sugar share price: शेयर बाजार में 25 अगस्त को शुगर स्टॉक्स में भारी हलचल देखने को मिली. बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्तान शुगर, श्री रेणुका शुगर्स जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की. बाजार में ट्रेडिंग के दौरान इन कंपनियों के शेयर 3.5 फीसदी तक टूट गए. शेयरों में आई इस अचानक गिरावट के पीछे सरकार का एक अहम नीतिगत फैसला है. आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने रॉ शुगर के ड्यूटीफ्री आयात से जुड़े नियमों में ढील दी है. इस फैसले ने पूरे शुगर सेक्टर के सेंटीमेंट को बदल कर रख दिया है.

निवेशकों ने शुरू की मुनाफावसूली
शेयर बाजार खुलते ही चीनी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ नजर आने लगा. दरअसल सरकार ने चीनी आयातकों को कच्ची चीनी को रिफाइन करके घरेलू बाजार में बेचने के लिए बड़ी फ्लेक्सिबिलिटी दी है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस खबर के बाहर आते ही निवेशकों ने अनुमान लगा लिया कि आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की सप्लाई तेजी से बढ़ेगी. सप्लाई बढ़ने से चीनी के दाम कंट्रोल में रहेंगे, जिसका सीधा असर चीनी मिलों के मुनाफे पर पड़ सकता है. इसी आशंका के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली करते हुए अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए.
कीमतों पर लगाम कसने की तैयारी
त्योहारी सीजन अब बेहद करीब आ रहा है. ऐसे समय में आमतौर पर मिठाइयों की मांग के कारण चीनी की खपत काफी बढ़ जाती है. पिछले कुछ समय से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा था. सरकार बिल्कुल नहीं चाहती कि त्योहारों के समय आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़े. इसके साथ ही सरकार बाजार में हो रही जमाखोरी पर भी सख्ती से रोक लगाना चाहती है. यही कारण है कि सरकार ने ड्यूटीफ्री आयात के नियमों को लचीला बनाया है ताकि बाजार में रिफाइंड चीनी की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे.
आयातकों को मिली नई सहूलियत
इससे पहले 20 अगस्त को सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था. इसके तहत टैरिफरेट कोटा के जरिए 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटीफ्री आयात की मंजूरी दी गई थी. पहले नियम ये था कि आयातकों को कच्ची चीनी रिफाइन करके 31 अक्टूबर तक ही घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा. अब विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस फिक्स डेडलाइन को हटाकर आयातकों को बड़ी राहत दी है. नए नियम के अनुसार अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से पूरे दो महीने का समय मिलेगा. इस बदलाव से आयातकों को कच्ची चीनी को प्रोसेस करने से लेकर उसे बाजार में सप्लाई करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा.
एडवांस ऑथराइजेशन पर अहम फैसला
सरकार ने आयात से जुड़े व्यापारियों को एक और राहत दी है. SION E52 के तहत जारी किए गए मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन को एक बार के लिए TRQ योजना में बदलने की परमिशन दे दी गई है. ये विशेष नियम उन मामलों में लागू होगा जहां 20 अगस्त तक कच्ची चीनी का आयात किया जा चुका है. इसमें वो रिफाइंड चीनी भी शामिल है जिसका प्रोडक्शन हो चुका है. इसके अलावा वो चीनी भी इसके दायरे में आएगी जिसे आयात किए गए कच्चे माल से आगे प्रोसेस किया जाएगा. हालांकि इस कन्वर्जन के लिए सरकार ने एक शर्त भी रखी है. आयात के समय ली गई जीएसटी छूट का भुगतान अब संबंधित कंपनियों को करना होगा, तभी उन्हें इस नई योजना का लाभ मिलेगा.



