देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनी आईटीसी को दिल्ली हाईकोर्ट से फौरी राहत मिली है. कंपनी के मशहूर उत्पाद ‘आशीर्वाद शुद्ध चक्की आटा’ के पैकेट पर ‘100%’ लिखने को लेकर विवाद चल रहा है. इस मामले में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी थी. लेकिन अब अदालत ने फूड रेगुलेटर से कहा है कि वो अगली सुनवाई तक लाइसेंस कैंसल करने का कोई फैसला न ले.

कोर्ट का सख्त निर्देश

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने मंगलवार को आईटीसी की याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने साफ कहा कि 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. अदालत ने FSSAI को निर्देश दिया है कि वो फिलहाल इस मामले में कोई कार्रवाई न करे. अदालत ने फूड रेगुलेटर समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब भी मांगा है.

क्या है पूरा विवाद

FSSAI ने 28 मई को एक एडवाइजरी जारी की थी. इसमें सभी फूड कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापनों में ‘100%’ शब्द का इस्तेमाल न करें. इसी के तहत रेगुलेटर ने 10 अगस्त को आईटीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब 30 दिन में देना था. इसके ठीक तीन दिन बाद 13 अगस्त को एक ‘इंप्रूवमेंट नोटिस’ भी थमा दिया गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसमें 15 दिन के अंदर पैकेट से ‘100%’ शब्द हटाने की शर्त रखी गई थी.

आईटीसी की क्या है दलील

आईटीसी के वकील रोहित शर्मा ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा. उनका कहना है कि FSSAI की ये एडवाइजरी पूरी तरह से मनमानी है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत कंपनियों को नियमों का पालन करना होता है, लेकिन रेगुलेटर अपनी मर्जी से कानून के बाहर जाकर कोई एडवाइजरी नहीं थोप सकता. आईटीसी ने ये भी तर्क दिया कि 2020 के लेबलिंग नियमों तथा 2018 के विज्ञापन नियमों में ‘100%’ लिखने पर कोई पाबंदी नहीं है.

FSSAI ने भी दर्ज कराई अपनी आपत्ति

सुनवाई के दौरान FSSAI ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई. रेगुलेटर का कहना था कि दिल्ली हाईकोर्ट के पास इस चुनौती को सुनने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं है. इस तकनीकी पेंच को सुलझाने के लिए अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर एक संक्षिप्त नोट दाखिल करें. अब सबकी नजरें 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं.