वर्ल्ड सीनियर सिटीजन डे की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति रहे रोनाल्ड रीगन ने साल 1988 में की थी. उन्होंने 19 अगस्त को इस निमित्त बने घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किया और 21 अगस्त को यह खास दिन मनाने के लिए तय किया गया. दो साल बाद साल 14 दिसंबर 1990 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक प्रस्ताव पास किया. तब से यह पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा. तभी से यह खास दिन 60 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को सम्मान देने, उनके जीवन को बेहतर बनाने वाली योजनाओं आदि के लिए जाना जा रहा है. आइए, वर्ल्ड सीनियर सिटीजन डे के बहाने जानते हैं कि भारत में बुजुर्गों के लिए कितनी सरकारी योजनाएं हैं? इन योजनाओं का लाभ उन्हें कैसे मिल रहा है?

भारत में बुजुर्ग समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. उनके सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों ने कई योजनाएं और कल्याणकारी कदम उठाए हैं. ये योजनाएं वित्तीय सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, दैनिक जीवन की सुगमता और कानूनी संरक्षण से जुड़ी हैं.
आर्थिक मदद और पेंशन योजनाएं
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना: यह योजना राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का हिस्सा है. इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को मासिक पेंशन दी जाती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 60 से 79 वर्ष के बुजुर्गों को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मासिक राशि प्रदान करती हैं, जबकि 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को अतिरिक्त राशि दी जाती है.
- अटल पेंशन योजना: यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए तैयार की गई है. इसमें 18 से 40 वर्ष की आयु में निवेश शुरू किया जा सकता है, जिसके बाद 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है.
पेंशन योजना. फोटो: Pexels
- प्रधानमंत्री वय वंदना योजना: भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से संचालित यह योजना वरिष्ठ नागरिकों सुनिश्चित ब्याज दर के साथ नियमित पेंशन का विकल्प देती है. इसमें 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक एकमुश्त राशि जमा करके मासिक, त्रैमासिक, छमाही या वार्षिक आधार पर पेंशन प्राप्त कर सकते हैं.
- वरिष्ठ नागरिक बचत योजना: यह डाकघर और प्रमुख बैंकों में उपलब्ध एक सुरक्षित निवेश विकल्प है. इसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग खाता खोल सकते हैं. इस योजना में सामान्य बचत योजनाओं की तुलना में अधिक ब्याज दर मिलती है और त्रैमासिक आधार पर ब्याज का भुगतान किया जाता है.
स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएं
- आयुष्मान भारतप्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना: सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान किया है, चाहे उनकी आय का स्तर कुछ भी हो. इसके तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष पाँच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाता है.
स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाएं हैं. फोटो: Pexels
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना: यह योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले या कम आय वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों के लिए है जो उम्र संबंधी दिव्यांगताओं से पीड़ित हैं. इसके अंतर्गत बुजुर्गों को चलने की छड़ी, व्हीलचेयर, सुनने की मशीन, कृत्रिम दांत, चश्मे और अन्य सहायक उपकरण पूरी तरह मुफ्त दिए जाते हैं.
- वृद्धजनों के स्वास्थ्य देखभाल का राष्ट्रीय कार्यक्रम: इस कार्यक्रम के तहत देश भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में बुजुर्गों के लिए विशेष वार्ड, अलग ओपीडी कतार और वृद्धावस्था विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
आयकर में विशेष राहत और छूट
वरिष्ठ नागरिकों की वित्तीय बचत को बढ़ावा देने के लिए आयकर नियमों में कई विशेष छूट दी गई हैं.
- अधिक बेसिक छूट सीमा: 60 से 79 वर्ष के वरिष्ठ नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक के अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर स्लैब में सामान्य करदाताओं की तुलना में अधिक छूट सीमा निर्धारित है.
- ब्याज आय पर छूट: बैंक और डाकघर में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज पर वरिष्ठ नागरिक आयकर अधिनियम की धारा 80TTB के तहत 50 हजार रुपये तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं.
टैक्स में राहत. फोटो: Pexels
- स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा व्यय: वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम या चिकित्सा खर्च पर धारा 80D के तहत 50 हजार रुपये तक की कटौती का लाभ मिलता है.
- गंभीर बीमारियों के इलाज पर छूट: निर्दिष्ट गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए खर्च की गई राशि पर वरिष्ठ नागरिकों को एक लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्रदान की जाती है.
यात्रा और परिवहन सुविधाएं
बुजुर्गों की यात्रा को सुगम और आरामदायक बनाने के लिए परिवहन सेवाओं में कई सुविधाएं दी गई हैं.
- भारतीय रेलवे की सुविधाएं: वरिष्ठ नागरिकों के लिए ट्रेनों में निचले बर्थ का विशेष कोटा निर्धारित रहता है. इसके साथ ही बड़े स्टेशनों पर व्हीलचेयर, बैटरी चालित गाड़ियां और अलग टिकट काउंटर की सुविधा मिलती है.
रेल यात्रा में भी राहत.
- हवाई यात्रा छूट: प्रमुख घरेलू एयरलाइंस वरिष्ठ नागरिकों को बेस फेयर पर विशेष प्रतिशत की छूट प्रदान करती हैं. इसके अलावा हवाई अड्डों पर प्राथमिक बोर्डिंग और व्हीलचेयर सहायता भी दी जाती है.
- राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें: अधिकांश राज्यों की सरकारी बसों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं. कई राज्यों में उनके लिए रियायती या मुफ्त यात्रा पास की व्यवस्था भी की गई है.
कानूनी संरक्षण और भरणपोषण अधिकार
बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं.
- मातापिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007: यह कानून सुनिश्चित करता है कि बच्चे या कानूनी उत्तराधिकारी अपने बुजुर्ग मातापिता की देखभाल और भरणपोषण करें. यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो वरिष्ठ नागरिक विशेष ट्रिब्यूनल में आवेदन कर सकते हैं.
कानूनी मदद भी दी जाती है. फोटो: Pexels
- त्वरित न्याय व्यवस्था: इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुभाग में ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जहां बिना वकील के भी कम समय में भरणपोषण से जुड़े मामलों का निपटारा किया जाता है. ट्रिब्यूनल बच्चों को मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी कर सकता है.
देखभाल और डिजिटल सहायता
बुजुर्गों की सामाजिक और मानसिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार अन्य कल्याणकारी कदम भी उठा रही है.
- राष्ट्रीय वृद्धजन कार्य योजना: इस योजना के तहत गैरसरकारी संगठनों की मदद से वृद्धाश्रम, डेकेयर सेंटर और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स संचालित की जाती हैं, जहां बेसहारा बुजुर्गों को भोजन, आश्रय और दवाइयां मिलती हैं.
- एल्डरलाइन : यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक राष्ट्रीय टोलफ्री हेल्पलाइन नंबर है. इसके माध्यम से बुजुर्गों को कानूनी सलाह, स्वास्थ्य जानकारी, भावनात्मक सहायता और बेसहारा स्थिति में रेस्क्यू सुविधा दी जाती है.
- डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र: पेंशनभोगियों को अब जीवित रहने का प्रमाण देने के लिए बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. वे बायोमेट्रिक या चेहरे की पहचान तकनीक से घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं.
इस तरह हम पाते हैं कि भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देना और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है. अधिकारियोंकर्मचारियों की लापरवाही से कई जगह बुजुर्गों को सेवा का सटीक लाभ नहीं मिल पाता.



