
उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के लिए आखिरकार वो घड़ी आ गई है जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे शिक्षामित्रों के लिए योगी सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। सरकार ने उनके मानदेय (सैलरी) में भारी बढ़ोतरी करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे प्रदेश के करीब 1.43 लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने जा रहा है। सरकार के इस कदम से शिक्षामित्रों में जश्न का माहौल है।
गोरखपुर में सीएम योगी करेंगे भव्य शुरुआत
इस बड़ी खुशखबरी पर आधिकारिक मुहर लगाने के लिए 5 मई को गोरखपुर में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान नई पहल की औपचारिक शुरुआत करेंगे। सबसे खास बात यह है कि इसी दिन यूपी के अन्य सभी जिलों में भी समानांतर रूप से कार्यक्रम किए जाएंगे, ताकि पूरे प्रदेश के शिक्षामित्र इस ऐतिहासिक जश्न का सीधा हिस्सा बन सकें।
अब हर महीने मिलेंगे ₹18,000, इस तारीख से लागू होंगी दरें
सरकार के इस बड़े फैसले के बाद अब परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों की आर्थिक टेंशन पूरी तरह खत्म हो गई है। नई व्यवस्था के तहत अब उन्हें हर महीने ₹18,000 मानदेय दिया जा रहा है। यह बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल 2026 से ही प्रभावी मानी गई हैं, यानी शिक्षामित्रों को इसका फायदा मिलना शुरू हो चुका है। इस बड़े फैसले का लाभ उठाने वालों में बेसिक शिक्षा विभाग के 13,597 और समग्र शिक्षा के तहत काम करने वाले 1,29,332 शिक्षामित्र शामिल हैं।
शिक्षामित्रों का बढ़ेगा मनोबल और सुधरेगी माली हालत
उत्तर प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस मानदेय बढ़ोतरी से न केवल शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होगा, बल्कि उनका मनोबल भी सातवें आसमान पर पहुंच जाएगा। जब घर की माली हालत और आर्थिक तंगी ठीक होगी, तो शिक्षामित्र अपने कार्यस्थल पर अधिक उत्साह, लगन और नई ऊर्जा के साथ अपना योगदान दे पाएंगे, जिससे उनका जीवन स्तर भी बेहतर होगा।
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने पर जोर
योगी सरकार की इस अनोखी पहल का असली मकसद सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बहुत ऊपर उठाना है। मानदेय बढ़ने से नियमित शिक्षकों और शिक्षामित्रों के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग बनेगा, जिसका सीधा सकारात्मक असर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य यही है कि प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत बनाया जा सके।



