बैड कोलेस्ट्रॉल के इलाज के लिए VERVE102 जीन थैरेपी को लेकर चर्चा हो रही है. VERVE102 को नाम की अमेरिकी बायोटेक कंपनी तैयार कर रही है. यह कंपनी दिल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियों के लिए ऐसी जीन थैरेपी बनाने पर काम कर रही है, जिसका असर लंबे समय तक रह सके. VERVE102 अभी जांच और क्लिनिकल ट्रायल के दौर में है. इसका मकसद एक डोज के जरिए LDL को कम करना है.

आइए डिटेल में जानते हैं VERVE102 क्या है, यह कैसे काम करती है, ट्रायल में अब तक क्या नतीजे मिले हैं और क्या इससे कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की जरूरत कम हो सकती है.

बैड कोलेस्ट्रॉल क्यों बन रहा मुसीबत

बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL बढ़ना आज के समय में कई लोगों के लिए चिंता का कारण है. शरीर में LDL की मात्रा ज्यादा होने पर यह ब्लड वेसल्स में जमा हो सकता है और समय के साथ हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है. इसे कंट्रोल रखने के लिए लोग डाइट, फिजिकल एक्टिविटी और डॉक्टर की सलाह से दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को लंबे समय तक कंट्रोल में रखना कई लोगों के लिए चुनौती हो सकता है.

क्या है VERVE102 जीन थैरेपी और कैसे करती है काम?

नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के सीईओ ओपी यादव बताते हैं कि VERVE102 एक नई जीनएडिटिंग थैरेपी है, जिसका अभी क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है. इसे LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए बनाया जा रहा है. इसे कुछ घंटों में नस के जरिए दिया जाता है. इसके बाद यह खून के रास्ते लिवर के सेल्स तक पहुंचती है.

इसमें खास तरह का एमआरएनए और गाइड आरएनए होता है, जो लिवर में मौजूद PCSK9 जीन को पहचानने में मदद करता है. लिवर के सेल के अंदर एमआरएनए एक बेस एडिटर प्रोटीन बनाने की जानकारी देता है.

यह प्रोटीन गाइड आरएनए की मदद से PCSK9 जीन तक पहुंचता है और उसके डीएनए में एक खास बदलाव करता है. इसका मकसद लिवर में मौजूद PCSK9 जीन को बंद करना है. PCSK9 की एक्टिविटी कम होने से लिवर खून से ज्यादा LDL हटाने में मदद कर सकता है. इस तरह एक डोज के बाद लंबे समय तक LDL कम रहने की उम्मीद है.

VERVE102 के ट्रायल में अब तक क्या नतीजे मिले हैं?

VERVE102 का Heart2 Phase 1b ट्रायल ऐसे लोगों पर किया जा रहा है, जिनके परिवार में बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही है या कम उम्र में हार्ट डिजीज का खतरा है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। शुरुआती 14 लोगों के डेटा में अलगअलग डोज के बाद LDL में कमी देखी गई. कम डोज लेने वाले लोगों में LDL करीब 21% कम हुआ, जबकि दूसरे डोज में करीब 41% की कमी देखी गई. सबसे ज्यादा डोज लेने वाले लोगों में LDL करीब 59% कम हुआ. एक व्यक्ति में LDL की सबसे ज्यादा कमी 69% तक देखी गई.

कंपनी के मुताबिक, VERVE102 लेने के बाद PCSK9 के लेवल में भी कमी देखी गई. हालांकि, ये अभी शुरुआती नतीजे हैं. थैरेपी कितनी सुरक्षित है और इसका असर कितने लंबे समय तक रहता है, यह जानने के लिए आगे और क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है.

क्या VERVE102 से कोलेस्ट्रॉल की दवाइयों की जरूरत कम होगी?

एक्सपर्ट ओपी यादव बताते हैं कि VERVE102 का मकसद ऐसा इलाज तैयार करना है, जिसे बारबार लेने की जरूरत न पड़े. अगर आगे के ट्रायल में यह थैरेपी सेफ और असरदार साबित होती है, तो कुछ मरीजों में रोज या बारबार लेने वाली कोलेस्ट्रॉल की दवाइयों की जरूरत कम हो सकती है. हांलाकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि VERVE102 मौजूदा कोलेस्ट्रॉल दवाइयों की जगह ले सकती है.

फिलहाल VERVE102 जांच के दौर में है और इसके लंबे समय तक असर और सुरक्षा को समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है. अभी यह आम मरीजों के लिए उपलब्ध इलाज नहीं है.

आगे होने वाले क्लिनिकल ट्रायल और जरूरी मंजूरी के बाद ही पता चलेगा कि यह थैरेपी किन मरीजों के लिए कितनी उपयोगी हो सकती है और क्या इससे मौजूदा दवाइयों की जरूरत कम हो पाएगी.