
नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया. जिसके बाद सोशल मीडिया पर हैरान कर देने वाला वीडियो वायरल हो रहे हैं. वायरल वीडियो देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भगवान राम के रूप में दिखाए गए कटआउट के सामने आरती और पूजा करते लोग नजर आए. इस दौरान ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ किया गया और ‘जय जय मोदी, हर हर मोदी’ जैसे नारे भी लगाए गए.
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे. हालांकि, प्रेस क्लब ने तत्काल सफाई देते हुए कहा कि उसने इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया था. क्लब के मुताबिक, परिसर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए किराए पर दिया गया था, लेकिन किराए की शर्तों का उल्लंघन किए जाने के बाद क्लब प्रशासन ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रुकवा दिया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, गुरुवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के परिसर में बिहार स्टेट ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड से जुड़े सदस्यों का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. बताया गया कि परिसर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बुक किया गया था. कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटआउट के सामने धार्मिक तरीके से पूजा-अर्चना शुरू कर दी. कटआउट में प्रधानमंत्री मोदी को भगवान राम के स्वरूप में दिखाया गया था और उनके हाथ में धनुष नजर आ रहा था. वायरल वीडियो में करीब चार से पांच लोग कटआउट के सामने आरती करते दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ भी किया.
‘जय जय मोदी, हर हर मोदी’ के नारे
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे भी लगाए गए. वायरल वीडियो में लोगों को ‘जय जय मोदी, हर हर मोदी’ जैसे नारे लगाते हुए देखा गया. कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए एक बैनर पर भी ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ लिखा हुआ नजर आया. वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई.
सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद प्रेस क्लब की सफाई
वीडियो वायरल होने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से सफाई जारी की. क्लब ने स्पष्ट किया कि विवादित कार्यक्रम उसका आयोजित किया हुआ नहीं था. प्रेस क्लब के मुताबिक, परिसर को एक संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए किराए पर लिया था. लेकिन कार्यक्रम के दौरान किराये से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन किया गया. इसके बाद क्लब अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और कार्यक्रम को रोक दिया. इस सफाई के जरिए प्रेस क्लब ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री के कटआउट की पूजा और ‘मोदी चालीसा’ वाला कार्यक्रम क्लब की ओर से आयोजित नहीं किया गया था.
कार्यक्रम किसने आयोजित किया था?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह कार्यक्रम बिहार स्टेट ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड से जुड़े सदस्यों ने आयोजित किया था. बोर्ड के उपाध्यक्ष राजन सिंह ने समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में इस आयोजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपनी योजनाओं के बारे में बात की. सिंह ने दावा किया कि उनका समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित एक मंदिर बनाने की योजना बना रहा है. उनके मुताबिक, इस मंदिर का नाम भगवान श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम पर रखने की योजना है.
112 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर बनाने का दावा
राजन सिंह ने दावा किया कि प्रस्तावित मंदिर करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा और इसके लिए पांच एकड़ जमीन की जरूरत होगी. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या आधिकारिक स्वीकृति सामने नहीं आई है. इसलिए जमीन, सरकारी फंड और मंदिर निर्माण को लेकर किए गए इन दावों को फिलहाल संबंधित पक्ष के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. सिंह का कहना था कि यह मंदिर ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए मोदी सरकार की ओर से किए गए कथित कामों और अधिकारों को मान्यता देने के उद्देश्य से बनाया जाएगा.
राजन सिंह ने मंदिर बनाने का बचाव क्यों किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान के रूप में प्रस्तुत किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राजन सिंह ने अपने प्रस्ताव का बचाव किया. उन्होंने कहा कि उनके अनुसार केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय को अधिकार और रोजगार के अवसर दिलाने के लिए काम किया है. इसी आधार पर वह प्रधानमंत्री के सम्मान में मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं. सिंह ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में मंदिर बनाना चाहता है तो इसमें गलत क्या है.
मंदिर में PM मोदी की सोने की मूर्ति लगाने का दावा
राजन सिंह ने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोने की प्रतिमा लगाई जाएगी. उनके मुताबिक, प्रतिमा की ऊंचाई प्रधानमंत्री की वास्तविक लंबाई के बराबर रखी जाएगी. हालांकि, इस दावे को लेकर भी उपलब्ध जानकारी में कोई आधिकारिक दस्तावेज या सरकारी घोषणा सामने नहीं आई है. इसलिए इसे फिलहाल आयोजकों द्वारा बताई गई योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
क्या बिहार सरकार देगी जमीन और पैसा?
राजन सिंह ने यह भी दावा किया कि बिहार सरकार मंदिर निर्माण के लिए जमीन और धन उपलब्ध कराएगी. लेकिन इस संबंध में भी उपलब्ध जानकारी में बिहार सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या स्वीकृति का उल्लेख नहीं है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित मंदिर के लिए जमीन कहां मिलेगी, धन की व्यवस्था कैसे होगी और क्या सरकार ने वास्तव में इस परियोजना को लेकर कोई निर्णय लिया है.
प्रेस क्लब ने कार्यक्रम क्यों रुकवाया?
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के मुताबिक, कार्यक्रम के लिए परिसर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के उद्देश्य से किराए पर दिया गया था. क्लब के नियमों और किराये की शर्तों के मुताबिक परिसर का इस्तेमाल तय उद्देश्य के लिए किया जाना था. जब वहां अलग तरह की गतिविधि शुरू हुई और किराये की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो क्लब प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और कार्यक्रम को रोक दिया. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को प्रेस क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम बताना सही नहीं होगा.
वायरल वीडियो ने क्यों खड़ा किया विवाद?
विवाद की सबसे बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटआउट को भगवान राम के स्वरूप में दिखाना और उसके सामने पूजा-अर्चना करना है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा ‘मोदी चालीसा’ और धार्मिक नारे लगाए जाने के दृश्य सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. एक तरफ आयोजकों से जुड़े लोगों ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए किए गए कामों के प्रति आभार से जोड़ा है. वहीं, दूसरी ओर आलोचकों ने एक मौजूदा प्रधानमंत्री को धार्मिक स्वरूप में प्रस्तुत करने पर सवाल उठाए हैं.
राजन सिंह कौन हैं?
डॉ. राजन सिंह बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष और नेशनल ट्रांसजेंडर वेलफेयर काउंसिल के अध्यक्ष बताए जाते हैं. वह ट्रांसजेंडर और LGBTQIA+ समुदाय के अधिकारों के लिए काम करते हैं. उनका फोकस समुदाय के सामाजिक उत्थान, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपने बयानों और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े रुख के कारण भी वह चर्चा में रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर धार्मिक आयोजन से जुड़े उनके बयान और योजनाएं सुर्खियों में आई हैं.



