भारत सरकार के 80 लाख करोड़ रुपए के ‘अमृत काल’ इंफ्रास्ट्रक्चर विजन के तहत देश के समुद्री तटों, पोर्ट्स और मैरीटाइम इंफ्रा को पूरी तरह बदलने की तैयारी चल रही है. इस विशाल समुद्री क्रांति के बीच दलाल स्ट्रीट पर एक शांत स्मॉलकैप कंपनी—नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स —चुपचाप भारत के अगले इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की मजबूत रीढ़ बनकर उभर रही है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह कंपनी सिर्फ ठेकेदारी या सर्विस प्रोवाइडर रहने के बजाय समुद्री जहाजों के निर्माण से लेकर उनके संचालन और रखरखाव का पूरा ईकोसिस्टम तैयार कर रही है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कंपनी के शेयरों में तेजी के क्या कारण हैं और मौजूदा समय में कंपनी के शेयरों में किस तरह की तेजी देखने को मिली है.

कंपनी की तेजी के 4 मुख्य कारण
- खुद का शिपयार्ड और इनहाउस ईकोसिस्टम: ज्यादातर मरीन इंजीनियरिंग कंपनियां सिर्फ कांट्रैक्ट पर काम करती हैं. नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स ने महाराष्ट्र के आगामी वधावन पोर्ट के पास सफाले में अपना शिपयार्ड विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहित की है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब कंपनी खुद वेसल्स बनाकर उनका स्वामित्व भी रखेगी और ऑपरेशन्स से भी कमाई करेगी.
- 1,400 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक: कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 1,075 करोड़ रुपए के नए ऑर्डर हासिल किए, जिससे इसका अनएग्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक करीब 1,400 करोड़ रुपए पहुंच गया है. इसमें ‘ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम’ के तहत मिले 650 करोड़ रुपए के दो बड़े कांट्रैक्ट शामिल हैं, जो अगले 15 सालों के लिए तय और फिक्स्ड रेवेन्यू सुनिश्चित करते हैं.
- ‘रिवर पर्ल 47′ भारत का सबसे शक्तिशाली ड्रेजर: कंपनी के पास ‘River Pearl 47’ नाम का एक विशेष बैकहो ड्रेजर है, जो 30 मीटर की गहराई तक पानी के नीचे चट्टानों को ड्रिल और ब्लास्ट कर सकता है. जेएनपीए पोर्ट पर इस क्षमता को साबित करने के बाद अब न्यू मंगलोर, विशाखापट्टनम, मुंबई और तुतिकोरिन जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर कंपनी के लिए बड़े अवसर खुल रहे हैं.
- निजी बेड़े और सरकारी प्रोजेक्ट्स का तालमेल: ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी सरकारी कंपनियों के पास विशाल बेड़ा है, लेकिन नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स कठिन और तकनीकी रूप से जटिल समुद्री कामों में बड़ी कंपनियों से आगे निकल रही है.
एक साल में 200 फीसदी का रिटर्न
भले ही गुरुवार को कंपनी के शेयरों मेंं डेढ़ फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही हो, लेकिन मौजूदा साल में अब तक 40 फीसदी की तेजी देखने को मिल चुकी है. खास बात तो ये है कि कंपनी का शेयर एक साल में निवेशकों को 191 फीसदी का रिटर्न दे चुका है. मौजूदा समय में कंपनी का शेयर 1.63 फीसदी की गिरावट के साथ 2702.20 रुपए पर ट्रेड कर रहा है. जबकि कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी का शेयर 2,696.45 रुपए के साथ दिन के लोअर लेवल पर भी चला गया था.
वैसे सुबह कंपनी का शेयर मामूली तेजी के साथ 2,778.05 रुपए पर ओपन हुआ था. खास बात ताके ये है कि सोमवार को कंपनी का शेयर 2,998 रुपए के साथ 52 हफ्तों के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था. जबकि 8 सितंबर 2025 को कंपनी का शेयर 860.03 रुपए के 52 हफ्तों के लोअर लेवल पर था. तब से अब तक कंपनी के शेयर में करीब 250 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है.
भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, तटीय विकास और शिपिंग ऑपरेशन्स में आने वाले दशकों में अभूतपूर्व निवेश होना है. जहाजों के निर्माण से लेकर 15 साल लंबे ऑपरेशन्स कांट्रैक्ट्स तक अपनी पकड़ मजबूत कर रही यह कंपनी मैरीटाइम इंफ्रा बूम का एक प्रमुख ‘हिडन जेम’ साबित हो सकती है.



