Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक और नया मोड़ आ गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की बताई जा रही एक गोपनीय डायरी में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका और उनके बयानों को लेकर कई सवाल दर्ज किए गए हैं। डायरी में 18 जून से शुरू हुए टीवी इंटरव्यू, बयानों में बदलाव, संतों की प्रतिक्रियाओं और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े घटनाक्रम का सिलसिलेवार उल्लेख बताया गया है।

संतों ने पूछा क्या नृपेंद्र मिश्र ‘खलनायक’ की भूमिका में हैं?
डायरी में लिखा है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के कुछ दिन बाद कुछ संतों ने चंपत राय से सवाल किया था कि क्या नृपेंद्र मिश्र इस पूरे मामले में ‘खलनायक’ की भूमिका निभा रहे हैं? चंपत राय के कथित डायरी नोट के मुताबिक, उस समय उनके पास इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं था।
डायरी के अनुसार, 18 जून से नृपेंद्र मिश्र ने दिल्ली में टीवी चैनलों को इंटरव्यू देना शुरू किया। चार दिनों के दौरान उन्होंने करीब 14 चैनलों से बातचीत की। शुरुआत में उनका कहना था कि उनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से मंदिर के निर्माण कार्य तक सीमित है, लेकिन बाद के बयानों में व्यवस्थाओं को लेकर भी उनका रुख सामने आया।
‘चोरी’ की जगह ‘डकैती’ शब्द पर भी सवाल
डायरी में नृपेंद्र मिश्र के उस बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने चढ़ावा चोरी की घटना के लिए ‘डकैती’ शब्द का इस्तेमाल किया था। चंपत राय ने कथित तौर पर लिखा कि इस तरह के बयान से समाज में गलत संदेश गया। डायरी में यह भी दर्ज है कि 23 जून के बाद नृपेंद्र मिश्र के सार्वजनिक बयान अचानक बंद हो गए। इस पर सवाल उठाते हुए लिखा गया कि इसके पीछे का कारण जानना जरूरी होगा।
पहले बैठकर तय होते थे फैसले, फिर बढ़ी दूरी
डायरी में दावा किया गया है कि करीब छह महीने पहले से नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं से खुद को धीरेधीरे अलग करना शुरू कर दिया था। उनका ध्यान मुख्य रूप से निर्माण कार्यों तक सीमित होता गया। पहले मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर चंपत राय और नृपेंद्र मिश्र के बीच बैठकर चर्चा होती थी। किसी मामले में मतभेद होने पर भी बातचीत के कई दौर के बाद सहमति बनाने की कोशिश की जाती थी। बाद में व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों को ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय बताते हुए नृपेंद्र मिश्र ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी। डायरी में इसे अब ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच बढ़ते संस्थागत तनाव से जोड़कर देखा गया है।
भुगतान में देरी से निर्माण कार्य प्रभावित होने का दावा
डायरी में राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की रफ्तार को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि निर्माण एजेंसियों का भुगतान लंबित होने से कई काम धीमे हुए हैं। बाउंड्रीवॉल का निर्माण करीब दो महीने में 10 फीसदी की प्रगति भी नहीं कर सका। ऑडिटोरियम समेत दूसरी परियोजनाओं पर भी इसका असर पड़ने का दावा किया गया है।
मंदिर परिसर और उससे जुड़े निर्माण कार्यों में कई छोटीबड़ी एजेंसियां काम कर रही हैं। भुगतान में देरी के कारण कुछ एजेंसियों को अपनी कार्यशील पूंजी से कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च चलाने पड़ रहे हैं। इससे निर्माण सामग्री की खरीद और आपूर्ति भी प्रभावित होने की बात कही गई है। पुराने ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं के काम, अनुबंध और दावों की नए सिरे से जांच को भी भुगतान प्रक्रिया में देरी की एक वजह बताया गया है। नई व्यवस्था में भुगतान से पहले पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा होने से प्रक्रिया लंबी होने का दावा किया गया है।
कई एजेंसियों के कर्मचारियों का वेतन लंबित
डायरी में सफाई, सीवरेजड्रेनेज और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी करीब एक दर्जन एजेंसियों का भी जिक्र है। इसमें दावा किया गया है कि बीवीजी के कर्मचारियों का अप्रैल से जुलाई तक का वेतन बकाया है, जबकि यूनी पॉइंट और जिलाजीत एजेंसियों के कर्मचारियों का मई से जुलाई तक का वेतन लंबित बताया गया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। भुगतान में देरी से इन एजेंसियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की बात कही गई है। यह पूरा घटनाक्रम चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद लागू हुई नई व्यवस्था के संदर्भ में दर्ज किया गया है।
आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा 5 सितंबर तक बढ़ी
राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी मामले में जेल में बंद सभी आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा पांच सितंबर तक बढ़ा दी गई है। शनिवार को आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की मांग पर विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने न्यायिक अभिरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया।
पेंशन खाते से जुड़े दस्तावेज अदालत में दाखिल
आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन बैंक खाते से जुड़े मामले में शनिवार को उनकी ओर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में दाखिल किए गए। लीगल एड डिफेंस कौंसिल के डिप्टी चीफ कुलशेखर सिंह ने बैंक की सत्यापन रिपोर्ट समेत अन्य कागजात अदालत के सामने रखे। अदालत ने अभियोजन पक्ष को 25 अगस्त से पहले इन दस्तावेजों पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले में आदेश 25 अगस्त को आने की संभावना है।
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अधिवक्ता संघ की याचिका पर अब 29 अगस्त को सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग को लेकर अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल मॉनिटरिंग प्रार्थना पत्र पर शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अभियोजन पक्ष ने आपत्ति दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने अभियोजन पक्ष को आपत्ति दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त की तारीख तय की है। अधिवक्ता संघ के महामंत्री शैलेंद्र जायसवाल की ओर से दाखिल याचिका में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
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