई जा रही है.

ल्हेंदे नदी में हिमस्खलन : नदी में भारी मात्रा में बर्फ और मलबा गिरने से पानी का बहाव रुक गया था. बड़ा बांध बनने के बाद जब यह अवरोध अचानक टूटा, तो भारी सैलाब भोटेकोशी नदी में आ गया और भीषण बाढ़ आ गई.

तिब्बत में भूकंप के झटके: सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था. बाढ़ भी ठीक इसी समय के आसपास आई, जिससे माना जा रहा है कि भूकंप के कारण ही एवलांच या भूस्खलन हुआ होगा.

खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, आपदा के बाद से 291 विदेशी पर्यटकों और 32 सुरक्षाकर्मियों समेत कुल हजारों लोग लापता हैं. नेपाली अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जिस ग्लेशियल झील के टूटने से सैलाब आया था, वहां अब भी लगभग 7 मीटर ऊंची पानी और मलबे की प्राकृतिक दीवार बनी हुई है. इसके कभी भी ढहने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा भयानक बाढ़ आ सकती है.

लापता पर्यटकों में 142 भारतीय
नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, भीषण बाढ़ के बाद लापता करीब 500 लोगों में 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं. इनमें सर्वाधिक 142 भारतीय बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 17 मलेशियाई, 12 ब्रिटिश, 8 दक्षिण कोरियाई, 4 दक्षिण अफ्रीकी के साथसाथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड का 11 नागरिक भी लापता है, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार जुटी हुई हैं.

रसुवा और नुवाकोट जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
बाढ़ के प्रचंड बहाव से रसुवा और नुवाकोट जिलों के तटीय इलाकों में भारी बर्बादी हुई है. नुवाकोट के सहायक मुख्य जिला अधिकारी कृष्ण प्रसाद हुमागैन के अनुसार, कई बस्तियां पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई हैं, जबकि बाजार, बैंक और दर्जनों कंक्रीट के पक्के पुल पानी में बह गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इलाके के इतिहास में इतना बड़ा नुकसान पहले कभी नहीं देखा गया.

उधर, प्रोजेक्ट प्रमोटर बिजय मोहन भट्टराई ने जानकारी दी है कि 20 मेगावाट क्षमता वाली लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना से जुड़े 60 कर्मचारियों से संपर्क टूट गया है और उनके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.

टेलीकॉम नेटवर्क ध्वस्त
बाढ़ और भूस्खलन ने प्रभावित इलाकों में टेलीकॉम नेटवर्क को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है. टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नुवाकोट में नेपाल टेलीकॉम और एनसेल के टावर, ऑप्टिकल फाइबर और 25 से अधिक साइट्स क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे बड़े इलाके में मोबाइल और इंटरनेट संपर्क टूट गया है.

40 किलोमीटर लंबी सड़कें बर्बाद
आपदा के कारण बुनियादी ढांचे को भी भारी चोट पहुंची है. करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें बर्बाद हो गई हैं और रसुवा से माल्खु के बीच 20 से ज्यादा सस्पेंशन व पक्के मोटरेबल पुल तेज बहाव में बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है. आपदा के बढ़ते खतरे को देखते हुए नेपाल सरकार ने तीन प्रमुख सड़कों पर आवाजाही रोक दी है. पृथ्वी राजमार्ग, गल्छीस्याफ्रुबेसी और मुग्लिंगनारायणगढ मार्ग पूरी तरह बंद हैं. प्रशासन ने लोगों को सफर न करने की सलाह दी है.

नेपाली सेना द्वारा 88 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
आपदाग्रस्त इलाकों में नेपाली सेना ने मोर्चा संभालते हुए बाढ़ में फंसे 88 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. सेना के प्रवक्ता राजाराम बसनेत के अनुसार, बचाए गए लोगों में से गंभीर रूप से घायल 13 पीड़ितों को इलाज के लिए काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. बाकी लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया गया है, जबकि कई घायलों का प्राथमिक उपचार त्रिशूली कैंप में चल रहा है. बचाव अभियान के लिए बारह हेलिकॉप्टर तैनात किए गए थे, जिनमें से चार नेपाली सेना द्वारा संचालित थे और बाकी निजी कंपनियों द्वारा संचालित थे.

सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी भी सैलाब में गायब
नेपाल पर्यटन विभाग के अनुसार, बाढ़ के बाद से 500 से अधिक लोगों का कोई अतापता नहीं है, जिनमें 105 भारतीयों सहित 291 विदेशी पर्यटक शामिल हैं. इस आपदा की चपेट में राहतबचाव और सीमा सुरक्षा में जुटे जवान भी आ गए हैं. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि अलगअलग प्रभावित इलाकों से कुल 80 सुरक्षाकर्मी लापता हैं, जिनमें नेपाली सेना के 44 जवान भी शामिल हैं. राहत दल लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं.

इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए
बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जरूरी जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर +977 9851316807 और +977 9709107500 जारी किए हैं. संकट में फंसे लोग इन नंबरों पर सीधे संपर्क कर सकते हैं. वहीं, सैलानियों की मदद के लिए नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी टोलफ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस का संपर्क नंबर 9851289445 एक्टिव कर दिया है.

पीएम मोदी ने मदद का भरोसा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में बाढ़ से मची तबाही पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर जानमाल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की. पीएम मोदी ने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में पूरा भारत अपने नेपाली भाईबहनों के साथ खड़ा है. भारत हर जरूरी मानवीय मदद देने के लिए पूरी तरह तैयार है और राहतबचाव के लिए दोनों देशों की टीमें मिलकर काम कर रही हैं.

नेपाल की मदद के लिए भारतीय वायुसेना अलर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे के बाद भारत ने नेपाल के लिए बड़े पैमाने पर मदद की तैयारी कर ली है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना राहत और बचाव मिशन के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. राहत सामग्री, जरूरी दवाइयों और मलबे को हटाने वाले भारी उपकरणों से लैस C17 ग्लोबमास्टर और C130J सुपर हरक्यूलिस विमानों को स्टैंडबाय पर रखा गया है, ताकि निर्देश मिलते ही तत्काल रवाना किया जा सके.

गंडक में उफान की आशंका से बिहार के 6 जिलों में अलर्ट
नेपाल में मची तबाही के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है. इसे देखते हुए बिहार सरकार ने 6 जिलों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्चस्तरीय बैठक कर पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने और सभी तैयारियां पुख्ता रखने के निर्देश दिए हैं.

यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में अलर्ट
नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में भी प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अधिकारियों को पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं. गंडक और नारायणी नदी में पानी बढ़ने से महाराजगंज के सोहगीबरवा, भोतियाही और शिकारपुर जैसे संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है.

भारतनेपाल सीमा पर SSB की 11 टीमें मुस्तैद
नेपाल में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ के बाद सशस्त्र सीमा बल पूरी तरह अलर्ट हो गया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। भारतनेपाल सीमा पर संभावित आपातकालीन हालात से निपटने के लिए SSB की 11 राहत और बचाव टीमों को तैनात किया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए राहत कार्यों की तैयारियों में जुटी हैं.