नई दिल्ली कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कांग्रेस से जुड़े होने और दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। नागेंद्र ने सवाल उठाया कि जब कई नेताओं पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो केवल उनके इस्तीफे की मांग क्यों की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

नागेंद्र का नाम कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में सामने आया था। आरोपों के बाद उन्होंने 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। बाद में जांच आगे बढ़ी और प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत मिल गई।

करीब दो साल बाद 3 अगस्त 2026 को नागेंद्र को फिर कर्नाटक मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। फिलहाल वह योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं। उनके दोबारा मंत्री बनने के बाद भाजपा और जेडीएस ने विरोध तेज करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।

नागेंद्र ने क्या कहा?

नागेंद्र ने कहा कि अगर अदालत उन्हें दोषी ठहराती है और सजा देती है, तो वह न्यायपालिका के फैसले को स्वीकार करेंगे। उनका तर्क है कि केवल आरोप लगने के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक और जातिगत पूर्वाग्रह से प्रेरित है।

कांग्रेस का क्या कहना है?

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस नेतृत्व ने नागेंद्र का बचाव किया है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि कथित घोटाले की बड़ी रकम बरामद की जा चुकी है और नागेंद्र की भूमिका साबित नहीं हुई है। कांग्रेस ने भाजपा से विधानसभा में आरोपों के समर्थन में सबूत रखने की चुनौती भी दी है।

अब विवाद क्यों बढ़ा?

नागेंद्र की दोबारा मंत्रिमंडल में वापसी ने वाल्मीकि निगम मामले को फिर राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक विरोध बता रही है। ऐसे में मामला अब सिर्फ कथित घोटाले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जाति, राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी बहस का मुद्दा बन गया है।

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