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उत्तर प्रदेश एसटीएफ को बड़ी सफलता हाथ लगी है. कुख्यात अपराधी भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया. लंबे समय से फरार चल रहे इस अपराधी पर हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग समेत कई गंभीर मामले दर्ज थे. पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम प्रदेश के हार्डकोर अपराधियों में शामिल था.

रविवार देर रात अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई. यूपी के ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने खुद इस एनकाउंटर की पुष्टि की. आइए जानते हैं भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू और इस पूरे एनकाउंटर से जुड़ी 10 बड़ी बातें.

1. भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू गोरखपुर जिले के बेलघाट थाना क्षेत्र स्थित विखानपुर गांव का निवासी था. पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से संगठित अपराध से जुड़ा हुआ था और कई जिलों में उसकी आपराधिक गतिविधियां फैली हुई थीं.

2. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भानु प्रताप सिंह पर हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े करीब 40 मुकदमे दर्ज थे. यही वजह थी कि वह कानून-व्यवस्था एजेंसियों की प्राथमिक सूची में शामिल था.

3. भानु प्रताप सिंह की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग पुलिस अधिकारियों की ओर से कुल 1.65 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था.

4. यह मुठभेड़ अयोध्या जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र स्थित एमी घाट के पास रविवार देर रात हुई. घटना रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है.

5. जानकारी के अनुसार एसटीएफ की टीम क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की तलाश में थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध बदमाशों से टीम का सामना हुआ. रोकने की कोशिश पर दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई और मुठभेड़ छिड़ गई.

6. मुठभेड़ के दौरान भानु प्रताप सिंह को गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. हालांकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में सफल रहा.

7. मुठभेड़ के बाद घायल भानु प्रताप सिंह को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस बुलवाई गई, लेकिन तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी. इसके बाद एसटीएफ के जवान खुद उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज दर्शननगर रेफर किया गया.

8. मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान भानु प्रताप सिंह की हालत लगातार गंभीर बनी रही. डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और ईलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

9. भानु प्रताप सिंह कई वर्षों से फरार चल रहा था और लगातार अपना ठिकाना बदलता रहता था. पुलिस के अनुसार वह संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और कई मामलों में वांछित था. उसकी गिरफ्तारी के लिए कई जिलों की पुलिस और एसटीएफ लगातार अभियान चला रही थी.

10. एनकाउंटर के बाद पुलिस की अगली प्राथमिकता भानु प्रताप सिंह के साथ मौजूद उसके फरार साथी को गिरफ्तार करना है. अधिकारियों का कहना है कि उसकी पहचान कर ली गई है और जल्द ही उसे पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.