बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब पांच लाख शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बेहद जरूरी और बड़ा निर्देश जारी किया है। विभाग के इस नए आदेश के बाद राज्य के सभी शिक्षकों में खलबली मच गई है। अब हर शिक्षक को अपना वर्तमान और स्थायी (लोकल और परमानेंट) पता ऑनलाइन दर्ज कराना होगा।

शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि सभी शिक्षकों को ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल पर जाकर अपनी पूरी जानकारी देनी होगी और इसके साथ अपना निवास प्रमाण पत्र (आवासीय प्रमाणपत्र) भी अपलोड करना होगा। सरकार का मकसद राज्य के सभी शिक्षकों का एक बिल्कुल सटीक और नया डेटाबेस तैयार करना है, ताकि विभाग को यह पता रहे कि कौन सा शिक्षक कहां रह रहा है और उसकी तैनाती कहां है।

ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर देनी होगी पल-पल की जानकारी

विभाग की तरफ से जारी गाइडलाइन के मुताबिक, शिक्षकों को अपने दोनों पते की पूरी डिटेल देनी होगी। इसमें केवल शहर या गांव का नाम लिखने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिला, प्रखंड, पंचायत, गांव, वार्ड नंबर, पोस्ट ऑफिस और पिन कोड जैसी छोटी से छोटी जानकारी भी पोर्टल पर भरनी होगी। जिन शिक्षकों ने पहले से अपना एड्रेस भर रखा है, उन्हें भी अपनी जानकारी को दोबारा चेक करने और जरूरत पड़ने पर उसे अपडेट करने का मौका दिया गया है।

सिर्फ फॉर्म भरने से नहीं चलेगा काम, यह कागज करना होगा अपलोड

शिक्षकों को यह बात ध्यान रखनी होगी कि सिर्फ पोर्टल पर पता टाइप कर देना ही काफी नहीं होगा। इसके साथ ही उन्हें अपने आवासीय प्रमाणपत्र की स्कैन कॉपी भी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। हालांकि, जिन शिक्षकों का वर्तमान और स्थायी पता बिल्कुल एक ही है, उनके लिए राहत की बात है। वे पोर्टल पर दिए गए एक खास ऑप्शन (टिक बॉक्स) का इस्तेमाल करके दोनों जगह एक ही जानकारी को आसानी से सबमिट कर सकते हैं।

समय खत्म होने के बाद नहीं मिलेगा दूसरा मौका

शिक्षा विभाग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पहले ही चेतावनी दे दी है। विभाग का कहना है कि तय की गई आखिरी तारीख के बाद पूरे डेटा को ‘फ्रीज’ कर दिया जाएगा। एक बार डेटा फ्रीज होने के बाद कोई भी शिक्षक अपने पते में किसी भी तरह का बदलाव या सुधार नहीं कर पाएगा। इसलिए सभी शिक्षकों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपनी बिल्कुल सही जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर दें, ताकि बाद में कोई पछतावा न हो।

सरकार क्यों जुटा रही है शिक्षकों के घर का पता?

इस पूरी कसरत के पीछे शिक्षा विभाग की एक बड़ी प्लानिंग है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही विभाग के पास यह साफ डेटा होगा कि कौन सा शिक्षक असल में किस जिले या क्षेत्र का रहने वाला है और अभी वह किस जगह पर नौकरी कर रहा है। इसके जरिए सरकार यह भी आसानी से पता लगा सकेगी कि कोई शिक्षक अपने स्कूल और अपने गृह क्षेत्र (होम टाउन) से कितनी दूरी पर रह रहा है।

शादीशुदा महिला शिक्षिकाओं के सामने खड़ी हुई बड़ी दुविधा

सरकार के इस नए आदेश ने राज्य की हजारों महिला शिक्षिकाओं को असमंजस में डाल दिया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन महिला शिक्षकों को हो रही है, जिनकी शादी नौकरी लगने के बाद हुई है। अब उनके सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वे स्थायी पते (Permanent Address) के कॉलम में अपने मायके का पता दर्ज करें या फिर ससुराल का। फिलहाल इस उलझन को दूर करने के लिए महिलाएं विभाग की तरफ से किसी साफ और नई गाइडलाइन का इंतजार कर रही हैं।