Varanasi News: पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे भारी बारिश और सहायक नदियों में बढ़ते जलस्तर का सीधा असर अब गंगा नदी में भी दिखने लगा है. वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. आज यानी बुधवार को दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 67.4 मीटर रहा, इसका मतलब है कि वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पास तेजी से पहुंच रहा है.

बढ़ते जलस्तर की वजह से गंगा के सभी घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है. मणिकर्णिका और हरिश्चन्द्र घाट पर शवदाह करने में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शवदाह कराने में भारी दिक्कत हो रही है. निचले प्लेटफार्म पानी में डूब चुके हैं इसलिए छतों पर शवदाह हो रहा है. मणिकर्णिका से दूसरे घाटों का रास्ता भी बंद हो चुका है. बाबा मसाननाथ का आधा मंदिर जलमग्न हो गया है. गंगा का पानी ऊपर चढ़ने से लकड़ियां गीली हो गईं हैं, जिससे शवों के जलने में लगने वाला समय भी बढ़ चुका है.
चार घंटे तक किया शवदाह का इंतजार
गाजीपुर से शवदाह करने आए विजय उपाध्याय ने बताया कि पिछले चार घंटे से वो इंतजार कर रहे हैं. छतों पर सीमित जगह है इसलिए शवों की कतार लगी हुई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं लकड़ी व्यवसायी अजय भारती ने बताया कि छत पर शव यात्रियों के साथ ही कई देखनेघूमने और फोटो खींचने वाले भी पहुंच जाते हैं, जिससे छत पर जगह कम पड़ जा रही है. सिंधिया घाट पर रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दत्रात्रेय चरण पादुका मंदिर अखाड़ा गंगा में समा चुका है.
गंगा का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी मुश्किलें
तीर्थ पुरोहित निर्मेश द्विवेदी ने बताया कि रोजाना डेढ़ सौ से दो सौ शवदाह मणिकर्णिका घाट पर होते हैं. लेकिन गंगा जी का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है और शवदाह में मुश्किलें आ रही हैं. गंगा के जलस्तर में वृद्धि से स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में चिंता का माहौल है. गंगा में नावों का संचालन रोक दिया गया है.
प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. जल पुलिस और NDRF की टीमों को घाटों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे गंगा के किनारे न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें.



