Himachal Se: यूपी के गाजीपुर जिले में होटल कारोबारी के बेटे विनीत राय हत्याकांड में नामजद आरोपी कमलेश चौधरी का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया. अब उसकी मौत पर जिले में बवाल मचा है और तनाव का माहौल है. पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 3 जून को उसका एनकाउंटर किया गया. उसके अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. घटना के बाद पुलिस ने 60 से 70 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.

होटल कारोबारी विनीत राय की हत्या के मामले में शंकर पांडे, कमलेश चौधरी समेत चार नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. इस हत्याकांड के बाद से ही गाजीपुर में खासकर व्यापारी वर्ग में डर बना हुआ है. लोगों को आशंका है कि कथित तौर पर सक्रिय कटरा गैंग के सदस्य रंगदारी और आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं.
कौन था गैंगेस्टर कमलेश चौधरी?
कमलेश चौधरी सदर कोतवाली क्षेत्र के गौशाबाद गांव का निवासी था. वह अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था. उसका एक भाई संजय है, जिसकी पत्नी गांव की प्रधान है, जबकि दूसरा भाई एक निजी कंपनी में इंजीनियर की नौकरी करता है. स्थानीय लोगों के अनुसार कमलेश चौधरी और कटरा गैंग के कथित सरगना शंकर पांडे के बीच वर्षों पुरानी गहरी दोस्ती थी.
कैसे पड़ा कटरा गैंग नाम?
बताया जाता है कि करीब 10 से 12 साल फुल्लनपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास बनने वाले कटरे के आसपास युवाओं का एक ग्रुप सक्रिय हुआ, जिसे बाद में कटरा गैंग के नाम से जाना जाने लगा. आरोप है कि इस गैंग से जुड़े सदस्य एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संपर्क में रहते थे और किसी भी विवाद या झगड़े की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर मारपीट, धमकी और फायरिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देते थे.
दर्ज थे 7 आपराधिक मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कमलेश चौधरी के खिलाफ 7 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे. वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि उसके खिलाफ कई अन्य गंभीर आरोप भी रहे, जो कभी पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन सके. इसी तरह शंकर पांडे के बारे में भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वह कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा, लेकिन अधिकांश मामलों में उसका नाम सामने नहीं आया.
विनीत राय के पिता आलोक राय ने भी आरोप लगाया था कि कथित गैंग को पुलिस संरक्षण प्राप्त था और इसके सदस्य समयसमय पर प्रभावशाली लोगों से संबंध बनाकर अपना नेटवर्क मजबूत करते थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
अंतिम संस्कार के दौरान हुई झड़प
कमलेश चौधरी की मौत के बाद उसके गांव में भारी संख्या में लोग जुटे. अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में पत्थरबाजी में बदल गई. इस घटना में क्षेत्राधिकारी सहित 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया और शव का अंतिम संस्कार कराया.
पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बताया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, पथराव और कानूनव्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में कमलेश चौधरी के भाई संजय समेत 60 से 70 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर रासुका के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है.


