त्योहारी शॉपिंग सीजन से पहले, ईकॉमर्स की बड़ी कंपनियां Amazon और Flipkart अपने प्लेटफॉर्म पर सेलर्स के लिए फीस और पेनल्टी के नियमों में बदलाव कर रही हैं. सेलर्स का कहना है कि इस कदम से छोटे और मध्यम उद्योगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जो पहले से ही कम मुनाफे पर काम कर रहे हैं. Amazon India ने अपने सेलर फोरम पर एक नोटिस जारी किया है. इसके मुताबिक, कंपनी ने 17 अगस्त, 2026 से ‘Easy Ship’ और ‘Self Ship’ सर्विस का इस्तेमाल करने वाले सेलर्स के लिए ऑर्डर कैंसिलेशन फीस की कैलकुलेशन करने का तरीका बदल दिया है.

‘Easy Ship’ में, सेलर्स अपने प्रोडक्ट खुद स्टोर करते हैं, ऑर्डर मिलने पर उन्हें पैक करते हैं और फिर ‘Easy Ship’ पिकअप एग्जीक्यूटिव को सौंप देते हैं. इसके बाद एग्जीक्यूटिव प्रोडक्ट को शिप करता है और समय पर डिलीवरी पक्का करता है. ‘Self Ship’ में, सेलर खुद ही प्रोडक्ट को पैक और डिलीवर करता है. इसके लिए वे अपनी कूरियर या डिलीवरी सर्विस का इस्तेमाल करते हैं और इसमें Amazon की लॉजिस्टिक्स सर्विस शामिल नहीं होती है. पहले यह फीस कैटेगरी के हिसाब से तय होने वाले रेफरल चार्ज पर आधारित थी, लेकिन अब इसे ऑर्डर की वैल्यू के प्रतिशत के तौर पर कैलकुलेट किया जाता है.

अमेजन के नए नियम

नए नियमों के तहत, 10,000 रुपए से कम के ऑर्डर पर ऑर्डर वैल्यू का 10 फीसदी, 10,001 रुपए से 50,000 रुपए के ऑर्डर पर 8 फीसदी, 50,001 रुपए से 1,00,000 रुपए के ऑर्डर पर 5 फीसदी और 1,00,000 रुपए से ज्यादा के ऑर्डर पर 2 फीसदी फीस ली जाती है. इसके अलावा, 18 फीसदी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स भी लगाया जाता है. यह फीस तब लागू होती है जब सेलर खरीदार के अनुरोध के अलावा किसी अन्य कारण से ऑर्डर कैंसिल करता है, या जब अनुमानित शिपिंग तारीख के 24 घंटे के अंदर सेलर शिपमेंट को शिप और कन्फर्म नहीं करता है और ऑर्डर अपनेआप कैंसिल हो जाता है.

क्लोजिंग फीस में भी इजाफा

एक और नोटिस में, Amazon ने कहा कि वह 7 सितंबर, 2026 से अपने फुलफिलमेंट सेंटर, Easy Ship और Seller Flex चैनलों पर क्लोजिंग फीस बढ़ाएगा. Amazon पर जब भी कोई प्रोडक्ट बिकता है, तो उसकी कीमत के आधार पर क्लोजिंग फीस ली जाती है. यह फीस इस बात पर निर्भर करती है कि सेलर कौन सा फुलफिलमेंट चैनल इस्तेमाल कर रहा है. 500 रुपए तक की कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए फीस 1 रुपए और 500 रुपए से ज्यादा कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए 3 रुपए बढ़ाई जाएगी. कंपनी ने इस बढ़ोतरी की वजह फ्यूल और लॉजिस्टिक्स की ज्यादा कॉस्ट को बताया है.

अमेजन ने क्यों बदले नियम

Amazon के एक प्रवक्ता ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि हमारे मार्केटप्लेस पर सेलर्स कस्टमर्स के ऑर्डर को भरोसेमंद तरीके से पूरा करेंगे. समय पर और भरोसेमंद तरीके से ऑर्डर पूरा करने को बढ़ावा देने के लिए, हमने Easy Ship और SelfShip सेलर्स के लिए कैंसिलेशन फीस में बदलाव किया है. यह फीस कुछ खास शर्तों पर लागू होती है और सिर्फ तब लगती है जब सेलर खुद ऑर्डर कैंसिल करता है. Amazon.in पर ऐसे ऑर्डर 1 फीसदी से भी कम होते हैं. हमारे पास ऐसे उपाय हैं जिनसे यह पक्का किया जा सके कि अगर सेलर के कंट्रोल से बाहर की वजहों से ऑर्डर कैंसिल होता है, तो सेलर सुरक्षित रहे.

अमेजन के नोटिस पर सेलर का जवाब

Amazon के सेलर फोरम पर नोटिस का जवाब देते हुए, कुछ सेलर्स ने कहा कि कभीकभी ऑर्डर कैंसिल होने की वजह उनके कंट्रोल से बाहर की होती है, जैसे डिलीवरी करने वाले का तय समय पर पिकअप के लिए न आना. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में सेलर पर कैंसिलेशन फीस क्यों लगनी चाहिए. एक और सेलर ने कहा कि Amazon के फुलफिलमेंट नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले सेलर्स और Easy Ship का इस्तेमाल करने वाले सेलर्स की कुल फीस में एक जैसे ऑर्डर के लिए 45 रुपए प्रति यूनिट तक का अंतर हो सकता है. सेलर का कहना है कि इससे कॉम्पिटिशन में भेदभाव वाली स्थिति बनती है.

फ्लिपकार्ट ने बढ़ाई पेनाल्टी

इस बीच, फ्लिपकार्ट ने ऑर्डर पूरा करने में होने वाली चूक के लिए तीनस्तरीय पेनल्टी सिस्टम लागू किया है, जो 23 अगस्त, 2026 से प्रभावी हो गया है. इस सिस्टम के तहत, अगर कोई शिपमेंट तय ‘डिस्पैच बाय डेट’ तक पिकअप के लिए तैयार नहीं किया जाता है, तो प्रति शिपमेंट 30 रुपए का जुर्माना लगेगा. सेलर द्वारा कैंसिल किए गए ऑर्डर या डिस्पैच की तीन डेडलाइन चूकने के बाद अपनेआप कैंसिल हुए ऑर्डर पर प्रति शिपमेंट 60 रुपए का जुर्माना लगेगा. अगर कोई ऑर्डर देर से भेजा जाता है और बाद में कैंसिल भी हो जाता है, तो पेनल्टी बढ़कर 90 रुपए प्रति शिपमेंट हो जाएगी.

पहले ये था नियम

पहले के सिस्टम में, DBD का नियम तोड़ने पर सेलर का अकाउंट कुछ समय के लिए लॉक किया जा सकता था, जिसका सेलर के बिजनेस पर ज्यादा असर पड़ता था. फ्लिपकार्ट पर नए सेलर्स, अपनी सेलिंग यात्रा शुरू करने के तीन महीने तक, इस पॉलिसी से प्रभावित नहीं होंगे. इस नए सिस्टम का मकसद सेलर्स के व्यवहार को बेहतर बनाना और उन्हें बेहतर प्लानिंग के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाया जा सके. जानकारों की मानें तो अच्छा DBD कंप्लायंस बनाए रखने वाले सेलर्स को इनाम भी दिए जाते हैं, जैसे पेमेंट का तेजी से सेटलमेंट और फ्री एडवरटाइजिंग क्रेडिट शामिल हैं.

एमएसएमई पर बढ़ेगा बोझ

‘फोरम फॉर इंटरनेट रीसेलर्स, सेलर्स एंड ट्रेडर्स’ के ट्रस्टी विनोद कुमार ने कहा कि भारतीय ऑनलाइन सेलर्स समय पर ऑर्डर पूरा करने और कस्टमर सर्विस के हाई स्टैंडर्ड्स की ज़रूरत को समझते हैं, लेकिन बड़े ईकॉमर्स मार्केटप्लेस द्वारा कैंसिलेशन, डिस्पैच और सेलर्स पर लगने वाली अन्य पेनल्टी में हालिया बढ़ोतरी खासकर त्योहारों के मौसम से पहले MSMEs के लिए चिंता का विषय है, जो पहले से ही कम मार्जिन और कॉस्ट लागत का सामना कर रहे हैं. कुमार ने कहा कि हर कैंसिलेशन या देरी सेलर की वजह से नहीं होती. इसके अन्य संभावित कारणों में लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें, प्लेटफॉर्म से जुड़ी समस्याएं, अचानक मांग बढ़ना और कस्टमर से जुड़े कारण शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि सेलर्स को ईकॉमर्स इकोसिस्टम में अचानक आने वाले वित्तीय झटकों को झेलने वाला एकमात्र जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मार्केटप्लेस को यह पक्का करना चाहिए कि जिम्मेदारी तय करने का तरीका पारदर्शी हो, जुर्माना उचित और अनुपात के हिसाब से हो, फीस में बदलाव की जानकारी पहले से दी जाए और गलत चार्ज को चुनौती देने का आसान तरीका हो. मकसद यह होना चाहिए कि ऑर्डर पूरा करने की प्रक्रिया बेहतर हो और साथ ही छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल कॉमर्स कम नहीं, बल्कि और अधिक फायदेमंद बने.